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सोमवार, ७ दिसम्बर २००९

ग़ज़ल: डूबते देखे गरीबों के ही घर पानी में - अब्दुल रहमान "मन्सूर"

Gazal by Abdul Rehman Mansoor
ऊँचे ऐवान हैं बेख़ौफ़-ओ-ख़तर पानी में
डूबते देखे गरीबों के ही घर पानी में

रचनाकार परिचय:-
श्री अब्दुल रहमान मन्सूर दिल्ली व आसपास में एक जाने-माने गज़लकार होने के साथ साथ गज़ल के रचना-शास्त्र (उरूज़) के उस्ताद के रूप में भी जाने जाते हैं। वर्तमान में फरीदाबाद में निवास कर रहे रहमान साहब मूलत: मुरादाबाद से सम्बद्ध हैं।

आप पिछले बीस से भी अधिक वर्षों से संज़ीदा और मज़ाहिया (हास्य) दोनों तरह की गज़लों और गीतों की रचना करते आ रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर के मुशायरों में शिरकत कर आपने सुनने वालों को अपनी खूबसूरत गज़लों और गीतों के सम्मोहन में बाँधा है।

पेट भरने के लिये मेरे वतन में अब भी
काम मज़दूर करें ता-ब-कमर पानी में

दिल तेरी झील सी आँखों में उतरना चाहे
क्या इसे आया ख़ुदा जाने नज़र पानी में

दास्ताँ मेरी भी ऐ दोस्त उसके जैसी है
सूखता देखा है तूने जो शज़र पानी में

हालात-ए-शहर जो देखे तो भरम टूट गया
हम समझते थे कि हैं सिर्फ मगर पानी में

तेरे बीमार-ए-मुहब्बत की दवा बन जाये
फूँक ही मार के रख दे तू अगर पानी में

आदमी के लिये कुछ भी तो नहीं नामुमकिन
ज़िद पे आये तो बना डाले डगर पानी में

9 comments:

अनन्या ७ दिसम्बर २००९ २:०२ PM  

उस्ताद शायर की ग़ज़ल पढ कर ही पता चल जाती है।

अनिल कुमार ७ दिसम्बर २००९ ४:५५ PM  

आदमी के लिये कुछ भी तो नहीं नामुमकिन
ज़िद पे आये तो बना डाले डगर पानी में

बहुत सुन्दर

रितु रंजन ७ दिसम्बर २००९ ४:५८ PM  

हर शेर प्रसंशनीय

बेनामी ७ दिसम्बर २००९ ५:०० PM  

Nice Gazal. Thanks

Alok Kataria

vishwash ७ दिसम्बर २००९ ५:३२ PM  

कथ्य की बात तो है ही यह शेर रोमांटिक भी अच्छा बना है -
दिल तेरी झील सी आँखों में उतरना चाहे
क्या इसे आया ख़ुदा जाने नज़र पानी में

Devi Nangrani ८ दिसम्बर २००९ १२:१५ AM  

हालात-ए-शहर जो देखे तो भरम टूट गया
हम समझते थे कि हैं सिर्फ मगर पानी में
Bahut hi naayab sher. Zindagi ke aaine mein aks dikhayi de raha hai.
Daad ke saath Rahmaan Mansoor Ji ko aur sahitya Shilpi ko ise pesh karne ke liye.
Devi nangrani


Devi Nangrani

सुलभ सतरंगी ८ दिसम्बर २००९ १०:२३ AM  

वाह! कथ्य और भाव दोनों गहरे पानी में.

बेनामी ८ दिसम्बर २००९ ५:५७ PM  

दास्ताँ मेरी भी ऐ दोस्त उसके जैसी है
सूखता देखा है तूने जो शज़र पानी में

Thanx
Shakti

rachana ८ दिसम्बर २००९ ९:५५ PM  

हालात-ए-शहर जो देखे तो भरम टूट गया
हम समझते थे कि हैं सिर्फ मगर पानी में
kya baat kahi puri gazal hi bahut sunder hai
saader
rachana

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