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बुधवार, ११ मार्च २००९

बुरा न मानो होली है [साहित्य शिल्पियों के कार्टून] - योगेश समदर्शी

मित्रों, 
मजाक एक परंपरा की तरह होली के पावन त्यौहार का हिस्सा है और बुरा न मानने की अनिवार्य शर्त भी। योगेश जी नें कुछ कटाक्ष के रंग चुन चुन कर साहित्य शिल्पियों पर उडेले हैं निश्चित ही सब हरे नीले होंगे...लाल-पीले नहीं। कहते हैं न कि - बुरा न मानो होली है....

- साहित्य शिल्पी 
---------------------------

मित्रों
होली की हार्दिक शुभकामनाएं।  साहित्य शिल्पी पर जिन साथियों, दोस्तों को थोडा बहुत समझ पाया हूं उस हिसाब से होली खेल रहा हूं।  मेरा अपना ढंग है रंग फैंकने का.. आपको चाहे जैसा लगे.. पर देखो बुरा मत मानाना... यह होली आपको कैसी लगी जरूर बताईयेगा अवश्य .. जिन लोगों के चेहरे इनमे दिखाई नही दे रहे है वह मुझे माफ कर देना क्योंकी साहब मैं थोडा देर से जागा इस लिये इतने ही लोगो से होली हो सकी... बाकी आपके ऊपर है.. जनाब आप इस होली को कैसे लेते है.. 
 
-योगेश समदर्शी 

साहित्य शिल्पी - राजीव रंजन प्रसाद एवं रितु रंजन प्रसाद



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प्राण शर्मा एवं पवन कुमार चंदन 


अभिषेक तिवारी, सुभाष नीरव एवं योगेश समदर्शी 




समीर जी (उडन तश्तरी जी) के लिये भी रंग है 




साहित्य शिल्पी - सूरजप्रकाश, रूप सिंह चंदेल एवं तेजेन्द्र शर्मा 




43 comments:

शोभा २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

हा हा हा योगेश जी,
बहुत बढ़िया। गज़ब की होली खेली है। मज़ा आ गया। होली खेलने का यह ढ़ंग बहुत प्रभावी रहा। होली की शुभकामनाएँ।

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

This is one of THE BEST thing i ever saw on a blog.

