ऑनलाईन चैटिंग के फायदे [व्यंग्य] - आलोक पुराणिक
5-अगर आपके आसपास के लोग पर्याप्त अज्ञानी हों, तो कंप्यूटर पर आपकी चैटिंग को भी ज्ञानवर्धक गतिविधियों का हिस्सा मान लिया जायेगा।
कविता/गज़ल: अब्दुल रहमान "मन्सूर", ओमप्रकाश शर्मा, श्यामल सुमन, कुलदीप अन्जुम, नीरज गोस्वामी, सुशील कुमार

कहानी/लघुकथा: सूरज प्रकाश, शक्ति प्रकाश

हिन्दी साहित्य का इतिहास: जायसी और उनका पद्मावत (प्रस्तुति - अजय यादव)
वीडियो: ग्लोबल वार्मिंग पर राजीव रंजन प्रसाद की कविता का प्रसारण "चैनल वन" से (प्रस्तुति - देवेश वशिष्ठ ’खबरी’)
काव्य का रचना शास्त्र – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

कार्टून – अभिषेक तिवारी
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21 comments:
व्यंग्य लेखन की आपकी शैली लाजवाब है।
सही लिखा है.
मजेदार, सही विवेचना है :)
वाह,
मज़ा आ गया।
प्रातः उठते ही कम्पूटर पर बैठने के इतने सारे फायदे ..... परन्तु आलोकजी उनका क्या जिनकी पत्नी कम्पू अज्ञानी तो है किंतु .. वह भी चैटिंग के मतलब जानकर, यदि आप ऑफिस का कामकर रहे हों तब भी यही समझती है की आप किसी से चैटिंग कर रहे होंगे. इधर बन्दा आलोकजी से किसी पोस्ट पर डिसकस कर रह होता है और वह 'अनामी' के साथ चैटिंग का उपालंभ दे रही होती है. अस्तु .... यह जो आनलाइन पिटाई जैसे बचे खुचे सॉफ्टवेर शीघ्र ही मार्केट में आ जायेंतो शायद कुछ बात और बने .. बिगडे ..
वाह .....
आलोक जी की कटाक्ष करने की अपनी ही शैली है। छहों विन्दु याद रखने योग्य हैं।
इतने फायदे पता चले, अब तो यह शगल पालना ही पडेगा।
liked it.
Alok Kataria
नया नज़रिया पुरानी बात और शानदार प्रस्तुतीकरण !
नमस्ते जी ,
एक दम सटीक लिखा है। और ऐसा होता भी है।(गाहे बगाहे मै भी कर लेता हूं)
इतने उम्दा लेख के लिये कोटिश: धन्यवाद और और भविश्य मै भी आप ऐसा ही लिखते रहेंगे ऐसी शुभेक्षा के साथ आपका शुभेक्षुक
विकास श्रीवास्तव
A/28, शास्त्री कोलोनी
भिण्ड, (म.प्र.)
+919893308324
बहुत अच्छा फोटो व् लेख
कभी इस दूम हिलाने वाले की भी पोस्ट पर आए
regards
आलोक जी के व्यंग्य आलेखों की बात ही अलग होती है। आपकी पंच लाईनें व्यंग्य को बहुत उँचाई पर ले जाता है। साधारण प्रसंगों का भी आप असाधारण प्रस्तुतिकरण करते हैं..
***राजीव रंजन प्रसाद
बधाई आलोकजी
ऑन लाइन पिटाई न सही,
ब्लॉग पर जो जूतम-पैजार होती रहती है..
उस पर आपकी क्या राय है...???
मजेदार व्यंग्य लेख है।
:) एकदम सही लिखे हो जी, एक फ़ायदा हम भी बता दें उस छात्र को( आप को नहीं जी) आप दफ़तर से घर आते ही अपने कमरे में बंद हो जाइए अपने कंप्युटर के साथ और पड़ौसी सोचते हैं कि बहुत अंतर्मुखी व्यक्तित्व है इनका किसी से बात ही नहीं करते, उन्हें क्या पता कि सारी दुनिया जहां से बतिया रहे हैं जनाब
वाह वाह पैनी बात
बधाईयाँ
बहुत अच्छा है. इसमें असीम संभावनाएं हैं सामने वाले या वाली को बुद्धू बनाये रखने की लेकिन ख्यालरहे आप भी इसी तरह की ऑनलाइन बेवकूफियों के शिकार बनाये जा सकते हैं
ऑनलाइन चैटिंग के फायदों से अवगत कराने का शुक्रिया। अब तो चैटिंग को मजा वास्तव में बढ जाएगा।
"कवि बेहिचक, बेखटके, हूट होने के खतरे की चिंता किये बगैर ही कविताएं ठेल सकता है।"
इसके मज़े तो मैने कई मर्तबा लिये हैं
और
"आनलाइन वाह वाह के लिए सच्ची में कविता में टाइम खल्लास करना जरुरी नहीं है।" इसका भी शिकार हुआ हूँ।
एकदम अपनी-सी बात लगी। बधाई स्वीकारें।
सशक्त व्यंग्य...आपकी रचना हमें चैटिंग के लिये उकसा रही है.. :)
बहुत रोचक। नये विषय नये व्यंग्य,वाह खूब
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