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दो गज़लें [ग़ज़ल] - प्राण शर्मा

प्राण शर्मा रचनाकार परिचय:-

प्राण शर्मा वरिष्ठ लेखक और प्रसिद्ध शायर हैं और इन दिनों ब्रिटेन में अवस्थित हैं। आप ग़ज़ल के जाने मानें उस्तादों में गिने जाते हैं। आप के "गज़ल कहता हूँ' और 'सुराही' काव्य संग्रह प्रकाशित हैं, साथ ही साथ अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं।


ग़ज़ल -1 - प्राण शर्मा
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हाल की बदहाली ने मुझको नहीं जाने दिया
खाने का सामान बाहिर से नहीं लाने दिया
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भूल से मैं आ गया ऐसे ठिकाने पर जहाँ
दहशतों ने चैन पल भर को नहीं पाने दिया
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बैठा ही था मैं नहा कर भजन गाने के लिए
उफ़,किसी विस्फोट ने मुझको नहीं गाने दिया
+
यूँ तो निकला था हमेशा की तरह सूरज मगर
रौशनी को मेघ ने नीचे नहीं आने दिया
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जी रहे हैं हम सभी उसके असर में दोस्तो
प्यार को शक़ ने किसी दिल में नहीं छाने दिया

ग़ज़ल -2 - प्राण शर्मा
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नौजवानी दोस्तो यूँ हर जवां में चाहिए
रोशनी जैसे ज़मीं और आसमां में चाहिए
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दोस्ती का दोस्तो टिकना कोई मुश्किल नहीं
सच हमेशा दोस्तों के हर बयां में चाहिए
+
ज़िक्र उसमें हो भले ही दर्द का तेरे मगर
दर्द धरती का भी तेरी दास्तां में चाहिए
+
और भी होंगे कई कोहेनूर जैसे हीरे जी
कोई उनको ढूँढने वाला जहां में चाहिए।
+
हम सभी खुशहाल हों ऐ `प्राण` इसके वास्ते
एकता हर हाल में हिन्दोस्तां में चाहए

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