........साहित्य शिल्पी एक पूर्ण वेबसाईट में परिवर्तित हो चूका है। अब हमारी रचनाये यहाँ पढ़े... - www.sahityashilpi.in तथा कृपया हमें अपनी प्रतिक्रिया एवं सुझावों से अवश्य अवगत करायें जिससे हम आवश्यक सुधार कर सकें.....

साहित्यशिल्पी पर नवीनतम प्रस्तुतियाँ

लोड हो रहा है. . .

गुरुवार, ११ दिसम्बर २००८

गीत में तुमने सजाया रूप मेरा... [स्वर और संगीत - आदित्य विक्रम] महेन्द्र भटनागर


आज पेश है स्वरशिल्पी द्वारा प्रस्तुत कवि महेंद्र भटनागर का गीत "गीत में तुमने सजाया रूप मेरा..." जिसे आवाज़ दी है, उन्हीं के सुपुत्र आदित्य विक्रम ने।
गीत के बोल हैं:

गीत में तुमने सजाया रूप मेरा
मैं तुम्हें अनुराग से उर में सजाऊँ !
.
रंग कोमल भावनाओं का भरा
है लहरती देखकर धानी धरा
नेह दो इतना नहीं, सँभलो ज़रा
गीत में तुमने बसाया है मुझे जब
मैं सदा को ध्यान में तुमको बसाऊँ !
.
बेसहारे प्राण को निज बाँह दी
तप्त तन को वारिदों-सी छाँह दी
और जीने की नयी भर चाह दी
गीत में तुमने जतायी प्रीत अपनी
मैं तुम्हें अपना हृदय गा-गा बताऊँ

तो आइये सुनते हैं प्रेमास्पद से पूर्णरूपेण एकाकार होने की भावना से परिपूरित ये गीत:

GEET MEN TUMNE...m...

17 comments:

सुनीता शानू २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

आवाज़ भी बहुत मधुर लगी। एक बार फ़िर बधाई...

सुनीता शानू २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

बहुत सुन्दर गीत! बधाई

रचना सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

आवाज मखमली और सुस्पष्ट है। गीत गहरा है।

Vijay Kumar Sappatti २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

bahut sundar ,

acchi prastuthi .

badhai aapko aur sahitya shilpi ko

vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

पंकज सक्सेना २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

गीत में तुमने सजाया रूप मेरा
मैं तुम्हें अनुराग से उर में सजाऊँ !

कर्णप्रिय। दिन बना दिया आपनें।

नंदन २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

वाह!! पूरा गीत मन में बस गया। पिता-पुत्र की इस जोडी को धन्यवाद इस मनोहारी गीत को सुनवाने के लिये। साहित्य शिल्पी को बधाई।

साहित्य-शिल्पी २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  
यह पोस्टलेखक के द्वारा निकाल दी गई है.
सुशील कुमार २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

अच्छी गीती-कविता।

मोहिन्दर कुमार २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

सुन्दर शब्दों, स्वर, लय और ताल का मिश्रण ..बधाई

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

Nice song well sung...

Alok Kataria

रितु रंजन २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

मधुरता से गाया गया प्रभावी गीत है। बहुत अच्छी प्रस्तुति के लिये महेन्द्र जी व आदित्य जी को बधाई।

संगीता पुरी २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

बहुत सुंदर गीत।

अभिषेक सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

बहुत अच्छा गीत और उतनी ही अच्छी आवाज, वाह।

yogesh samdarshi २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

वाह!! वाह!! वाह!! वाह!! बहुत सुन्दर गीत! बधाई

Dr. Sujit Kumar Bajpayee २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

अति सुन्दर!!!
जितना अच्छा गीत उतना ही सुंदर संगीत एवं मधुर आवाज!!

राजीव रंजन प्रसाद २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

आदरणीय महेन्द्र भट्नागर की कविता निस्संदेह अनुपम है। आदित्य जी नें अपना स्वर दे कर सोने पर सुहागा कर दिया है।


***राजीव रंजन प्रसाद

गीता पंडित (शमा) २३ नवम्बर २००९ ६:४६ PM  

सुन्दर गीत.....
मधुर आवाज़....


बधाई...

नवीनतम काव्य प्रस्तुतियाँ

लोड हो रहा है. . .

नवीनतम कथा प्रस्तुतियाँ

लोड हो रहा है. . .

अन्य नवीनतम प्रस्तुतियाँ

लोड हो रहा है. . .

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP