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गुरुवार, ४ फरवरी २०१०

इक ज़रा सी बात पर [ग़ज़ल] - दीपक गुप्ता


रचनाकार परिचय:-

दीपक गुप्ता [का जन्म 15 मार्च 1972 को दिल्ली में हुआ। आप दिल्ली विश्वविद्यालय से कला में स्नातक हैं। आपकी प्रकाशित कृति हैं:- सीपियों में बंद मोती (कविता संग्रह) - 1995; आप की रचनायें देश के सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित व टेलीविजन कार्यक्रमों में प्रसारित होती रही हैं।

इक ज़रा सी बात पर
आ गए औकात पर

आप भी हंसने लगे
अब मेरे जज़्बात पर

हँसते - हँसते रो पड़ा
वो मेरे हालात पर

फिर ज़मीं प्यासी हुई
फिर नज़र बरसात पर

ज़िंदगानी वार दो
प्यार के लम्हात पर

5 comments:

nitesh ४ फरवरी २०१० ५:३८ PM  

लाजवाब करते हुए शेर है गीपक जी

अवनीश एस तिवारी ४ फरवरी २०१० ५:४३ PM  

गजल के व्याकरण का पता नहीं मुझे , लेकिन शेर तो मजेदार हैं , खास कर कम शब्दों वाले हैं |
बधाई |

अवनीश तिवारी

बेनामी ४ फरवरी २०१० ५:४५ PM  

WAH WAH WAH WAH

Alok Kataria

रंजना ४ फरवरी २०१० ६:३१ PM  

शब्द के छोटी छोटी सीपियों में इतने अनमोल मोती आपने पन्नो पर बिखेर दिए हैं कि हर शेर को पढ़ मन वाह कर उठता है...
लाजवाब ग़ज़ल..सिम्पली ग्रेट..

सुलभ § सतरंगी ५ फरवरी २०१० ११:१७ AM  

सुन्दर..

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': परिकरान्कुर में रखे, साभिप्राय कवि नाम.-काव्य का रचना शास्त्र: ४७,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1,
लघु कथा:-
डायरी:-
पेंटिंग:- [ई-प्रदर्शनी]:-
यात्रा वृतांत:-

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

पुस्तक-अंश:-
व्यंग्य:-
श्रद्धांजलि:-
साक्षात्कार:-
विमर्श:-
हिन्दी साहित्य का इतिहास:-
संस्मरण:-
वीडियो:-
बाल साहित्य:-
पुस्तक चर्चा:-
अनुवाद:-

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