HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

वो सम्मान [लघुकथा]- शबनम शर्मा

रचनाकाररचनाकार परिचय:-

शबनम शर्मा
अनमोल कुंज, पुलिस चैकी के पीछे, मेन बाजार, माजरा, तह. पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हि.प्र. – 173021 मोब. - 09816838909, 09638569237

पिछले माह मुझे एक कार्यक्रम में जाने का मौका मिला। मेरी एक परिचिता मुझे ले गई। उसने बताया कि यहाँ के महिला मंडल ने उन जोड़ों को सम्मानित करने के लिये बुलाया है जिन्होंने जीवन के 50 साल बिताए हैं। कार्यक्रम शहर के एक हाॅल में था। करीब 70-80 दम्पत्ति जोड़े बैठे थे। मासूम बुजुर्ग चेहरे। बोलती आँखें, शाँत चेहरे और इक ठहरा सा जीवन। सब एक-दूसरे को एक दयनीय नज़रों से देख रहे थे। कार्यक्रम शुरु हुआ। सूची में लिखे नामों के साथ सबको मंच पर आमंत्रित किया गया। शाॅल पहनाकर, स्मृति चिन्ह लेकर सब अपने- अपने स्थान पर आ गये। यकीन मानिये पूरे हाॅल में एक अजीब सा सन्नाटा था। मेरी परिचिता ने मुझे कुछ शब्द बोलने को मंच पर आमंत्रित किया। उनके लिये हार्दिक अभिवादन के सिवा दिल में और क्या हो सकता है। वो लोग मेरे सामने थे जिन्होंने अपने माता-पिता, अपने बच्चों और फिर अपने नाती-पोतों को पाला था, आज यहाँ निचुड़ी सी देह लिये बैठे हैं। सोचा मन की शंका मिटा ही लूँ। 4-5 लाइनें उनके स्वागत, उनकी सेहत और उनके भविष्य की उज्जवल कामना करके पूछ ही बैठी, ‘‘कृपया आज वो लोग हाथ उठायें, जो अपने बच्चों के साथ रह रहे हैं और खुश हैं।’’ सब लोग एक-दूसरे की ओर ताकने लगे जैसे मैंने कोई कितना बड़ा गलत प्रश्न पूछ लिया हो। सबके हाथ बंध गये, एक भी हाथ ऊपर नहीं उठा। मंच की ओर थी टकटकी बाँधे अनेक प्रश्नों को समेटे शून्य में ताकती आँखें।






टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...