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गुरुवार, ३० अक्तूबर २००८

सीता स्तुति [स्वर शिल्पी की प्रस्तुति] रचना एवं स्वर :- लावण्या शाह

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श्री राम की आराधना और वंदना तो आपने अनेकों कंठों से तथा अनेकानेकों शब्दों में सुनी होगी किंतु राम की ऊर्जा और अर्धांगिनी माँ सीता की वंदना बहुत कम लिखी, सुनी या गायी गयी है। लावण्या शाह नें सीता की आराधना को न केवल शब्द दिये हैं अपितु अपना स्वर भी प्रदान किया है। वंदना प्रस्तुत है, इसे सुनने के लिये नीचे दिये गये प्लेयर पर चटखा लगायें।



सुमँगलीम कल्याणीम।
श्री सीता सुमधुर भाषिणीम॥
वर दायिनीम जगतारिणीम।
श्री राम पद अनुरागिणीम॥
वैदेही जनकतनयाम,
मृदुस्मिता उध्धारिणीम,
चँद्र ज्योत्सनामयीँ, चँद्राणीम,
नयन द्वय, भव भय हारिणीम॥
कुँदेदू सहस्त्र फुल्लाँवारिणीम,
श्री राम वामाँगे सुशोभिनीम।
सूर्यवँशम माँ गायत्रीम,
राघवेन्द्र धर्म सँस्थापिनीम॥
श्री सीता देवी नमोस्तुते!
हे अवध राज्य-लक्ष्मी नमोनम:।
हे राम वल्लभाय नमोनम:।
नमोनम: नमोनम:॥

16 comments:

Dineshrai Dwivedi दिनेशराय द्विवेदी २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

अच्छी स्तुति, पढ़ी, सुन नहीं पाए प्लेयर ने काम नहीं किया।

seema gupta २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

" sunder vandna, acche lgee"

Regards

mamta २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

लावण्या जी आपकी आवाज बहुत ही मीठी है । इस स्तुति को सुनकर मन बिल्कुल शांत सा हो गया है ।

मोहिन्दर कुमार २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

सुंदर लय बद्ध स्तुति सुन कर बहुत अच्छा लगा.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

बहुत सुंदर!

Pran Sharma २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

Seeta-Vandana kaa ek -ek shabd
lagaa ki jaese aapne chun-chun kar
sunder motee reshmee dhaage mein
piro diye hain.Aapke meethe swar
ne to Seeta-Vandana ko chaar chaand
lagaa diye hain.Kaee baar sun chuka
hoon aur kaee baar aur sunooga.
Achchhee rachna ke liye aapko
badhaaee.

रितु रंजन २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

यह सत्य है कि सीता जी की स्तुति पहली बार जी सुनी/पढी। इस मायने में आपकी प्रस्तुति सुर्लभ, अद्वतीय तथा संग्रहणीय है।

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

nice poem, very sweet voice.

Alok Kataria

रितु रंजन २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

एक और बात, आपकी आवाज बहुत मीठी है।

रचना सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

मधुर है वंदना और आपका स्वर भी। बधाई।

अभिषेक सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

सीता के विषय में कम लोगों नें ही कलम चलाई है, बहुत अच्छी प्रस्तुति। बधाई।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

"श्री सीता देवी -स्तुति"
ये मेरा विनम्र प्रयास है -
इसे सराहने के लिये
सभी का आभार !
ममताजी, रितुरँजनजी,
सीमाजी,अनुराग भाई,
दिनेश भाई जी,रचना सागरजी,
प्राण भाई साहब,अभिषेक जी,आलोकजी,मोहिन्दरजी
आप सभी को दीपावली की पुनः शुभकामनाएँ
स स्नेह्,
- लावण्या

शोभा २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

लावण्या जी,
अति सुंदर स्तुति लिखी और सुमधुर आवाज मैं गई है. बहुत-बहुत बधाई.

राजीव रंजन प्रसाद २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

आदरणीया लावण्या जी,

आपकी प्रस्तुत स्तुति संग्रह करने योग्य तथा प्रात: स्मरणीय है। आपकी कलम नें इस स्तुति के माध्यम से सीता-राम की संकल्पना की ओर ध्यान खीचा है जहाँ राम अकेले सारी स्त्तुतियों में नजर आते हैं, माँ सीता के बिना राम और रामायण कहाँ ..आपकी आवाज़ भी स्पष्ट व मधुर है।

***राजीव रंजन प्रसाद

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

शोभा जी व राजीव रँजन जी
आप दोनोँ का भी बहुत बहुत आभार !
स स्नेह,
- लावण्या

praveen pandit २३ नवम्बर २००९ ६:४० PM  

प्रथम अवसर है जब मां सीता की स्तुति गोचर हुई।
भाव भीनी एवं वंदनीय ।

प्रवीण पंडित

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