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भैया देखो रोबोट व सीमा पर मैं जाऊँगा [कविता]- डॉ.प्रमोद सोनवानी " पुष्प "

रचनाकार परिचय:-

डॉ.प्रमोद सोनवानी " पुष्प "
संपादक- "वनाँचल सृजन"
"श्री फूलेंद्र साहित्य निकेतन"
तमनार/पड़ीगाँव-रायगढ़(छ.ग.)
भारत , पिन-496107
ई-मेल:-Pramodpushp10@gmail. com
" भैया देखो रोबोट "
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भैया देखो है यह रोबोट ,
जादू गजब दिखाता है।
बटन दबाओ तो वह झटपट ,
करतब अपना दिखलाता है ।।1।।

इधर-उधर वह घूम-घूमकर ,
काम निरंतर करता है ।
मेहनत करके खूब लगन से ,
सबकी सेवा करता है ।।2।।

यह अपना प्यारा रोबोट ,
समय कभी न खोता है ।
नये ज़माने का यह रोबोट ,
मददगार कहलाता है ।।3।।

" सीमा पर मैं जाऊँगा "
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दादा जी की बंदूक लेकर ,
सीमा पर मैं जाऊँगा ।
हर दुश्मन से लोहा लेकर ,
उनको मजा चखाऊँगा ।।1।।

कोई दुश्मन टिक न पाये ,
ऐसा रंग जमाऊँगा ।
आगे बढ़कर समर क्षेत्र में ,
गोली खूब चलाऊँगा ।।2।।

कोई दुश्मन नजर उठाकर ,
हमें देख न पायेगा ।
अगर कहीं वह नजर उठाया ,
निश्चित मुंह की खायेगा ।।3।।




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