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कितना भयंकर आश्चर्य है? [कविता]- मनोरंजन कुमार तिवारी

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 मनोरंजन कुमार तिवारी रचनाकार परिचय:-



नाम:- मनोरंजन कुमार तिवारी जन्म तिथि:- 06/01/1980 जन्म स्थान:- भदवर, जिला- बक्सर, बिहार पिता का नाम:- श्री कामेश्वर नाथ तिवारी गाँव:- भद्वर, जिला- बक्सर, बिहार वर्तमान पत्ता:- C/o- कर्ण सिंह, गाँव- घिटोरनी, नजदीक "तालाब",नई दिल्ही-30 मोबाइल न.- 9899018149 Email ID- manoranjan.tk@gmail.com


अब यकीन हो गया,
लड़कियां, इतनी सरल हृदय होती है की,
छोटी- छोटी बातों पर भी खिलखिला कर हॅंसने लगती लगती है,
और लोग ख़ामख़ाह ही,
उनकी हँसी का कोई ख़ास अर्थ निकलने में लग जाते है,
लड़कियां तो कहीं एक छोटे बच्चे को रोता हुआ देख कर भी,
हुलस कर हँसने हुए कहती है,
"अरे देख रोता हुआ कितना प्यारा लग रहा है"
तो कभी चलायमान सीड़ियों पर,
ज़ो नीचे से उपर जाती है,
उपर से एक- दो कदम पैर रख कर,
ठहाका लगा कर हँस पड़ती है,
मेरी डेढ़ साल की बेटी,
जैसे ही देखती है की, कोई उसका फोटो खींच रहा है,
खट से अपनी बतीसी चमका देती है,
सच, कितना आसान है,
लड़कियों को हँसाना,
और कितना भयंकर आश्चर्य है की,
इतना आसान होते हुए भी,
असंख्यों लड़कियों कि हँसी,
ना जाने कहाँ गायब हो गई है।

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