........साहित्य शिल्पी एक पूर्ण वेबसाईट में परिवर्तित हो चूका है। अब हमारी रचनाये यहाँ पढ़े... - www.sahityashilpi.in तथा कृपया हमें अपनी प्रतिक्रिया एवं सुझावों से अवश्य अवगत करायें जिससे हम आवश्यक सुधार कर सकें.....

गुरुवार, १० दिसम्बर २००९

ग्लोबल वार्मिंग पर राजीव रंजन प्रसाद की कविता का प्रसारण "चैनल वन" से

धरती के गर्म होने को ले कर जब बाते आरंभ हुई तो उसे कुछ वर्षों पहले "कुछ लोगों का दिमागी फितूर" करार किया गया; लेकिन देखते ही देखते इस सुरसा का मुख खुला और भयावहता सामनें आ गयी। धरती के गर्म होने का असर इस दुनिया को विनाश की ओर ले जा रहा है और हमे अब यह अहसास हो जाना चाहिये कि हम "टाईमबम" पर बैठे हुए हैं। झगडा विकासशील देश और विकसित देश के बीच कार्बन उत्सर्जन को ले कर भी है लेकिन इस सत्य से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि धरती हमें बहुत अधिक विमर्श करने का अवसर देने की स्थ्ति में नहीं है। हमारे ध्रुव पिघल रहे हैं; हमारे ग्लेशियर खिसक रहे हैं, हमारे मानसून को नजर लग गयी है, हमारी सर्दियाँ गायब हो गयी है......क्या हम अब भी केवल हाँथ पर हाँथ धरे रहेंगे?

यह कई स्तरों की लडाई होनी चाहिये। वैज्ञानिक समाधान तलाशें; तो सामाजिक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर जुटे साथ ही साहित्यकार जन-चेतना फैलाने की ओर अग्रसर हों। इस कडी में साहित्य शिल्पी "राजीव रंजन प्रसाद" से चैनल-1 के देवेश वशिष्ठ "खबरी" नें ग्लोबल वार्मिग के मुद्दे पर बातचीत की। राजीव रंजन प्रसाद साहित्यकार होने के साथ साथ पर्यावरणविद भी हैं। प्रस्तुत है ग्लोबल वार्मिग पर उनकी कविता और बातचीत -



http://www.youtube.com/watch?v=Pdq2GHa6H5o

11 comments:

nitesh १० दिसम्बर २००९ १:३६ PM  

देवेश का प्रस्तुतिकरण अच्छा है। राजीव जी आपकी कविता पहली बार आपके मुख से सुनी। बधाई।

बेनामी १० दिसम्बर २००९ १:४२ PM  

Nice Presentation.

Alok Kataria

श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’ १० दिसम्बर २००९ १:४६ PM  

सार्थक बात और कवित के प्रेरक स्वर ..... एक और आशा भरी बात .... शुभकामना

aniruddh १० दिसम्बर २००९ २:३३ PM  

धरती की व्यथा सुनवाने का आभार। ग्लोबल वार्मिंग पर चिंता सभी को करने कक़ समय आ गया है।

vedvyathit १० दिसम्बर २००९ ३:४२ PM  

aap ki kvita suni achha lga
kya aap prithvi ki gati ko rok skte ho shyd nhi kuchh bharty shashtron se anbhigy vaigyanikon ke ye shbd sbhi aankh moond kr doraye ja rhe hain lb ki yh to hona hi hai aap ko prithvi ki tisri gti ka to maloom hoga hi do gtiyin ke atirikt yh jo tisri gti hai us ke karn hi to yh sb ho rha hai aur hoga koi ise rok nhi skta hai thoda bhut km to kr skte hai videshiyon ki asli chal hme bad men smjh aati hai ki is ke pichhe un ka kya uddeshy hai ise bhi smjhna hoga amerika ne aaj tk jo kiya hai sb apne swarth ke liye hi kiya hai is se phle bhi jo aapdayen aai hai ve kya kisi se rooki hain khoob viksit vigya sunami ko rook paa kya chlo sb thik ho jayega
dr. ved vyathit

अभिषेक सागर १० दिसम्बर २००९ ४:०३ PM  

बधाई देवेश जी और राजीव जी

अनिल कुमार १० दिसम्बर २००९ ४:४३ PM  

राजीव जी की कविता और शेर दोनों ही अच्छे थे सुनने का आनंद आ गया

सुषमा गर्ग १० दिसम्बर २००९ ५:२० PM  

ग्लोबल वार्मिंग विषय पर साहित्य शिल्पी पर भी एक चर्चा कराईये।

अनन्या १० दिसम्बर २००९ ५:४८ PM  

राजीव जी कविता सुनाने का अंदाज पसंद आया।

PRAN SHARMA १० दिसम्बर २००९ ११:०५ PM  

ACHCHHEE RACHNAAON KE LIYE DEVESH
AUR RAJIV JEE KO BADHAAEE AUR SHUBH
KAMNA.

मोहिन्दर कुमार ११ दिसम्बर २००९ १०:१० AM  

एक समसमायिक विषय पर देवेश द्वारा महत्वपूर्ण चर्चा एंव राजीव जी की सुन्दर कविता का बढिया समागम हुआ है

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': परिकरान्कुर में रखे, साभिप्राय कवि नाम.-काव्य का रचना शास्त्र: ४७,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1,
लघु कथा:-
डायरी:-
पेंटिंग:- [ई-प्रदर्शनी]:-
यात्रा वृतांत:-

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

पुस्तक-अंश:-
व्यंग्य:-
श्रद्धांजलि:-
साक्षात्कार:-
विमर्श:-
हिन्दी साहित्य का इतिहास:-
संस्मरण:-
वीडियो:-
बाल साहित्य:-
पुस्तक चर्चा:-
अनुवाद:-

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP