महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (वर्धा) द्वारा 29-31 जनवरी 2010 को आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी – कथा समय 2010 – के अवसर पर एक अनौपचारिक कार्यक्रम में कथा यू.के. के 15 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर कथा यूके की ओर से अंतरराष्ट्रीय इन्दु शर्मा कथा सम्मान पाने वाले लेखकों के साथ एक अंतरंग संवाद संपन्न हुआ। उन्हें कथा यू.के. की ओर से एक प्रतीक चिन्ह एवं उपहार भेंट किया गया। ज्ञात रहे कि कथा यूके ने पिछले 15 वर्षों में हिन्दी के जिन पन्द्रह लेखकों को अंतरराष्ट्रीय इन्दु शर्मा कथा सम्मान प्रदान किया है वे इस समय हिन्दी साहित्य की मुख्य धारा के महत्वपूर्ण लेखक हैं।
इस समय कथा साहित्य को लेकर आयोजित होने वाली कोई भी संगोष्ठी या कार्यक्रम इन लेखकों की भागीदारी के बिना पूर्ण नहीं हो सकता। इन लेखकों में असग़र वजाहत, चित्रा मुद्गल, नासिरा शर्मा, संजीव, विभूति नारायण राय, ज्ञान चतुर्वेदी, भगवान दास मोरवाल, एस. आर. हरनोट, गीतांजलिश्री, अखिलेश, देवेन्द्र, धीरेन्द्र अस्थाना, प्रमोद कुमार तिवारी, मनोज रूपड़ा एवं महुआ माजी शामिल हैं।

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कथा समय 2010 (हिन्दी कथा साहित्य के दो दशक) में उपरोक्त कथाकारों में से असग़र वजाहत, संजीव, विभूति नारायण राय, एस. आर हरनोट, भगवान दास मोरवाल और महुआ माजी कार्यक्रम में शामिल हुए। साथ ही कथा यूके के महासचिव तेजेन्द्र शर्मा एवं भारतीय प्रतिनिधि सूरज प्रकाश और अजित राय भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

इस अवसर पर आत्मीय संवाद में तेजेन्द्र शर्मा ने कहा कि पिछले दो दशकों में जो भी श्रेष्ठ कथा साहित्य लिखा गया, उसे कथा यू.के. ने हमेशा रेखांकित किया। यही वजह है कि पिछले 15 वर्षों में कथा यूके ने हर वर्ष की एक श्रेष्ठ कृति का चुनाव कर उसके लेखक को सम्मानित किया है। यह ख़ुशी की बात है कि कथा यूके द्वारा चयनित कृतियों को व्यापक हिन्दी समाज का समर्थन हासिल होता रहा है। और अभी तक इसको लेकर कोई अनावश्यक विवाद खड़ा नहीं हुआ। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (वर्धा) के कुलपति एवं वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से यहां साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियों को नया आयाम मिला है।

कथा समय 2010 का उद्धाटन 29 जनवरी की शाम सुप्रसिद्ध कथाकार से.रा. यात्री ने किया। इस सत्र की अध्यक्षता विभूति नारायण राय ने की जबकि बीज वक्तवय असग़र वजाहत ने दिया। कार्यक्रम का संचालन राकेश श्रीवास्तव ने किया और साहित्य विद्या पीठ के डीन सूरज पालीवाल ने स्वागत भाषण में इस संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर विभूति नारायण राय ने तेजेन्द्र शर्मा के कहानी संकलन क़ब्र का मुनाफ़ा (सामयिक प्रकाशन, नई दिल्ली) का लोकार्पण किया।
विश्वविद्यालय परिसर में महात्मा गांधी हिल के प्राकृतिक परिवेश में वरिष्ठ कथाकार और हंस के सहायक संपादक संजीव की अध्यक्षता में एक कहानी पाठ का आयोजन हुआ। इसमें अमरीक सिंह दीप (प्रलय), एस. आर. हरनोट (नदी खो गई), महुआ माजी (चंद्र बिन्दु) और तेजेन्द्र शर्मा (क़ब्र का मुनाफ़ा) ने कहानी पाठ किया।

संगोष्ठी के दूसरे दिन (30 जनवरी) वरिष्ठ साहित्यकार गंगा प्रसाद विमल की अध्यक्षता में दो दशक की हिन्दी कहानियों पर खुल कर चर्चा हुई जिसमें संजीव, महुआ माजी, राजेन्द्र राजन, विरेन्द्र मोहन, वंदना राग, सनत कुमार, सुशीला टाक भवरे आदि ने भाग लिया। तेजेन्द्र शर्मा ने ‘भारत के बाहर हिन्दी कथा साहित्य’ विषय पर अपना लिखित आलेख पढ़ा। उन्होंने दुनियां भर में लिखी जा रही हिन्दी की महत्वपूर्ण कहानियों पर विस्तार से चर्चा की।
30 जनवरी महात्मा गान्धी का शहादत दिवस होता है। समारोह की शुरूआत में दो मिनट का मौन रख कर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसी शाम कथा समय 2010 में सुप्रसिद्ध लेखक असग़ वजाहत लिखित नाटक जिस लाहौर नइ वेख्या, ओ जमया हि नइ का मंचन राजेन्द्र नाथ के निर्देशन में श्रीराम सेंटर रंगमण्डल दिल्ली के कलाकारों ने किया। नाटक के मंचन से पहले विश्वविद्यालय के कुलपुति विभूति नारायण राय ने सांस्कृतिक पत्रकार अजित राय द्वारा संपादित पुस्तक ‘जिस लाहोर..... नाटक के दो दशक’ का लोकार्पण किया।

31 जनवरी को पिछले दो दशकों की कथा आलोचना पर चर्चा हुई। कथा समय 2010 में उपरोक्त लेखकों के अतिरिक्त अब्दुल बिस्मिल्लाह, विरेन्द्र यादव, सूरज प्रकाश, भगवान दास मोरवाल, वसन्त त्रिपाठी, मीनाक्षी जोशी, मृदुला शुक्ल सहित विश्वविद्यालय के अध्यापकों, और शोध छात्रों ने शामिल हुए।

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