एक सैनिक की खरी खरी [आलेख] - श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'
आप किस मुंह से बात करते हैं शहीदों और सैनिकों के सम्मान की...
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.....आईये कारवां बनायें....
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24 comments:
Being in army i cam understand your pain.
Alok Kataria
""बे-तक्ख्ल्लुस" क्या कहे इस बे-शरम की शान में,
भेडिये-गीदड़ भी अब बसने लगे इनसान में""
बाहर निकल कर पता नहीं पटाखों को क्यों नहीं ""एन्जॉय" किया.......???
योद्धा,
और lap top पे......
भाई जी इन कमाल के योद्धा की जानकारी दी .......धन्यवाद......
दुःख भरी बात है पर हंसने का मन होता है
आपके लेख में निहित भावनाओं से पूरी सहमति है।
धन्यवाद......
दुःख की बात है ....
आपने वाकई खरी खरी कहा है। बहुत अच्छा आलेख है।
"किसी भी सैनिक के लिये सच्चे सम्मान से अधिक बड़ा प्रतिकार कुछ भी नहीं हो सकता है किंतु यह कुछ पलों का न होकर स्थाई बना रहे यही शहीदों के और उनके परिवारों के लिए सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।"
सही कहा आपनें।
हमारे नेता सिर्फ कागज़ी शेर है....
आपकी बात से पूर्णत्या सहमत...
झकझोर देने वाला लेख है।
योद्धा और लैपटौप वाली घटना सिद्ध करती है कि राजनेताओं ने शर्म-हया और ईमान सब कुछ धोकर पी लिया है।
कान्त जी,
आपका आलेख बहुत कुछ बयां करता है। आपकी लेखनी यूँ हीं अनवरत चलती रहे, यही कामना करता हूँ।
मर्म को छू गया
LEKH SOCHNE PAR VIVASH KARTAA HAI
shrikant ji ,
लेख पढ़कर मन में बहुत से सवाल आए , जिनके कोई जवाब नही थे , ये देश अब पूरी तरह से banana country बन चुका है . हमें अब कुछ ऐसे decisions लेने होंगे कि नेताओ को अक्ल आ जाएँ .
विजय
देश पर निज प्राण के जो पुष्प न्यौछावर करे
जो कफ़न का ओढ़ चोला देश पर ही मिट मरे
उस तनय के जनक द्वय को नमन बारंबार है
जो गँवाकर प्राण करता देश का शृंगार है ।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में आज जो कुहासा छाया हुआ है इसका हल केवल राष्ट्रीय जनमानस के पास ही है नेताओं और संस्थानों से अपक्षा के बिना जो मानवीय सैलाव सड़कों पर उतरा है उसे सही दिशा में ले जाते हुए सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय चेतना के रूप में परिवर्तित की क्षमता बुद्धिजीवी वर्ग में ही है.. ग्लैमर की दुनिया से अप्रभावित रहकर आयें आज सही अर्थों में हम एक कारवां बनायें. जाति वर्ग धार्मिक आस्थाओं के भेदसे विहीन एक नए समाज का ...... प्रयास जारी रखें और सच्ची राष्ट्रीय चेतना की इस लौ को किसी को बुझाने न दें
Shreekant ji you have written very correct in your article and i am very much agreed. this is the time when we know that our future is not safe in the hands of politicians.... we have to stand together....
Neha
Your article is very nice and have revealed the truth about our country politicians and showed the bravery of our soldiers.... nice article to light our feelings towrads nattion....
इन नेताओ को हमने बनाया है और हम ही इन्हे हटाने का अधिकार रखते है यदि हमें आगे जाके इन्हे देश के सत्ता से निकालना पड़ा तो हम पीछे नही हटेंगे ये देश हमारा है जनता का न की नेताओ के जागीर मै इस लडाई मै जनता के साथ हूँ श्रीकान्त जी.
ताशु
जिन परिवारों ने अपना कोई खोया है वही जवानों को सही श्रधांजलि दे पाते है नेता तो सिर्फ़ भाषण देना जानते है उनका दर्द नही.
ज्योति
manyawar netao ne sirf janta ka shoshan kiya hai wo jo karte hai dikhawa matr hota hai hame unki santwana nahi cahiye hamkhud kahde hosakte hai.
priti
manyawar netao ne sirf janta ka shoshan kiya hai wo jo karte hai dikhawa matr hota hai hame unki santwana nahi cahiye hamkhud kahde hosakte hai.
priti
जा तन लागे सो तन जाने... और कौन जाने पीर पराई..
श्रीकान्त जी जीवन का मूल्य वही जानते है जो इसे निछावर करते हैं या उनके घर वाले... जिन्हें सिर्फ़ सान्त्वनाओं के अतिरिक्त देश से कुछ नहीं मिलता.. एक आतंकवादी और और एक सैनिक की मौत राज नेताओं के लिये एक समान सी हैं और मुआवजे में भी कुछ खास फ़र्क नहीं होता..
एक संवेदनशील लेख के लिये बधाई
srikantji!
I must congratulate for bringing up the true feeling of a soldier. but you know the change will come only when our own people will stop electing this shameless politician. Continue with true sprit and Keep it up.
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