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सभ्यताओं का संघर्ष [कविता]- कृष्ण कुमार यादव





रचनाकार परिचय:-


कृष्ण कुमार यादव : सम्प्रति भारत सरकार में निदेशक। प्रशासन के साथ-साथ साहित्य, लेखन और ब्लाॅगिंग के क्षेत्र में भी चर्चित नाम। जवाहर नवोदय विद्यालय-आज़मगढ़ एवं तत्पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1999 में राजनीति-शास्त्र में परास्नातक। देश की प्राय: अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर रचनाओं का निरंतर प्रकाशन। व्यक्तिश: 'शब्द-सृजन की ओर' और 'डाकिया डाक लाया' एवं युगल रूप में 'सप्तरंगी प्रेम', 'उत्सव के रंग' और 'बाल-दुनिया' ब्लॉग का सञ्चालन। इंटरनेट पर 'कविता कोश' में भी कविताएँ संकलित। 100 से अधिक पुस्तकों/संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित। आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रसारण। कुल 7 कृतियाँ प्रकाशित- 'अभिलाषा' (काव्य-संग्रह, 2005) 'अभिव्यक्तियों के बहाने' व 'अनुभूतियाँ और विमर्श' (निबंध-संग्रह, 2006 व 2007), 'India Post : 150 Glorious Years' (2006), 'क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा', 'जंगल में क्रिकेट' (बाल-गीत संग्रह,2012) एवं '16 आने 16 लोग'(निबंध-संग्रह, 2014)। राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा शताधिक सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त। व्यक्तित्व-कृतित्व पर 'बाल साहित्य समीक्षा' (सं. डा. राष्ट्रबंधु, कानपुर, सितम्बर 2007) और 'गुफ्तगू' (सं. मो. इम्तियाज़ गाज़ी, इलाहाबाद, मार्च 2008) पत्रिकाओं द्वारा विशेषांक जारी। व्यक्तित्व-कृतित्व पर एक पुस्तक 'बढ़ते चरण शिखर की ओर : कृष्ण कुमार यादव' (सं0- दुर्गाचरण मिश्र, 2009) प्रकाशित। संपर्क : कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर-342001, ई-मेलः kkyadav.t@gmail.com ब्लॉग: www.kkyadav.blogspot.com, www.dakbabu.blogspot.com


सभ्यताओं का संघर्ष
एक सभ्यता और दूसरी सभ्यता
के बीच अन्तर करता
और उनमें एक द्वन्द्व पैदा करता
लेकिन इससे पहले कि
एक सभ्यता विजित होती
उसके द्वारा पल्लवित-पुष्पित
दूसरी सभ्यता भी
सर उठाकर खड़ी हो जाती
अब
वह किसी सभ्यता के
रहमोकरम पर नहीं
खुद को
सभ्यता का मानदंड मानती है
बस
ऐसे ही चलता है
सभ्यताओं का संघर्ष
कोई नहीं सोचता
सभ्यताओं की आड़ में
यह मानवीय संघर्ष है।

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1 टिप्पणियां

  1. कृष्ण कुमार यादव जी, सुंदर रचना, आज कल तो लोग सभ्यता और परंपरा के नाम पर अपनी मनमानी करने लगे हैं.

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