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शुक्रवार, ५ दिसम्बर २००८

एक सैनिक की खरी खरी [आलेख] - श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'

आप किस मुंह से बात करते हैं शहीदों और सैनिकों के सम्मान की... 


क्या आप में से किसी ने .... कभी रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन कराने के लिए गए हुए किसी सैनिक के साथ रिजेर्वेशन करने वाले क्लर्क का अपमान भरा वर्ताव देखा है? बड़े बड़े शब्दों में देशभक्ति और सैनिकों के कल्याण का दावा करने वाले राजनीतिक और कार्यालयों में कार्य करने वाले जनता के लोग, सैनिकों के आत्मसम्मान को बहुधा ठेस पहुँचाने से भी परहेज नहीं करते। यह जो चार दिनों के लिए देश और शहीदों के नाम का जज्बा है समुद्र में आया तूफ़ान नहीं है....... शायद यह भी चाय की प्याली मैं आए तूफ़ान की तरह बैठ जाएगा ... आज का राजनेता भी यह बहुत अच्छी तरह जानता है और मीडिया भी। 

उंगली पर गिने चुने एक या दो चैनेल को छोड़ दिया जाए तो सभी को पता है कि बहुत दिनों तक इसके सहारे टी आर पी नहीं बढ़ाई जा सकेगी।  इसलिए बहती गंगा में जितना हाथ साफ़ कर सकते हो कर लो ...... 

संभवतः ताज होटल से सुरक्षित बाहर आने वाले एक सांसद का मीडिया पर बयान लोग अब तक नहीं भूल सके होंगे। इन महोदय ने मीडिया पर आते ही शेखी बघारते हुए कहा था कि वो तो योद्धा हैं डर कैसा .. ? वह तो अपने लैपटाप पर 'एन्जॉय' करते रहे। इन 'स्वयंभू बहादुर' नेता जी से क्या कोई पूंछना चाहेगा कि आतंकवादियों के आते ही दरवाजा क्यों बंद कर दिया....!!!! ? उन्हें बहादुरी से मुकाबला करना चाहिए था ... अथवा अपने प्रेरक भाषण से आतंकवादियों का हृदय परिवर्तन करने के लिये प्रयास करना चाहिए था। देश का दुर्भाग्य है कि यदि ऐसे राजनीतिक, नकली शेर योद्धा हैं तो फिर अमर शहीद मेजर उन्नीकृष्णन, हवलदार गजेंदर, हेमंत करकरे सहित अन्य बलों के अमर शहीद क्या हैं .... 

माइक और कैमरा देखते ही शेर बन जाने वाले नेता जी संभल जाइये। देश की जनता को बहुत ही दुःख और पीड़ा पहुंचा चुके हैं आप ......... देश की जनता से यही निवेदन है कि किसी भी सैनिक के लिये सच्चे सम्मान से अधिक बड़ा प्रतिकार कुछ भी नहीं हो सकता है किंतु यह कुछ पलों का न होकर स्थाई बना रहे यही शहीदों के और उनके परिवारों के लिए सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।

24 comments:

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

Being in army i cam understand your pain.

Alok Kataria

manu २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

""बे-तक्ख्ल्लुस" क्या कहे इस बे-शरम की शान में,
भेडिये-गीदड़ भी अब बसने लगे इनसान में""
बाहर निकल कर पता नहीं पटाखों को क्यों नहीं ""एन्जॉय" किया.......???

manu २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

योद्धा,
और lap top पे......
भाई जी इन कमाल के योद्धा की जानकारी दी .......धन्यवाद......
दुःख भरी बात है पर हंसने का मन होता है

पंकज सक्सेना २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

आपके लेख में निहित भावनाओं से पूरी सहमति है।

गीता पंडित (शमा) २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

धन्यवाद......

दुःख की बात है ....

अभिषेक सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

आपने वाकई खरी खरी कहा है। बहुत अच्छा आलेख है।

रितु रंजन २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

"किसी भी सैनिक के लिये सच्चे सम्मान से अधिक बड़ा प्रतिकार कुछ भी नहीं हो सकता है किंतु यह कुछ पलों का न होकर स्थाई बना रहे यही शहीदों के और उनके परिवारों के लिए सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।"

सही कहा आपनें।

नंदन २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  
यह पोस्टलेखक के द्वारा निकाल दी गई है.
राजीव तनेजा २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

हमारे नेता सिर्फ कागज़ी शेर है....

आपकी बात से पूर्णत्या सहमत...

नंदन २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

झकझोर देने वाला लेख है।

विश्व दीपक ’तन्हा’ २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

योद्धा और लैपटौप वाली घटना सिद्ध करती है कि राजनेताओं ने शर्म-हया और ईमान सब कुछ धोकर पी लिया है।
कान्त जी,
आपका आलेख बहुत कुछ बयां करता है। आपकी लेखनी यूँ हीं अनवरत चलती रहे, यही कामना करता हूँ।

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

मर्म को छू गया

Pran Sharma २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

LEKH SOCHNE PAR VIVASH KARTAA HAI

Vijay Kumar Sappatti २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

shrikant ji ,

लेख पढ़कर मन में बहुत से सवाल आए , जिनके कोई जवाब नही थे , ये देश अब पूरी तरह से banana country बन चुका है . हमें अब कुछ ऐसे decisions लेने होंगे कि नेताओ को अक्ल आ जाएँ .

विजय

आलोक शंकर २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

देश पर निज प्राण के जो पुष्प न्यौछावर करे
जो कफ़न का ओढ़ चोला देश पर ही मिट मरे
उस तनय के जनक द्वय को नमन बारंबार है
जो गँवाकर प्राण करता देश का शृंगार है ।

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में आज जो कुहासा छाया हुआ है इसका हल केवल राष्ट्रीय जनमानस के पास ही है नेताओं और संस्थानों से अपक्षा के बिना जो मानवीय सैलाव सड़कों पर उतरा है उसे सही दिशा में ले जाते हुए सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय चेतना के रूप में परिवर्तित की क्षमता बुद्धिजीवी वर्ग में ही है.. ग्लैमर की दुनिया से अप्रभावित रहकर आयें आज सही अर्थों में हम एक कारवां बनायें. जाति वर्ग धार्मिक आस्थाओं के भेदसे विहीन एक नए समाज का ...... प्रयास जारी रखें और सच्ची राष्ट्रीय चेतना की इस लौ को किसी को बुझाने न दें

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

Shreekant ji you have written very correct in your article and i am very much agreed. this is the time when we know that our future is not safe in the hands of politicians.... we have to stand together....

Neha

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

Your article is very nice and have revealed the truth about our country politicians and showed the bravery of our soldiers.... nice article to light our feelings towrads nattion....

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

इन नेताओ को हमने बनाया है और हम ही इन्हे हटाने का अधिकार रखते है यदि हमें आगे जाके इन्हे देश के सत्ता से निकालना पड़ा तो हम पीछे नही हटेंगे ये देश हमारा है जनता का न की नेताओ के जागीर मै इस लडाई मै जनता के साथ हूँ श्रीकान्त जी.
ताशु

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

जिन परिवारों ने अपना कोई खोया है वही जवानों को सही श्रधांजलि दे पाते है नेता तो सिर्फ़ भाषण देना जानते है उनका दर्द नही.

ज्योति

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

manyawar netao ne sirf janta ka shoshan kiya hai wo jo karte hai dikhawa matr hota hai hame unki santwana nahi cahiye hamkhud kahde hosakte hai.
priti

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

manyawar netao ne sirf janta ka shoshan kiya hai wo jo karte hai dikhawa matr hota hai hame unki santwana nahi cahiye hamkhud kahde hosakte hai.
priti

मोहिन्दर कुमार २३ नवम्बर २००९ ६:४५ PM  

जा तन लागे सो तन जाने... और कौन जाने पीर पराई..
श्रीकान्त जी जीवन का मूल्य वही जानते है जो इसे निछावर करते हैं या उनके घर वाले... जिन्हें सिर्फ़ सान्त्वनाओं के अतिरिक्त देश से कुछ नहीं मिलता.. एक आतंकवादी और और एक सैनिक की मौत राज नेताओं के लिये एक समान सी हैं और मुआवजे में भी कुछ खास फ़र्क नहीं होता..
एक संवेदनशील लेख के लिये बधाई

madhusudan २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

srikantji!
I must congratulate for bringing up the true feeling of a soldier. but you know the change will come only when our own people will stop electing this shameless politician. Continue with true sprit and Keep it up.

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