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पशोपेश [कविता]- भगवान धामी

रचनाकाररचनाकार परिचय:-

नाम- भगवान धामी
जन्म- 12 मई 1991
स्थान- स्यांकुरी नामक सीमान्त गांव जो पिथौरागढ़ जिला उत्तराखण्ड में है।

सामान्य अध्ययन का अध्यापन करना शौक है। पेशे से सरकारी कर्मचारी।

वर्तमान में देहरादून में निवासित।

Blog लिखता हूँ- dhami-poems.blogspot.com

ये मेरा फेसबुक पेज है-
https://www.facebook.com/DhamiBhagwan/

e mail- dhamigod33@gmail.com
अजीब सी पशोपेश है ज़िन्दगी
सच नज़र नहीं आता झूठ समझ नहीं आता

मैं तेरे साथ तो हूँ पर
तू दिल में ही आता है जुबाँ पे नहीं आता
तेरे जैसा सितमगार नहीं कि यूँही याद आके मुड़ जाऊँ
मैं तो बहम हूँ तेरा सांसों में तो आता हूँ लबों पे नहीं आता

मेरे मंज़िल की सीढ़ी भी यहीं थी कहीं पर
आज रास्ते हज़ारों बन गए रास्ता नज़र नहीं आता
सारी रात इसी पशोपेश में गुजर गई अपनी तो
वो शख्स यादों में तो आता है पर सामने नहीं आता

वाकया क्या कहूँ दुनिया वालों
चल तो रहा हूँ मीलों के फासले पर
चेहरा तेरा पीछे नहीं छूटता,
एक अजीब सी रुमानियत थी उस शख्स के आँखों में
आँखे बंद होती है पर वो नज़ारा नहीं हटता।




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