रचनाकार परिचय:-

डॉ.प्रमोद सोनवानी " पुष्प "
संपादक- "वनाँचल सृजन"
"श्री फूलेंद्र साहित्य निकेतन"
तमनार/पड़ीगाँव-रायगढ़(छ.ग.)
भारत , पिन-496107
ई-मेल:-Pramodpushp10@gmail. com
" चिड़िया रानी "
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प्यारी-प्यारी चिड़िया रानी ,
चूं-चूं,चक-चक करती है ।
लगती है वह बड़ी सयानी ,
सबके मन को भाती है ।।1।।

मेरे घर के आँगन में ,
बड़े सवेरे आती है ।
दाना चुग-चुग बड़े मजे से ,
फुदक-फुदक कर गाती है ।।2।।

फिर हमें वह टा-टा कहकर ,
फुर्र से उड़ जाती है ।
नन्ही सी है चिड़िया रानी ,
मन सबका हर जाती है ।।3।।

" फूल "
---------
दो अक्षर का नाम वह ,
कहलाता है फूल ।
खिलखिलाते देख उसे ,
मन जाता है भूल ।।1।।

तितली-भौंरे आ जाते हैं ,
इनसे नित बतियानें ।
मुफ़्त सभी को देते खुशबू ,
करते नहीं बहानें ।।2।।

इसी तरह से जो हरदम ,
दूसरों पर प्यार लुटाते ।
सच मानों वह सारे जग में ,
सम्मान सदा ही पाते ।।3।।




1 comments:

  1. प्रमोद जी, आपकी "चिड़िया रानी" यह रचना हर किसी के मन को छु जाती. यह बहुत गलत रिवाज हैं दुनिया में जो बेटी माता पिता घर जन्म लेती हैं जहा उसका सबकुछ होता हैं एक दिन उसे वह अपना सबकुछ छोड़कर एक दिन किसी दूसरें के घर जाना होता हैं, अजीब दस्तूर हैं इस दुनिया का. ;((

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