Happy Holi to all readers and members of Sahitya Shilpi


Anupama

अविनाश वाचस्पति २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

इसे देखकर ख्‍याल आता है

महीने में एक दिन होली अवश्‍य मनाएं

उस होली पर कार्टूनों को कार्टून बनाएं

चाहे रचनाओं में से चुरायें

पर अवश्‍य बनायें

अपनी संरचनात्‍मक प्रतिभा को

समदर्शी भाई यूं ही न गंवाये

और नुक्‍कड़ पर अब वे सारी टिप्‍पणियां

कार्टूनों के रूप में ही भिजवायें।

झकाझक २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

चलि‍ए अच्‍छा हुआ

अब अलग से नहीं मांगनी पड़ेंगी

एक काम तो कम हुआ

अब टिप्‍पणी मांगने का समय
टिप्‍पणी लेखन में ही दे दिया करूंगा।

और हां मैं बुरा भी मान गया हूं

और मानता रहूंगा हजूर

अगर आपने अब भी टिप्‍पणी न दी जरूर।


कुछ दे रहा हूं

तभी तो मांग रहा हूं

क्‍या कर दिया कसूर।


सब मांगते हैं

वे मन में मांगते हैं

हम लिखचीत बॉक्‍स में मांगते हैं

वे सबूत नहीं छोड़ते

हम निशान छोड़ देते हैं।


पर मैं सफाई क्‍यों दे रहा हूं

सब शब्‍द अपने वापिस ले रहा हूं।

विनोद २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

दो बाबा बहुत पसंद आये। इन्‍हीं के होने से ब्‍लॉग परिवार बढ़ता जाये। एक बाबा टिप्‍पणी दे रहे हैं। दूसरे बाबा टिप्‍पणी मांग रहे हैं। बीच में बाकी ब्‍लॉगर क्‍या भंग छान रहे हैं। उनसे निवेदन है कि वे भी किसी न किसी गुट में शामिल हो जाएं। ब्‍लॉगिंग में सिर्फ चार गुटों की छनती है। एक टिप्‍पणी देने वाले, दूसरे लेने वाले, तीसरे पोस्‍ट लगाने वाले और चौथे उन पर विवेचना करने वाले। तीन तो सदा सक्रिय रहने ही चाहिए। पोस्‍ट करने वाले चाहे न रहें, पर बाकी टिप्‍पणी ब्‍लॉगवाणी पर पसंद टिप्‍पणी खेलते रहें। मेरा नाम विनोद जरूर है पर मैं आज विनोद के मूड में नहीं हूं इसलिए गंभीर बात कह रहा हूं।

दृष्टिकोण २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

वाह भई वाह। यह हुई होली।

राजीव तनेजा २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

हा...हा....हा.... मज़ा आ गया जी फुल्ल-फुल्ल

अनन्या २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

बहुत बढिया। इसे कहते हैं विनोद करना। लेकिन कई छूट गये योगेश जी आपकी निगाह से।

अनिल कुमार २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

सभी मजेदार हैं। होली है

Udan Tashtari २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

हा हा!! डॉ कुमार के लिए बिल्कुल सही सटीक!!!

-टिप्पणी वाले बाबा बोल रहे हैं. :)

छा गये!!!


आपको होली की मुबारकबाद एवं बहुत शुभकामनाऐं.
सादर
समीर लाल

राजीव रंजन प्रसाद २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

योगेश जी, मेरी हालत का खूब बयां किया आपने :) बहुत अच्छे कार्टून हैं। आपको गंभीरता से कार्टूनिंग शुरू कर देनी चाहिये। सभी कार्टून अच्छे हैं। आपनें साहित्य शिल्पी को अपनी मेधा के रंग से सरोबार कर दिया।

मधु २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

बहुत खूब।

होली की शुभ कामनाएं।

अच्‍छा तरीका है होली मनाने का भाई लोग।

महिलाओं के साथ होली नहीं खेली। आखिर सवाल सामर्थ्‍य का है, साहस का है। हा हा हा ।

सुभाष नीरव २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

बहुत खूब ! मजा आ गया इस होली में । "साहित्य शिल्पी" के सभी पाठकों, रचनाकारों और शुभ चिन्तकों को होली की ढ़ेरों शुभकामनाएं !

अभिषेक सागर २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

योगेश जी अब आपसे मिलना पडेगा :) हमारा लाईव टेलीकास्ट दिखा दिया गया।

रूपसिंह चन्देल २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

प्रिय योगेश जी,

सबसे पहले मेरी ओर से आप और साहित्य- शिल्पी परिवार के लिए होली की शुभ कामनाएं स्वीकार करें. कार्टून्स के माध्यम से होली खेलने का आपके नायाब तरीके ने विमोहित कर दिया. हाथी में हम तीन ----- क्या बात है. आभार!

चन्देल

Yuva २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

बहुत खूब...आनंद आ गया. अगली होली पर किस-किस पर आपकी कार्टूनी पिचकारी चलेगी, अभी से बता दें तो मेहरबानी !!

अविनाश वाचस्पति २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  
यह पोस्टलेखक के द्वारा निकाल दी गई है.
रितु रंजन २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

साहित्य शिल्पी पर मनायी गयी इस होली का मजा आ गया। बधाई सभी को।

neeshoo २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

holi per rang ki jarurat nahi .

PRAN SHARMA २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

YUN TO SABHEE CARTOONS KHOOB HAIN
LEKIN YOGENDRA MAUDGIL,SUNITA
CHOTIA AUR RAJIV TANEJA KE CARTOON
KEE BAAT HEE KYAA HAI! GIRTE-
SAMBHAALTE HUE BHEE MUSKARAA RAHE
HAIN .BAHUT KHOOB AUR LAAJAWAAB !!

