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बुधवार, ३० दिसम्बर २००९

आया नूतन साल मियां [गीत] - देवमणि पाण्डेय


आया नूतन साल मियां


साहित्य शिल्पीरचनाकार परिचय:-

4 जून 1958 को सुलतानपुर (उ.प्र.) में जन्मे देवमणि पांडेय हिन्दी और संस्कृत में प्रथम श्रेणी एम.ए. हैं।

अखिल भारतीय स्तर पर लोकप्रिय कवि और मंच संचालक के रूप में सक्रिय हैं। अब तक आपके दो काव्यसंग्रह प्रकाशित हो चुके हैं- "दिल की बातें" और "खुशबू की लकीरें"।

मुम्बई में एक केंद्रीय सरकारी कार्यालय में कार्यरत पांडेय जी ने फ़िल्म 'पिंजर', 'हासिल' और 'कहाँ हो तुम' के अलावा कुछ सीरियलों में भी गीत लिखे हैं। फ़िल्म 'पिंजर' के गीत "चरखा चलाती माँ" को वर्ष 2003 के लिए 'बेस्ट लिरिक आफ दि इयर' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। आपके द्वारा संपादित सांस्कृतिक निर्देशिका 'संस्कृति संगम' ने मुम्बई के रचनाकारों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई है।

नए साल में बदल गई है सबकी देखो चाल मियां
तुमसे कुछ भी छिपा नहीं है क्या बतलाएं हाल मिया

देखके टीवी पर विज्ञापन
रुठ गई बिटिया बबली
अपना चेहरा चमकाने को
मांगे फेयर एन लवली
नया दौर मां-बाप की ख़ातिर है जी का जंजाल मियां
तुमसे कुछ भी छिपा नहीं है क्या बतलाएं हाल मिया

फर्स्ट क्लास ग्रेजुएट है राजू
मगर नौकरी नहीं मिली
मजबूरी में पेट की ख़ातिर
बेच रहा है मूंगफली
कमोबेश सब पढ़े लिखों का इक जैसा अहवाल मियां
तुमसे कुछ भी छिपा नहीं है क्या बतलाएं हाल मिया

जिसमें झांको उसी आंख में
तैर रहा दुख का बादल
फिर भी यूँ हँसते हैं नेता
जैसे हँसते हैं पागल
ऊपर से ये ख़ुश लगते हैं भीतर हैं बेहाल मियां
तुमसे कुछ भी छिपा नहीं है क्या बतलाएं हाल मिया


यूँ गुज़रा है साल कि डोरी
उम्मीदों की टूट गई
स्टेशन पर पहुंचके जैसे
अपनी गाड़ी छूट गई
फिर भी हंसकर करेंगे स्वागत आया नूतन साल मियां
तुमसे कुछ भी छिपा नहीं है क्या बतलाएं हाल मिया

7 comments:

दृष्टिकोण ३० दिसम्बर २००९ १:५९ PM  

वाह देवमणि जी इस सुन्दर गीत से नव वर्ष के आगमन का माहौल तैयार हो गया।

विनोद कुमार पांडेय ३० दिसम्बर २००९ २:२० PM  

फर्स्ट क्लास ग्रेजुएट है राजू
मगर नौकरी नहीं मिली
मजबूरी में पेट की ख़ातिर
बेच रहा है मूंगफली

Kuch aisa hi haal hai desh ke bahut se yvaon ka jisake kandhe par desh ka bhavish hai..par kya kare naye saal ka swagat to karana hi hai.dukh me muhn bhi latkaana achchai baat nahi hans ke jina chahiye..bahut badhiya hasyvyang ke geet achcha laga..dhanywaad devendra ji!!! aapko bhi naye varsh ki shubhakaamna!!

बेनामी ३० दिसम्बर २००९ ३:३१ PM  

Happy New year-2020

Alok Kataria

aniruddh ३० दिसम्बर २००९ ४:२३ PM  

नये साल की शुभकामनायें

sumita ३० दिसम्बर २००९ ५:३३ PM  

फिर भी हंसकर करेंगे स्वागत आया नूतन साल मियां....बहुत सुंदर रचना देवमणि जी बधाई!इतना बेहाल है इंसान फ़िर भी नए साल की उम्मीद हर साल लगाये रहता है। साहित्य शिल्पी जगत और आप सभी को नये साल की ढेरों बधाईयां!

Udan Tashtari ३० दिसम्बर २००९ ९:०५ PM  

हा हा!! बेहतरीन गीत!!


मुझसे किसी ने पूछा
तुम सबको टिप्पणियाँ देते रहते हो,
तुम्हें क्या मिलता है..
मैंने हंस कर कहा:
देना लेना तो व्यापार है..
जो देकर कुछ न मांगे
वो ही तो प्यार हैं.


नव वर्ष की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ३० दिसम्बर २००९ ९:२४ PM  

वाह...वाह... मजा आ गया.

नए वर्ष का
हर नूतन दिन
अमल-धवल यश
कीर्ति विमल दे..

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

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