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शनिवार, २७ सितम्बर २००८

उस तितली से बन जाओ [बाल कविता] - रचना सागर


कोमल कोमल पंखो वाली
नभ को देखो छूने वाली
रंगीनी बरसाने वाली
प्यारी तितली आई है
एक संदेशा लाई है


हिन्दु मुस्लिम सिख ईसाई
आपस मे है भाई- भाई
सब संग मिलकर रहा करो
प्यार सभी से किया करो
सदाचार अपनाओ तुम
भूलों को राह दिखाओ तुम

हो भविष्य कल का तुम
सच्चाई को अपनाओ
जैसे रंग- बिरंगे पंख
उस तितली से बन जाओ॥

14 comments:

रितु रंजन २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

तितली नें हमेशा ही बच्चों को आकर्षित किया है, इस कडी में यह रचना भी बच्चे अवश्य पसंद करेंगे। रचना जी बधाई स्वीकारें।

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

such this comment is very beautiful

पंकज तिवारी २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

कविता की कविता और संदेश का संदेश।

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

such this comment is very beautiful

अभिषेक सागर २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

बहुत अच्छी बाल कविता। बधाई..

राजीव रंजन प्रसाद २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

रचना जी,

बच्चों के लिये लिखना असाधारण काम है। आपने अच्छे और सहज शब्दों का चयन किया है किसने संदेशप्रद होने के बाद भी रोचकता बनी हुई है।

हो भविष्य कल का तुम
सच्चाई को अपनाओ
जैसे रंग- बिरंगे पंख
उस तितली से बन जाओ॥

बहुत खूब!!

***राजीव रंजन प्रसाद

शोभा २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

रचना जी,
बहुत प्यारी बाल कविता है. बचों की कल्पना आप खूब पहचानती हैं. सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई.

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

very nice

alok kataria

दीपक २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

बहुत सुंदर रचना !!आभार

गीता पंडित (शमा) २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

बच्चों के लियें सोचना भर सुन्दरता दे जाता है
उस पर ये तो उनके लियें लिखी गयी रचना है.......बहुत सुंदर....


स-स्नेह
गीता पंडित

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

तितली पर यूँ तो बहुत सारी कविताएँ लिखी गयी हैं, पर उनमें से कुछ ही सार्थक हैं। आपकी कविता में एक नया तेवर है, एक नयी सोच है। ये पंक्तियाँ बहुत ही अच्छी लगीं-

हो भविष्य कल का तुम
सच्चाई को अपनाओ
जैसे रंग- बिरंगे पंख
उस तितली से बन जाओ॥

बधाई।

नुक्‍कड़ २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

रचना के सागर में से
बाल कविता तलाश कर
तितली बनाकर बच्‍चों के
माफिक चंचल मन मोहा

अजय यादव २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

सुंदर तितली, सुंदर कविता
जिसमें सुंदर शिक्षा है
रचना की अगली रचना की
बच्चों को भी प्रतीक्षा है...

विश्व दीपक ’तन्हा’ २३ नवम्बर २००९ ६:३५ PM  

अच्छी बाल-रचना है रचना जी!

बधाई स्वीकारें।

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