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संदीप राज़ 'आनंद' की गज़लें


ग़ज़ल:1

 मेरे पास कितनी कहानी पड़ी है।

लबों पर टिकी है जबानी पड़ी है।

 

कई बार होगी अभी तो मोहब्बत

अभी यार पूरी जवानी पड़ी है।

 

उसे अब कहाँ कुछ बताना पड़ेगा

वो लड़की तो पहले से मानी पड़ी है।

 

कहां तक बतायें उसे हाल ए दिल

मिरे दिल पे कितनी निशानी पड़ी है।

 

वो मैसेज भेजे,कहे अब सो जाओ

मुझे रात रो के बितानी पड़ी है।

 

ग़ज़ल:2

मुझे अब याद कोई क्यूँ करेगा।

मेरा दिल शा'द कोई क्यूँ करेगा।

 

मोहब्बत ने किया बरबाद जिसको

उसे आबाद कोई क्यूँ करेगा।

 

रखा है दिल को अब तक मोम मैंने

भला फौलाद कोई क्यूँ करेगा।

 

अगर वो जान माँगे तो भी दे दूँ

उसे नाशा'द कोई क्यूँ  करेगा।

 

इसी विश्वास में मारा गया मैं

मुझे बरबाद कोई क्यूँ  करेगा।

 

ग़ज़ल:3

 मेरा कोई यहां रहता नहीं है।

मुझे अपना कोई कहता नहीं है।

 

सो सब कुछ छोड़कर अब जा रहा हूं

कोई अब दूसरा रस्ता नहीं है।

 

उसे मैं भूलने की ताक में हूं।

बहुत अब सोचना अच्छा नहीं है।

 

किसी पर दिल लुटाना चाहता था

मगर यह काम भी बस का नहीं है।

 

समझ पाए जो मेरे दर्द को भी

यहां कोई तो अब ऐसा नहीं है।

 

न आती नींद है रातों में अब तो

उपर से दिन भी अब कटता नहीं है।

 

लगे की सांस भी अब छोड़ दूं मैं

मगर घर में कोई फंदा नहीं है।

 

ग़ज़ल:4

 मुझे दिल से निकाला जा रहा है।

मिरा अब ख़त जलाया जा रहा है।

 

कहो उससे चला आये यहां भी

उसे कबसे पुकारा जा रहा है।

 

मुझे यूँ देखना फिर मुस्कुराना

मिरा अब दिल चुराया जा रहा है।

 

लरजते होंठ, ये आँखें कँटीली

मुझे जादू दिखाया जा रहा है।

 

होकर रुस्वा तेरी महफ़िल से देखो

मोहब्बत का सितारा जा रहा है।

 

कि अब 'आनन्द' को बरबाद समझो

उसे चाहत सिखाया जा रहा है।

 

ग़ज़ल:5

 किसी को क्या बताएं अब भला हम

ये गम कितना दिखाएं अब भला हम।

 

तुम्हे हम इश्क़ की भी आरसी दें!

कहो तो मर ही जाएं अब भला हम।

 

तुम्हारे चैट फोटो और नम्बर

अरे! क्या क्या छुपाएं अब भला हम।

 

सभी ने आजमाया है हमें बस

किसे अपना बनाएं अब भला हम।

 

यहां तो लोग अनजाने सभी हैं

किसे दिल से लगाएं अब भला हम।

 

मज़ा तन्हाई का अपना अलग है

उसे क्यूं ही बुलाएं अब भला हम।

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