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विपत्ति-ग्रस्त [कविता] - डॉ महेन्द्र भटनागर



बदली छायी
 डा. महेंद्र भटनागर रचनाकार परिचय:-


डा. महेंद्रभटनागर
सर्जना-भवन, 110 बलवन्तनगर, गांधी रोड, ग्वालियर -- 474 002 [म. प्र.]

फ़ोन : 0751-4092908 / मो. 98 934 09793
E-Mail : drmahendra02@gmail.com
drmahendrabh@rediffmail.com

बारिश थमने का नाम नहीं लेती,
जल में डूबे गाँवों-क़स्बों को
थोड़ा भी आराम नहीं देती!

सचमुच, इस बरस तो
क़हर ही टूट पड़ा है,
देवा, भौचक खामोश खड़ा है।

ढह गया घरौंधा
छप्पर-टप्पर,
बस, असबाब पड़ा है औंधा!

आटा-दाल गया सब बह,
देवा, भूखा रह।
इंधन गीला
नहीं जलेगा चूल्हा,

तैर रहा है चौका
रहा-सहा।

घन-घन करते नभ में वायुयान
मँडराते गिद्धों जैसे!

शायद,

नेता / मंत्री आये
करने चेहलक़दमी!

उत्तर-दक्षिण / पूरब-पश्चिम
छायी ग़मी-ग़मी!

अपफ़सोस
कि बारिश नहीं थमी!

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