मीनाकुमारी : अभिनेत्री और शायरा [पुण्यतिथि पर विशेष] - अजय यादव

साहित्य शिल्पी

मीनाकुमारी का नाम किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है। इस हसीन अदाकारा ने अपनी बेमिसाल अदायगी के दम पर लोगों के दिल में जो जगह बनायी, वो बहुत कम लोगों को नसीब होती है। 1 अगस्त, 1932 को जन्मी मीना कुमारी का असल नाम महज़बीन बानो था। इनके माता-पिता भी अभिनय से जुड़े थे और उन्हीं की इच्छाओं और घर की आर्थिक ज़रूरतों ने नन्हीं महज़बीन को अभिनय की दुनिया में पहुँचा दिया था। यहीं उन्हें मीनाकुमारी नाम मिला जो बाद में उनकी पहचान बन गया।

मीनाकुमारी को पहली बड़ी सफलता फिल्म बैजू बावरा (1952) ने दिलाई। इस फिल्म के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पहला फिल्मफेअर अवार्ड भी मिला। इसके बाद तो उनकी सफल फिल्मों की फेहरिस्त लंबी ही होती गई। इनमें परिणीता, शारदा, मिस मेरी, साहिब बीवी और गुलाम, आरती, मैं चुप रहूँगी, दिल एक मंदिर, काजल, फूल और पत्थर जैसी कई बेहतरीन फिल्में शामिल थीं। 1962 में उन्हें ’साहिब बीवी और गुलाम’, ’आरती’ और ’मैं चुप रहूँगी’ के लिये सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के सम्मान के लिये नामांकित किया गया जो अपने आप में एक रिकार्ड है।

मीनाकुमारी ने 1952 में कमाल अमरोही से शादी की। परंतु यह शादी सफल न हो सकी। मीनाकुमारी ने खुद को शराब में डुबो दिया और एक ज़माने की सफलतम अभिनेत्री अपने ही अंधेरों में खोती चली गई। 1972 में अपनी आखिरी फिल्म "पाक़ीज़ा" की रिलीज के तीन सप्ताह बाद 31 मार्च, 1972 को उनका इंतकाल हो गया।

मीनाकुमारी जितनी सशक्त अभिनेत्री थीं, उतनी ही अच्छी शायरा भी। वे "नाज़" तखल्लुस का इस्तेमाल अपनी शायरी में करतीं थीं। मगर उनकी शायरी बहुत ऊँचे दर्ज़े की होने के बावज़ूद लंबे समय तक लोगों के सामने न आ सकी। उनकी मौत के बाद उनकी डायरियाँ मशहूर गीतकार और निर्देशक गुलज़ार को वसीयत में मिलीं जिन्होंने इनमें से कुछ गज़लों और नज़्मों को बाद में छपवाया। इससे पहले खुद उनकी आवाज़ में उनकी कुछ रचनाओं का एक एलबम "I Write, I Recite" ज़रूर आया था जिसमें संगीत दिया था मशहूर संगीतकार खैयाम ने।

इनका अपना जीवन बहुत खुशगवार नहीं रहा। और शायद इस मुसलसल दर्द की शिद्दत ने ही इस पाकीज़ा रूह को 'ट्रैजेडी क्वीन' का खिताब भी दिलाया। शायरी में भी 'नाज़' उसी दर्द को जीती हैं जो उनकी ज़िन्दगी का हिस्सा बन चुका था। उनकी शायरी में वो खलिश है जो पढ़ने वालों के दिलों में भी कहीं गहरे उतर जाती है। आइये सुनते हैं नाज़ की एक खूबसूरत गज़ल खुद उनकी ही आवाज़ में:





मीना कुमारी की दो और गज़लें:


मेरा माज़ी


आबलापा कोई इस दस्त में

पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
रात खैरात की, सदके की सहर होती है

