रचनाकार परिचय:-

रचना सागर का जन्म 25 दिसम्बर 1982 को बिहार के छ्परा नामक छोटे से कस्बे के एक छोटे से व्यवसायिक परिवार मे हुआ। इनकी शिक्षा-दीक्षा भी वहीं हुई। आरंभ से ही इन्हे साहित्य मे रूचि थी। आप अंतर्जाल पर विशेष रूप से बाल साहित्य सृजन में सक्रिय हैं।
भ्रष्टाचार मुक्त समाज निर्माण और युवा वर्ग [कविता]- रचना सागर


चल पड़ी योवाओं की टोली
भ्रष्टाचार मिटाने को
सत्य का बिगुल बजाने को
झूठों का नकाब हटाने को

घूसखोर के लिए है रोड़े
घोटालों का भंडाफोडें
शो ऑफ हमको आता नहीं
काला धन हमको शुभ आता नहीं

रिश्वत चाहे छोटी हो या मोटी हो
गुलाम हमें बनाती है
इस रिश्वत से बचना है
नया इतिहास रचना है

नया इतिहास रच कर
खुशियों से दामन भर कर
अब की लोहड़ी हम मनाएंगे
मक्कारों की मक्कारी का
ऐसा ढोल बजाएंगे जहां
सच्चाई का होगा बोलबाला
झूठे का होगा मुंह काला

चल पड़ी योवाओं की टोली
भ्रष्टाचार मिटाने को

नया सवेरा लाएंगे
भ्रष्टों को सबक सिखाएंगे
निर्भया (सिन्हा) अब निर्भय होगी
कोई ना अबला दुर्बल होगी
क्योंकि आत्मनिर्भरता इसके साथ होगी

चल पड़ी योवाओं की टोली
भ्रष्टाचार मिटाने को

दुर्गा काली चंडी बनकर
अरुणिमा ने चुप्पी तोड़ी
लड़कर बढ़कर आगे आकर
आचरण की पोल है खोली

चल पड़ी योवाओं की टोली
भ्रष्टाचार मिटाने को

ठेकेदार बन बैठे हैं
जात पात और धर्म के नाम पर
एकजुट जो हो जाए, जब हम देश के नाम पर
आरक्षण का बोझ हटाए
समानता का दीपक जलाएं

चल पड़ी योवाओं की टोली
भ्रष्टाचार मिटाने को
सत्य का बिगुल बजाने को
झूठों का नकाब हटाने को

आने वाली है दिवाली
ईष्या, क्रोध, लोभ, वासना जैसे
राक्षस को मार गिराएगे
शिक्षा और प्रगति का दीप बनाकर
सच्चाई का लौ जगमागाएगें

चल पड़ी योवाओं की टोली
भ्रष्टाचार मिटाने को

परफेक्ट और वेलमेंटेंड युवा है हम
झुकना हमें आता नहीं
डरना हमने जाना नहीं
और हार मान ले वह बात नहीं
अबकी पलडा भारी है
भ्रष्टाचारी तेरी तो शामत आनी है
तुम पर नजर हमारी है

चल पड़ी योवाओं की टोली
भ्रष्टाचार मिटाने को
सत्य का बिगुल बजाने को
झूठों का नकाब हटाने को


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