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बुधवार, ३ फरवरी २०१०

इतनी ऊँचाई न देना ईश्वर [कविता] - प्रकाश पंकज

इतनी ऊँचाई न देना ईश्वर कि धरती पराई लगने लगे,
इनती खुशियाँ भी न देना, दुःख पर किसी के हंसी आने लगे ।

नहीं चाहिए ऐसी शक्ति जिसका निर्बल पर प्रयोग करूँ,
नहीं चाहिए ऐसा भाव किसी को देख जल-जल मरूँ ।
ऐसा ज्ञान मुझे न देना अभिमान जिसका होने लगे,
ऐसी चतुराई भी न देना लोगों को जो छलने लगे ।
इतनी ऊँचाई न देना ईश्वर कि धरती पराई लगने लगे ।

इतनी भाषाएँ मुझे न सिखाओ मातृभाषा भूल जाऊं,
ऐसा नाम कभी न देना कि पंकज कौन है भूल जाऊं ।
इतनी प्रसिद्धि न देना मुझको लोग पराये लगने लगे,
ऐसी माया कभी न देना अंतरचक्षु भ्रमित होने लगे ।
इतनी ऊँचाई न देना ईश्वर कि धरती पराई लगने लगे ।

ऐसा भग्वन कभी न हो मेरा कोई प्रतिद्वंदी हो,
न मैं कभी प्रतिद्वंदी बनूँ, न हार हो न जीत हो।
ऐसा भूल से भी न हो, परिणाम की इच्छा होने लगे,
कर्म सिर्फ करता रहूँ पर कर्ता का भाव न आने लगे ।
इतनी ऊँचाई न देना ईश्वर कि धरती पराई लगने लगे ।

ज्ञानी रावण को नमन, शक्तिशाली रावण को नमन,
तपस्वी रावण को स्विकरूं, प्रतिभाशाली रावण को स्विकरूं ।
पर ज्ञान-शक्ति की मूरत पर, अभिमान का लेपन न हो,
स्वांग का भगवा न हो, द्वेष की आँधी न हो, भ्रम का छाया न हो,
रावण स्वयम् का शत्रु बना, जब अभिमान जागने लगे ।
इतनी ऊँचाई न देना ईश्वर कि धरती पराई लगने लगे ।

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रचनाकार परिचय:

नाम : प्रकाश पंकज (पंकज)

जन्म : मुजफ्फरपुर, बिहार.

उम्र : २४

शिक्षा : बिरला प्रोद्योगिकी संस्थान , मेसरा, रांची से मास्टर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लिकेशन्स।

वर्त्तमान में कोलकाता में एक बहूराष्ट्रीय कम्पनी में सॉफ्टवेर इंजिनियर के रूप में कार्यरत । अनेकों ब्लोग्स, ईपत्रिकाओं आदि में नीयमित लेखन।

4 comments:

रंजना ३ फरवरी २०१० ३:३८ PM  

Pavitra sundar bhaav yukt kalyaankari prarthna...

सुषमा गर्ग ३ फरवरी २०१० ५:१९ PM  

अच्छी भावना से लिखी हुई कविता

विनोद कुमार पांडेय ३ फरवरी २०१० ११:२७ PM  

इतनी भाषाएँ मुझे न सिखाओ मातृभाषा भूल जाऊं,
ऐसा नाम कभी न देना कि पंकज कौन है भूल जाऊं इतनी प्रसिद्धि न देना मुझको लोग पराये लगने लगे,
ऐसी माया कभी न देना अंतरचक्षु भ्रमित होने लगे ।
इतनी ऊँचाई न देना ईश्वर कि धरती पराई लगने लगे

बढ़िया... बहुत बढ़िया कविता....धन्यवाद पंकज जी

प्रकाश ⎝⎝पंकज⎠⎠ ४ फरवरी २०१० ४:२६ PM  

धन्यबाद देता हूँ साहित्यशिल्पी और इनके पाठकों को जिन्हों ने मुझ जैसे नवजात को अवसर दिया !

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

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