साहित्यकारों को अंतर्जाल का महत्व समझाया जाए [साक्षात्कार] - जाकिर अली "रजनीश"
दौडती भागती दुनिया के तो बहुत से निर्माता हैं। हम आगे बढते चले हैं, पीछे छूटते जा रहे हैं नगर, गाँव, समाज, परिवार....। ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ वह नाम है, जो इन छूटी हुई कडियों को जोडने के लिये संघर्षरत है। रजनीश नें बीज को खाद-पानी देना और उसके कोमलपने को दिशा देना आवश्यक समझा कि फिर जो वृक्ष तैयार हों वह आसमान अपनी हथेली पर थाम सकें। बच्चे ही गढे जायें कि कल की तस्वीर बदल जायेगी यही उद्देश लिये कलम का यह सिपाही आज देश में बाल साहित्य का सशक्त हस्ताक्षर है।एक जनवरी उन्नीस सौ पिचहत्तर को जन्मे श्री रजनीश नें हिन्दी में स्नात्कोत्तर तक की शिक्षा प्राप्त परने के अलावा बी0सी0जे0 तथा सृजनात्मक लेखन में डिप्लोमा भी किया है। रजनीश जी की सृजन यात्रा 1991 से अनवरत जारी है तथा वे कहानी, उपन्यास, नाटक एवं कविता विधा में समान दक्ष हैं। इनकी अब तक राष्ट्रीय स्तर की अनेकों पत्र-पत्रिकाओं में हजार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। अनेकों पुस्तकों के लेखक श्री रजनीश नें अंग्रेजी, मराठी एवं बंग्ला भाषा में अनेक रचनाओं का अनुवाद भी किया है। रजनीश जी की प्रतिभा को भारतेन्दु पुरस्कार, विज्ञान कथा भूषण सम्मान, श्रीमती रतन शर्मा स्मृति बालसाहित्य पुरस्कार, सहस्राब्दि हिन्दी सेवी सम्मान, डा0 सी0वी0 रमन तकनीकी लेखन पुरस्कार, सर्जना पुरस्कार आदि महत्वपूर्ण पुरस्कारों से नवाज़ा गया है। ‘डिक्शनरी ऑफ इंटेलेक्चुअल’, कैम्ब्रिज, इंग्लैण्ड सहित अनेक संदर्भ ग्रन्थ में रजनीश को ससम्मान उदधृत किया गया है।
रजनीश: बचपन में मैं पराग, नन्दन, बालभारती आदि पत्रिकाएँ पढता था। अक्सर उनमें ऐसी रचनाएँ प्रकाशित होती थीं, जो मुझे पसंद नहीं आती थीं। मुझे बार-बार लगता था कि इससे अच्छा तो मैं लिख सकता हूँ। उसी समय "पराग" पत्रिका में एक प्रतियोगिता हुई, जिसमें "थोडा बोलो मीठा बोलो" विषय पर कविता लिखनी थी। मैंने भी उस विषय पर कविता लिखी और भेज दी। हालाँकि उक्त प्रतियोगिता में मेरी कविता को पुरस्कार तो नहीं मिला, पर इसी बहाने मेरे लेखन की शुरूआत हो गयी।
साहित्य शिल्पी: आप देश में बाल साहित्य सर्जकों की कमी के क्या कारण मानते हैं?
रजनीश: देश में बाल साहित्य सर्जकों की कोई कमी नहीं है। मेरी जानकारी के अनुसार ही हिन्दी में सौ से अधिक लोग बाल साहित्य की विभिन्न विधाओं में स्तरीय लेखन कर रहे हैं। इन रचनाकारों की रचनाएँ समय-समय पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। किन्तु बाल साहित्य पर समीक्षात्मक/आलोचनात्मक कार्य न हो पाने के कारण उनकी रचनाएं लोगों के बीच चर्चा का विषय नहीं बन पाती हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि देश में बाल साहित्य सर्जकों की कमी है।
साहित्य शिल्पी: आप बाल मनोविज्ञान में गहरी पकड रखते हैं, एक बाल-साहित्य सर्जक को अपने लेखन में किन बातों का ध्यान रखना चाहिये? वह बच्चों के मन तक कैसे पहुँचे?
रजनीश: बाल साहित्य लेखन के लिए जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण चीज है वह है बच्चों की रूचि और उनकी सोच। जो व्यक्ति बच्चों के साथ खेल सकता है, बच्चों के साथ बच्चा बन सकता है, वह व्यक्ति बच्चों के मन की बातों को, बच्चों की रूचियों को आसानी से समझ सकता है और जाहिर सी बात है कि ऐसा ही व्यक्ति बच्चों के लिए अच्छा साहित्य रच भी सकता है।
साहित्य शिल्पी: बच्चों और स्वस्थ बाल-साहित्य के बीच की दूरी कैसे दूर की जा सकती है?
रजनीश: मेरी समझ से बच्चों और बाल साहित्य के बीच किसी प्रकार की दूरी नहीं है। आप बच्चों को अच्छी किताबें एक बार दे कर तो देखिए, फिर आपको पता चल जाएगा कि बच्चों के बीच कोई दूरी है भी या नहीं। बच्चों और उनके साहित्य के बीच जो दूरी दिखाई भी पडती है, वह उनके अभिभावकों की बनाई हुई है। वे या तो बच्चों को बाल साहित्य उपलब्ध कराना एक अनावश्यक खर्च मानते हैं अथवा उन्हें लगता है कि ऐसा करने से बच्चे के उपर अनावश्यक बोझ बढेगा। जबकि यह दोनों ही बातें गलत हैं।
साहित्य शिल्पी: अंतर्जाल पर बाल साहित्य को किस तरह समृद्ध किया जा सकता है?
रजनीश: मेरी समझ से इसके दो रास्ते हैं पहला बाल साहित्यकारों को अंतर्जाल का महत्व समझाया जाए, जिससे वे इसके महत्व को समझें और अपनी रचनाएँ यहाँ उपलब्ध कराएँ। और दूसरा रास्ता यह है कि ऐसी संस्थाएँ/पत्रिकाएँ आगे आएं जो अंतर्जाल से जुडी हुई हैं। वे बाल सहित्यकारों के पास जाएँ और उनकी रचनाओं को अंतर्जाल पर प्रसारित करें।
साहित्य शिल्पी: आप बाल-साहित्य के अलावा साहित्य की किन अन्य विधाओं में लिख रहे हैं?
रजनीश: बाल साहित्य के अलावा मेरी रूचि कहानी, विज्ञान कथा और उपन्यास लेखन में भी है। पर चूंकि बाल साहित्य में विशेष रूचि है, इसलिए इस ओर कम ध्यान दे पाता हूँ। वैसा मेरा एक विज्ञान कथा संग्रह "विज्ञान कथाएँ" तथा एक वैज्ञानिक उपन्यास "गिनी पिग" प्रकाशित हो चुका है। इसके अलावा समसामयिक कहानियों का एक संग्रह प्रकाशन की प्रक्रिया में है।
साहित्य शिल्पी: साहित्य शिल्पी के पाठकों के लिये संदेश..
रजनीश: सर्वप्रथम साहित्य शिल्पी के लिए मैं इसके प्रबंधकों को बधाई देता हूँ और पाठकों से यह निवेदन करता हूँ कि वे साहित्य शिल्पी के साथ ही साथ अंतर्जाल पर प्रकाशित हो रही अन्य पत्रिकाओं के प्रति भी अपना स्नेह बनाए रखें, जिससे अंतर्जाल पर साहित्यिक रचनाओं के प्रसारण को बल मिले।
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रजनीश जी,
अन्तर्जाल के महत्व पर आपके प्रभावी विचारों के लिये आभार. इसमें किसी को शक नहीं होना चाहिये कि अन्तर्जाल ही भविष्य की लाईब्रेरी होगी जो एक क्लिक से किसी विष्य के खजाने खोल सकती है..इसी को ध्यान में रखते हुये हमें सक्रिय रहना है
Arvind Mishra says
अंतर्जालके महत्त्व पर रजनीश को सुन जान कर अच्छा लगा !