साँस भरने को तो जीना नहीं कहते या रब
दिल ही दुखता है न अब आस्तीं तर होती है

जैसे जागी हुई आँखों में चुभें काँच के ख्वाब
रात इस तरह दीवानों की बसर होती है

गम ही दुश्मन है मेरा गम ही को दिल ढूँढता है
एक लम्हे की ज़ुदाई भी अगर होती है

एक मर्कज़ की तलाश, एक भटकती खुशबू
कभी मंज़िल, कभी तम्हीदे-सफ़र होती है

दिल से अनमोल नगीने को छुपायें तो कहाँ
बारिशे-संग यहाँ आठ पहर होती है

काम आते हैं न आ सकते हैं बेज़ाँ अल्फ़ाज़
तर्ज़मा दर्द की खामोश नज़र होती है

16 टिप्पणियाँ:

  1. राजीव तनेजा says

    मीना कुमारी जी के जीवन और शायरी से परिचय करवाने के लिए अजय जी का बहुत-बहुत शुक्रिया


    रितु रंजन says

    मीना कुमारी पर बेहद जानकारीपूर्ण आलेख है।


    पंकज सक्सेना says

    गम ही दुश्मन है मेरा गम ही को दिल ढूँढता है
    एक लम्हे की ज़ुदाई भी अगर होती है
    मीनाकुमारी की बहुमुखी प्रतिभा को गागर में सागर की तरह प्रस्तुत किया गया है।


    seema gupta says

    मीना कुमारी जी के जीवन और शायरी से परिचय करवाने के लिए शुक्रिया

    Regards


    शोभा says

    अजय जी,
    बहुत अच्छी प्रस्तुति दी है आपने। मीना कुमारी की गज़लें सुनकर बहुत अच्छा लगा। आभार।


    दृष्टिकोण says

    अजय जी मीना जी की शायरी बहुत मुश्किल से ही पढने को मिल पाती है। और भी उदाहरण की आवश्यकता थी तो मजा आ जाता।


    अनिल कुमार says

    इनका अपना जीवन बहुत खुशगवार नहीं रहा। और शायद इस मुसलसल दर्द की शिद्दत ने ही इस पाकीज़ा रूह को 'ट्रैजेडी क्वीन' का खिताब भी दिलाया। शायरी में भी 'नाज़' उसी दर्द को जीती हैं जो उनकी ज़िन्दगी का हिस्सा बन चुका था। उनकी शायरी में वो खलिश है जो पढ़ने वालों के दिलों में भी कहीं गहरे उतर जाती है।


    Vijay Kumar Sappatti says

    ajay ji ,

    bahut hi sundar aur pyaara lekh .. meena ji ek gazab ki adakaara thi ..aur wo ek beahtreen shayaar bhi thi ..

    aapko is lekh ke liye dil se badhai ..

    vijay


    "अर्श" says

    मीना कुमारी जी के जीवन और शायरी से परिचय करवाने के लिए शुक्रिया


    PRAN SHARMA says

    MEENA KUMARI KAA SAMOOCHAA JEEVAN
    SANGARSH AUR KASHMAKASH BHARAA
    RAHAA HAI.UNKEE SHAYREE MEIN UNKE
    JEEVAN KAA AKS DEKHA JAA SAKTAA
    HAI.UNKE VYAKTITV AUR KRITITV PAR
    PRAKASH DAALNE KE LIYE SHRI AJAY
    YADAV JEE KO BADHAEE.


    योगेश समदर्शी says

    मीना कुमारी पर बेहद जानकारी पूर्ण आलेख...


    श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’ says

    स्वर्गीय मीनाकुमारी की अदाकारी ही नहीं दर्द के साथ उनका अटूट साथ, उनकी आवाज में श्रोता, दर्शक के दिल की गहरायी तक उतरने की ताकत के बल पर वह आज तक हर दिल अजीज़ हैं और दैहिक अवसान के उपरांत भी हम सबके दिलों में जिंदा हैं.

    अजय जी का आलेख के लिये शुक्रिया


    डॉ .अनुराग says

    बहुत-बहुत शुक्रिया


    महावीर says

    अजय जी मीना कुमारी की आवाज़ सुन कर बहुत अच्छा लगा। एक सुंदर प्रस्तुति के लिए धन्यवाद।


    निधि अग्रवाल says

    अभी अतृप्ति है। मीना कुमारी पर कृपया और विस्तार से..।


    मोहिन्दर कुमार says

    मीना जी मेरी पसन्द की अभिनेत्रियों में सबसे ऊपर रही हैं. अजय जी का आभार कि उन्होंने हमें और करीब से जानने का मौका दिया.


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