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आदमी और स्वप्न [कविता] - डॉ महेन्द्र भटनागर

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 डा. महेंद्र भटनागर रचनाकार परिचय:-


डा. महेंद्रभटनागर
सर्जना-भवन, 110 बलवन्तनगर, गांधी रोड, ग्वालियर -- 474 002 [म. प्र.]

फ़ोन : 0751-4092908 / मो. 98 934 09793
E-Mail : drmahendra02@gmail.com
drmahendrabh@rediffmail.com



आदमी का प्यार सपनों से
सनातन है।
मृत्यु के भी सामने
वह,
मग्न होकर देखता है स्वप्न!
सपने देखना, मानों,
जीवन की निशानी है,
यम की पराजय की कहानी है।
सपने आदमी को
मुसकराहट-चाह देते हैं,
आँसू-आह देते हैं।
हृदय में भर जुन्हाई-ज्वार,
जीने की ललक उत्पन्न कर,
पतझार को
मधुमास के रंगीन-चित्रें का
नया उपहार देते हैं,
विजय का हार देते हैं!
सँजोओ, स्वप्न की सौगात,
महँगी है।
मिली नेमत,
इसे दिन-रात पलकों में सहेजो।
‘स्वप्नदर्शी’ शब्द
परिभाषा ‘मनुज’ की,
गति-प्रगति का
प्रेरणा-आधार,
संकट-सिंधु में
संसार-नौका की
सबल पतवार!
गौरवपूर्ण सुन्दरतम विशेषण।
स्वप्न-एषण और आकर्षण
सनातन है, सनातन है।
आदमी का प्यार सपनों से
सनातन है।



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