राग-संवेदन [काव्य पाठ] - महेन्द्र भटनागर
प्रत्येक गुरुवार को प्रस्तुत की जाने वाली स्वर-प्रस्तुतियों की श्रंखला में आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं वरिष्ठ साहित्यकार महेन्द्र भटनागर जी का काव्य पाठ। श्रोताओं/पाठकों की सुविधा के लिये कविता प्रस्तुत है:-
तुम
बजाओ साज़
दिल का,
ज़िन्दगी का गीत
मैं
गाऊँ!
रचनाकार परिचय:-उम्र यों
ढलती रहे,
उर में
धड़कती साँस यह
चलती रहे!
दोनों हृदय में
स्नेह की बाती लहर
बलती रहे!
जीवन्त प्राणों में
परस्पर
भावना - संवेदना
पलती रहे!
तुम
सुनाओ
इक कहानी प्यार की
मोहक,
सुन जिसे
मैं
चैन से
कुछ क्षण
कि सो जाऊँ!
दर्द सारा भूल कर
मधु-स्वप्न में
बेफ़िक्र खो जाऊँ!
तुम
बहाओ प्यार-जल की
छलछलाती धार,
चरणों पर तुम्हारे
स्वर्ग - वैभव
मैं
झुका लाऊँ!
काव्य-पाठ सुनने के लिये प्लेयर पर चटखा लगायें:-




12 comments:
अच्छी प्रस्तुति।
सुन्दर कविता...
सुमधुर प्रस्तुति
महेन्द्र जी की रचनाओं में कविता के उस युग की झलक मिलती है जब कविता वास्तव में कविता होती थी। आपकी रचना धर्मिता को प्रणाम।
Poem be a legend.
Alok Kataria
बहुत अच्छा लगा महेन्द्र जी की आवाज में इस कविता को सुनना।
उम्र के इस पडाव पर भी आपकी एनर्जी का जवाब नहीं। आपकी आवाज में भी वह बुलंदी है।
आपको पढना और सुनना दोनों का आनंद है।
बहुत अच्छा लगा आपकी आवाज़ में आपकी कविता सुनना। आभार।
तुम
सुनाओ
इक कहानी प्यार की
मोहक,
सुन जिसे
मैं
चैन से
कुछ क्षण
कि सो जाऊँ!
दर्द सारा भूल कर
मधु-स्वप्न में
बेफ़िक्र खो जाऊँ!
आपकी कविता और आवाज
दोनों ......बहुत सुंदर....
आभार }
आपकी इस सुंदर रचना के साथ आपकी आवाज़ सुन कर सुखद अनुभाव हुआ।
सुंदर प्रस्तुति।
mahendra ji ,
pranaam
aapki kavita padhi aur suni ..
bahut aanand aaya.. kam shbdo men aapne kitna acchi baat kahi hai..
aapko dil se badhai
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