रचनाकाररचनाकार परिचय:-


नाम: नीतू सिंह ‘रेणुका’
जन्मतिथि: 30 जून 1984
प्रकाशित रचनाएं: ‘मेरा गगन’ नामक काव्य संग्रह (प्रकाशन वर्ष -2013), ‘समुद्र की रेत’ कथा संग्रह (प्रकाशन वर्ष -2016)
ई-मेल: n30061984@gmail.com



I

मेरे हौंसले टूट कर बिखर गए चूड़ियों की तरह
आई मंज़िल और मेरे बीच निराशा, दूरियों की तरह
खुशी मुझसे रूठी, रूठी हुई माता की तरह
रास्ते अब दिखाई नहीं देते, मेरे विधाता की तरह
सपने भी खोए, रात में गुम उजालों की तरह
मंज़िल दिखे है मुझे कुछ-कुछ खोखले ख्यालों की तरह
मेहनत ख़त्म हुई मेरी अब, जली हुई बाती की तरह
निराशा घेरे है मुझे, दूल्हे को बराती की तरह
चिंता लिपटती जा रही है मुझसे, बेलों की तरह
घट गई क़ीमत मेरी, मिट्टी के ढेलों की तरह
II

लेकिन टूटे हौंसलों को चमकाना होगा, टूटते तारों की तरह
मंज़िल से दूरियों को मिटाना होगा, ढहती दीवारों की तरह
रूठी खुशी को मनाना होगा, नित-नित आते सूरज की तरह
पंगडंडियों को आप बन जाना होगा, लुग्दी से क़ाग़ज की तरह
टूटे सपनों को फिर से चुनना होगा, रेत से सीपियों की तरह
सीखना होगा मंज़िलों को पाना, रहस्यमयी लिपियों की तरह
जली हुई रस्सी को बल दिलाना होगा, मेरे हौंसलों की तरह
आशा को फिर टिमटिमाना होगा, जुगनुओं के दलों की तरह
व्यथा-चिंता को घटाना होगा, ऊँट के मुँह में ज़ीरे की तरह
संसार में ख़ुद को बनाना होगा, एक बेशक़ीमती हीरे की तरह


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