रचनाकार परिचय:-

डॉ.प्रमोद सोनवानी " पुष्प "
संपादक- "वनाँचल सृजन"
"श्री फूलेंद्र साहित्य निकेतन"
तमनार/पड़ीगाँव-रायगढ़(छ.ग.)
भारत , पिन-496107
ई-मेल:-Pramodpushp10@gmail. com
" सरदी के दिन "


सुबह-सवेरे हवा चल रही ,
कैसे करें पढ़ाई ।
तनिक बताओ हमको दादा,
सरदी क्यों है आई ।।1।।

शाल-दुशाले हम खरीदेंगे ,
पर है कितनी महंगाई ।
आ गये है सरदी के दिन ,
कैसे करें पढ़ाई ।।2।।

सरदी के दिन सचमुच लगते ,
सबको है दुखदाई ।
सुबह-सवेरे हम तो दादा ,
कैसे करें पढ़ाई ।।3।।




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