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मध्य-वर्ग (चित्र - 2) [कविता] - डॉ महेन्द्र भटनागर

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 डा. महेंद्र भटनागर रचनाकार परिचय:-


डा. महेंद्रभटनागर
सर्जना-भवन, 110 बलवन्तनगर, गांधी रोड, ग्वालियर -- 474 002 [म. प्र.]

फ़ोन : 0751-4092908 / मो. 98 934 09793
E-Mail : drmahendra02@gmail.com
drmahendrabh@rediffmail.com




दस बज रहे हैं रात के-
कापफ़ी दूर पर
कुछ बेसुरे-से ढोल बजते हैं
किसी बारात के।
अति-तार स्वर से
गा रहा है रेडियो सीलोन
बासी गीत पिफ़ल्मी
‘आन’ के ‘बरसात’ के।
पास के घर में
थकी-सी अर्द्ध-निद्रित
तीस वर्षीया कुमारी
करवटें लेती किसी की याद में।
क्लर्क है उसका पिता
और वह उलझा हुआ है
पफ़ाइलों के ढेर में।
(जिदगी के फेर में!)
सोचता है -
रात कापफ़ी हो गयी,
अब शेष देखा जायगा जी बाद में।
झँपने लगीं पलकें
बडे़ बेपिफ़क्र बचपन की सहेजी याद में।





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