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99वें की दौड़ [कविता]- नीतू सिंह ‘रेणुका’

रचनाकाररचनाकार परिचय:-


नाम: नीतू सिंह ‘रेणुका’
जन्मतिथि: 30 जून 1984
प्रकाशित रचनाएं: ‘मेरा गगन’ नामक काव्य संग्रह (प्रकाशन वर्ष -2013), ‘समुद्र की रेत’ कथा संग्रह (प्रकाशन वर्ष -2016)
ई-मेल: n30061984@gmail.com
यह 99वें की दौड़ है
सब 100 के पीछे भाग रहे हैं।
दिन को जागने वाले इंसान
उल्लू बनकर जाग रहे हैं।
सब 100 के पीछे भाग रहे हैं।

आधे अंक सॆ पिछड़ती
तो थोड़ा सा रो लेती
चौथाई से पिछड़ी हूँ
जीतती, चौथाई जो ले लेती
कोयल न होकर काग रहे हैं।
सब 100 के पीछे भाग रहे हैं।

अपने अंकों से नहीं दु:खी
उसके नंबर दुखती रग हैं
किस पर चढ़ आगे बढ़ जाऊं
इसी फेर में सारा जग है
हम इंसान भी फुँफकारते नाग रहे हैं।
सब 100 के पीछे भाग रहे हैं।

क्यूँ हम पर लदकर
चलते मात-पिता तनकर
जिनकी ख़ातिर अब हमको
क्यूँ डँसते काल सम बनकर
महीने चैत्र, फाल्गुन, माघ रहे हैं।
सब 100 के पीछे भाग रहे हैं।

गगनचुंभी संस्थानों की माला
क्यूँ नंबरों की खाक़ छान रही हैं
क्यूँ यह मौलिकता को छोड़
रटंत विद्या को मान रही हैं
क्यूँ नंबरों से इनको अनुराग रहे है।
सब 100 के पीछे भाग रहे हैं।

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