रचनाकाररचनाकार परिचय:-

शबनम शर्मा
अनमोल कुंज, पुलिस चैकी के पीछे, मेन बाजार, माजरा, तह. पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हि.प्र. – 173021 मोब. - 09816838909, 09638569237


ज़िन्दगी की नाव,
इक लम्बी नदी,
कई उतार-चढ़ाव,
अच्छी लगी।
अचानक इक तूफ़ान
में फंसी, कि भंवर भी
समेट ले गया, पता ही
न चला, कब मेरे चप्पू
मेरे हाथों से छूट बह गये
पानी मेंख् हो गई मैं अकेली
अनाथ उस नाव पर, जिसमें
संजोए थे मैंने अनगिनत सपने,
मन आवाज़ें लगाता, चीखती मेरी
आत्मा, पर अनायास
सूख गई नदी, बह गये सपने
व धीरे-धीरे मेरी नाव भी
निकल गई मुझे छोड़कर अकेला
सिर्फ उस ऊँचे पत्थर पर,
जहाँ से कभी देख सकती थी मैं
उफनता पानी, छलकती लहरें
व उन्माद संगीत।
आती है नज़र इक उम्मीद कि
कभी पानी बरसेगा, नदी बहेगी,
मेरी नाव आयेगी,
मेरी नाव फिर से आयेगी।








4 comments:

  1. नमस्ते,
    आपकी यह प्रस्तुति BLOG "पाँच लिंकों का आनंद"
    (http://halchalwith5links.blogspot.in ) में
    गुरूवार 11-01-2018 को प्रकाशनार्थ 909 वें अंक में सम्मिलित की गयी है।
    प्रातः 4 बजे के उपरान्त प्रकाशित अंक अवलोकनार्थ उपलब्ध होगा।
    चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर।
    सधन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं

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