रचनाकाररचनाकार परिचय:-

नाम- भगवान धामी
जन्म- 12 मई 1991
स्थान- स्यांकुरी नामक सीमान्त गांव जो पिथौरागढ़ जिला उत्तराखण्ड में है।

सामान्य अध्ययन का अध्यापन करना शौक है। पेशे से सरकारी कर्मचारी।

वर्तमान में देहरादून में निवासित।

Blog लिखता हूँ- dhami-poems.blogspot.com

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जीवन लग जाता है जीवन बनाने में
एक जीवन है कि उसका कोई हिसाब नहीं है।

ए जीवन चल कि मिल के बात करें आज
एक रास्ता मैं बनाता हूँ एक रास्ता तू भी बना
या तो मैं तुझे बनाऊँ या तू मुझे बना।
संघर्षपथ है माना जीवन
पर अडिग वाकया है मेरा भी मन

ए जीवन तू चलके दिखा कदम दो कदम
मैं लड़खड़ा ना जाऊँ तो कहना
दे हिम्मत चल साथ हरदम
मैं तेरे संग हूँ तू रहना मेरे संग
मैं भागने ना लगूँ तो कहना

पता है मुझे जीवन है तू
निकल जायेगा एक बहाने में
जीवन लग जाता है जीवन बनाने में

क्या खोया क्या पाया
चल ए जीवन तू अपना हिसाब दे
मैं भी उकेरूँ कुछ पन्ने ला ऐसी किताब दे

माना तेरा शागिर्द हूँ, तेरा हमदर्द हूँ
पर ए जीवन तू गर्म तो मैं सर्द हूँ
समय तो लगेगा तुझ तक आने में
जीवन लग जाता है जीवन बनाने में।।




2 comments:

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