........साहित्य शिल्पी एक पूर्ण वेबसाईट में परिवर्तित हो चूका है। अब हमारी रचनाये यहाँ पढ़े... - www.sahityashilpi.in तथा कृपया हमें अपनी प्रतिक्रिया एवं सुझावों से अवश्य अवगत करायें जिससे हम आवश्यक सुधार कर सकें.....

बुधवार, ९ दिसम्बर २००९

नजर [ग़ज़ल] - श्यामल सुमन


नजर मिली क्या तेरी नजर से
गयी न सूरत मेरी नजर से


रचनाकार परिचय:-

10 जनवरी 1960 को चैनपुर (जिला सहरसा, बिहार) में जन्मे श्यामल सुमन में लिखने की ललक छात्र जीवन से ही रही है। स्थानीय समाचार पत्रों सहित देश की कई पत्रिकाओं में इनकी अनेक रचनायें प्रकाशित हुई हैं। स्थानीय टी.वी. चैनल एवं रेडियो स्टेशन में भी इनके गीत, ग़ज़ल का प्रसारण हुआ है।

अंतरजाल पत्रिका साहित्य कुंज, अनुभूति, हिन्दी नेस्ट, कृत्या आदि में भी इनकी अनेक रचनाएँ प्रकाशित हैं।

इनका एक गीत ग़ज़ल संकलन शीघ्र प्रकाश्य है।

नजर लगे न तुम्हें किसी की
खुदा बचाये बुरी नजर से

नजर की बातें नजर ही जाने
सुनी है बातें कभी नजर से

नजर उठाना नजर झुकाना
वो कनखियाँ भी दिखी नजर से

वो तेरा जाना नजर चुरा के
नजर न आई कहीं नजर से

नजर मिला के हो सारी बातें
नयी चमक फिर उठी नजर से

नजर दिखा के किया है घायल
और मुस्कुराना नयी नजर से

नजर न आना बहुत दिनों तक
छलक पड़े कुछ इसी नजर से

भला करे क्यों नजर को टेढ़ी
कभी न गिरना किसी नजर से

नजर पे चढ़ के सुमन करे क्या
नजर है रचना खुली नजर से

11 comments:

रचना सागर ९ दिसम्बर २००९ ७:५० AM  

बहुत खूब

बेनामी ९ दिसम्बर २००९ ९:४२ AM  

Nice GaZal

Alok Kataria

अनिल कुमार ९ दिसम्बर २००९ ९:४७ AM  

नजर दिखा के किया है घायल
और मुस्कुराना नयी नजर से

नजर न आना बहुत दिनों तक
छलक पड़े कुछ इसी नजर से

बहुत अच्चे भाव।

अनन्या ९ दिसम्बर २००९ १०:०१ AM  

हर शेर अच्छा है।

नंदन ९ दिसम्बर २००९ १०:०५ AM  

सरल भाषा में कही गयी ग़ज़ल अच्छी बन पडी है।

सुषमा गर्ग ९ दिसम्बर २००९ ११:४३ AM  

अच्छी ग़ज़ल

परमजीत बाली ९ दिसम्बर २००९ २:३६ PM  

बहुत सुन्दर गजल!!

रंजना ९ दिसम्बर २००९ ४:०३ PM  

WAAH WAAH WAAH ..... BHAIYA KYA LAJAWAAB LIKHA HAI AAPNE...

ITNA SUNDAR SHABD BHAAV KA PRAYOG AUR SAMANJASY...SHABDON KA PAARKHI AUR DHAANI HI KAR SAKTA HAI...BAHUT HI BADHIYA....WAAH !!!

श्यामल सुमन १० दिसम्बर २००९ ६:३१ AM  

स्नेह समर्थन आपका लेखन का आधार।
सुमन हृदय के भाव से प्रेषित है आभार।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

सुलभ सतरंगी १० दिसम्बर २००९ १२:३१ PM  

दास्ताँ-ए-नज़र
अति सुन्दर.

Ambarish Srivastava १३ दिसम्बर २००९ ९:०२ PM  

नजर उठाना नजर झुकाना
वो कनखियाँ भी दिखी नजर से

वो तेरा जाना नजर चुरा के
नजर न आई कहीं नजर से

बहुत अच्छी व प्रभावशाली ग़ज़ल ...

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': परिकरान्कुर में रखे, साभिप्राय कवि नाम.-काव्य का रचना शास्त्र: ४७,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1,
लघु कथा:-
डायरी:-
पेंटिंग:- [ई-प्रदर्शनी]:-
यात्रा वृतांत:-

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

पुस्तक-अंश:-
व्यंग्य:-
श्रद्धांजलि:-
साक्षात्कार:-
विमर्श:-
हिन्दी साहित्य का इतिहास:-
संस्मरण:-
वीडियो:-
बाल साहित्य:-
पुस्तक चर्चा:-
अनुवाद:-

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP