HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

खतरनाक [कविता]- बृजेश नीरज

रचनाकाररचनाकार परिचय:-

नाम- बृजेश नीरज
पिता- स्व0 जगदीश नारायण सिंह गौतम
माता- स्व0 अवध राजी
जन्मतिथि- 19-08-1966
जन्म स्थान- लखनऊ, उत्तर प्रदेश
ईमेल- brijeshkrsingh19@gmail.como
निवास- 65/44, शंकर पुरी, छितवापुर रोड, लखनऊ- 226001
सम्प्रति- उ0प्र0 सरकार की सेवा में कार्यरत
प्रकाशित कृतियाँ- कोहरा सूरज धूप (कविता संग्रह), राजनीति के रंग (आलेख संग्रह), कतरा-कतरा एहसास (काव्य संग्रह), आँख भर आकाश (काव्य संग्रह), वे तीसरी दुनिया के लोग (कविता संग्रह)
साझा संकलन- त्रिसुगंधि (बोधि प्रकाशन), परों को खोलते हुए-1 (अंजुमन प्रकाशन), क्योंकि हम जिन्दा हैं (ज्ञानोदय प्रकाशन), काव्य सुगंध-२ (अनुराधा प्रकाशन), अनुभूति के इन्द्रधनुष (अमर भारती), सरगम
संपादन- कविता संकलन- ‘सारांश समय का’
ई-पत्रिका- शब्द व्यंजना
सम्मान- विमला देवी स्मृति सम्मान २०१३


तीखे-नमकीन की खातिर
जीभ की लपलपाहट के बावजूद
लिखते हैं मीठा

मन उमगता हो भोग को
फिर भी लिखना तपस्या

देह पर उगे
काँटों को छुपा
लिखा जाता है
फूल

वासना भरी व्याकुलता में
लिखते हैं प्रेम

रेगिस्तानी मैदान में खड़े होकर
लिख दी ओस

छद्म प्रतिबद्धताओं के इस दौर में
सबसे खतरनाक होता है
मुखौटे पहनकर
कली लिखना

उससे भी खतरनाक है
लिखना सच






टिप्पणी पोस्ट करें

4 टिप्पणियां

  1. अनुपम सृजन ! आभार "एकलव्य"

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत खूब आदरणीय । सत्य को ही आपने लिखा है खूबसूरती के साथ ।

    जवाब देंहटाएं
  3. खदखदाते ,खलबलाते भावों को अभिव्यक्त करती, जलते रेगिस्तान में नगे बदन खड़ी पंक्तियाँ।
    चुभती वास्तविकता से चुहचुहाते पसीने की तरह।

    जवाब देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...