अभिषेक सागर says
रजनीश जी,
साहित्य शिल्पी पर आपको देख बहुत ही अच्छा लगा।
अन्तर्जाल के महत्व पर आपके प्रभावी विचार हमारे लिये बहुत उपयोगी है।
शोभा says
रजनीश जी
आपका लेख बहुत प्रेरणा पूर्ण है। पढ़कर बहुत अच्छा लगा। साहित्य शिल्पी पर आपके आगमन से हम बहुत उत्साहित हैं।
yogesh samdarshi says
रजनीश जी से वास्तव में मुलाकात ही हो गई आज.... बहुत सुंदर भाव हैं उनके.....
राजीव रंजन प्रसाद says
रजनीश जी जैसे साहित्यकार दरअसल समाज निर्माण का वह महति कार्य कर रहे हैं जो आने वाली पीढी को बुनियाद दे रह है। आपको कोटिश: नमन..
पंकज सक्सेना says
साक्षात्कार अच्छा स्तंभ है, जाकिर साहब से मिल कर अच्छा लगा
Udan Tashtari says
बहुत अच्छा लगा रजनीश जी को पढ़कर और उनके द्वारा अन्तरजाल के महत्व की विवेचना.
swati prakash garg says
रजनीश जी,
आपके विचार जानकर बहुत अच्छा लगा. साहित्य शिल्पी पर आपकी बाल रचनाओं की प्रतीक्षा रहेगी.
श्रद्धा जैन says
Rajneesh ji aapke bare main jana
bhaut achha laga
आलोक सिंह "साहिल" says
mujhe khushi hai ki jis rajnish ji ko log aaj jan paaye hain unhein main varshon pahle se janta hun,lekin yahan aakar wo baatein bhi janne ko lili jo pahle nahi jan paya tha.bahut achhe.
ALOK SINGH "SAHIL"
अजय यादव says
रजनीश जी के विचार जानना अच्छा लगा!
आलोक शंकर says
Rajnish ji, aapko sunkar kafi achcha laga
योगेन्द्र मौदगिल says
आपके व आपके लेखन के बारे में काफी जानकारी पा कर प्रसन्नता हुई...
ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ says
राजीव जी, शाहित्य शिल्पी पर मेरा साक्षात्कार देने का शुक्रिया। आज पहली बार मैंने इसे पढा। यह देखकर हैरान रह गया कि 14 लोगों ने इस पर कमेंट दिये हैं। आशा है आगे अन्य रचनाकारों के विचार भी पढने को मिलते रहेंगे।
आपका यह प्रयास बहुत प्यारा है। इसकी जितनी सराहना की जाए, कम है।
ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ says
मैं आपको पत्रिका के सम्बंध में 2 सुझाव देना चाहूंगा। पहला प्रत्येक पोस्ट के साथ यह आप्शन उस मैटर को किसी को मेल करने का आप्शन यदि लगा दिया जाए, तो अच्छा रहेगा। इसके अतिरिक्त होम पेज पर साक्षात्कार का भी एक टैग बढाया जा सकता है।
रचना सागर says
रजनीश जी बहुत बहुत स्वागत
प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर says
रजनीश जी,
साहित्य शिल्पी पर आपको देख बहुत ही अच्छा लगा।
अन्तर्जाल के महत्व पर आपके प्रभावी विचार हमारे लिये बहुत उपयोगी है।
ravindra kumar says
rajnishji ,mai bhopal aa gaya hun.vigyan parishad allahabad mai mile the.aapka sakkshatkar achchha laga.100short stories ki sangrah jaldi aa raha hai.aap bhopal aayen swagat hai .bahut tarakki karen dhero subhkamnaye.
ravindra khare akela,united bank of india,278,zone-2,m.p.nagar,bhopal.09893683285