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रविवार, २६ अक्तूबर २००८

सूरज चाचा [बाल साहित्य] - सुषमा गर्ग

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सूरज चाचा आते हैं
रोज सवेरा लाते हैं
किरणों को फैलाते हैं
दुनियाँ को चमकाते हैं
अंधियारा दूर भगाते हैं
धरती को जीवन देते हैं
उर्जा का स्त्रोत बहाते हैं
सबके मन को भाते हैं

संदेशा मुझे सुनाते हैं
बच्चों जब तुम बडे बनोगे
बडे बडे कुछ काम करोगे
जग में रौशन नाम करोगे
सबके प्यारे बन जाओगे
दिल में उनके बस जाओगे

13 comments:

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

liked poem.thanks

Alok Kataria

नंदन २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

बहुत अच्छी बाल कविता, बधाई।

पंकज सक्सेना २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

जग में रौशन नाम करोगे
सबके प्यारे बन जाओगे
दिल में उनके बस जाओगे

बच्चे अवश्य पसंद करेंगे।

Umesh २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

सुंदर बाल कविता है. बधाई!

रितु रंजन २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

संदेशा मुझे सुनाते हैं
बच्चों जब तुम बडे बनोगे
बडे बडे कुछ काम करोगे
जग में रौशन नाम करोगे
सबके प्यारे बन जाओगे
दिल में उनके बस जाओगे

आपका संदेश बच्चों तक पहुँच कर उन्हे लाभांवित करेगा, एक अच्छी कविता की बधाई।

अतुल्य २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

आजकल बच्चे बड़े होने से पहले ही बड़े बड़े काम करने लगे हैं. हमें उनकी मासूमियत को बचाये रखने की भी ज़रूरत है.

Udan Tashtari २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

बहुत उम्दा!!

आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

अभिषेक सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

बहुत ही अच्छी कविता.. बचपन की याद दिला दी जब हम भी एसी कविता पढते थे... बधाई

राजीव रंजन प्रसाद २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

बहुत अच्छी बाल कविता, एक सुन्दर संदेश के साथ। दीप-पर्व की शुभकामनायें।

***राजीव रंजन प्रसाद

शोभा २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

संदेशा मुझे सुनाते हैं
बच्चों जब तुम बडे बनोगे
बडे बडे कुछ काम करोगे
जग में रौशन नाम करोगे
सबके प्यारे बन जाओगे
दिल में उनके बस जाओगे
सुषमाजी आप बाल साहित्य बहुत अच्छा लिखती हैं. सुंदर कविता के लिए बधाई.

रचना सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

प्रभावी बाल कविता, बधाई।

मोहिन्दर कुमार २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

बाल सुलभ प्रभावी रचना.. एक संदेश देती हुई..
दिपावली की शुभकामनायें

praveen pandit २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

मासूम सुंदर सी बाल रचना

प्रवीण पंडित

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