Raviratlami २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

मेरी कहानी कार्टून तो लाजवाब है!
वैसे, सभी कार्टून एक से बढ़कर एक, मजेदार हैं.

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

...... अद्भुत ....... योगेश जी

सुधी शिल्पी मित्रो !

होली के रंग और उमंग भरे पर्व की हार्दिक शुभकामना !

रंग और भंग दोनों में ध्वनि साम्य अवश्य है किन्तु आज के दिन भंग के कारण रंग में भंग नहीं होता है अपितु उमंग का साथ मिलता है. सो योगेश जी सहित सभी माननीय और ज्ञाननीय शिल्पी मित्रों को उमंग भरे स्नेह और अभिवादन के साथ सभी कार्टून पर स्मित भरी प्रतिक्रिया यही है कि

नीम सभी पीले हुए त्यागे कड़वे ढंग
सेमल पत्ते त्याग के है मौसम से दंग
टेसू कानन देख के पीपल हो गया नंग
बौराई सब मंजरी होली के हुड़दंग
..............
गोरी सब पूछे लगीं क्यों टूटे सखि अंग

पुनः सप्रेम शुभकामना

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

Really Nice. Holi hai..

Alok Kataria

नंदन २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

साहित्य शिल्पियों की अच्छी चुटकी ली है आपनें। सभी कार्टूंन अच्छे लगे। वैसे योगेश जी अपनी बैठक में हमें छोड दिया आपनें। एक छांछ की हमारी ग्लास भी लगा लेते :) चलिये चीयर्स।

तेजेन्द्र शर्मा २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

Bhai Yogesh jee ne apnee holi kee phuhaar London tak pahuncha dee aur mujhey bahut achha laga - Bhai Suraj aur Roop jee bura naa maaney - Holi hai - JAB HAATHI NIKAL GYA TO POOCHHNUMA KAHANI MEREY HAATH MEIN AA GAYEE.. HA AHA HA AHAHAHAHA....

Aaj Bukhar hai magar ye cartoon dekh kar tabeeyat first class ho gayee.

Aap Sab ko Holi Mubarak

Tejendra Sharma
Katha UK, London

अनूप शुक्ल २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

मजेदार कार्टून हैं जी!

संगीता पुरी २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

होली की ढेरो शुभकामनाएं ...

श्रद्धा जैन २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

hi hi hi ha ha ha ha
baap re hansi ruk hi nahi rahi

Holi par ye special ank bahut majedaar raha

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

होली कैसी हो..ली , जैसी भी हो..ली - हैप्पी होली !!!

होली की शुभकामनाओं सहित!!!

प्राइमरी का मास्टर
फतेहपुर

अजय यादव २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

बहुत अच्छे योगेश जी! मजा आ गया। पर कई भाई लोगों को छोड़ दिया आपने। ये नाइंसाफी ठीक नहीं।

ANJANI २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

kartoon abhivyakti ka dil ki bharas nikalne ka ek anootha madhyam hai
iske sahare sahitya shilpi ke kartaaon ki antarik manodasha batlakar apne aaj ki holi me ek naya rang bhar diya

योगेन्द्र मौदगिल २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

वाह जी ,योगेश जी...
कमाल कर दिया भाई..
अद्भुत संयोजन..
बधाई..

Anil Pusadkar २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

बहुत बढिया। होली की बधाई।

पवन *चंदन* २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

ये योगेन्‍द्र जी कितने खुश हैं इनके मन को देखो कितना प्रफुल्लित हो रहा है

हमें तो ईर्ष्‍या हो रही है। लगता है योगेश कमदर्शी को कलमकड़ी लगवानी पड़ेगी।
हमें नहीं पता था राजीव तनेजा तने ही रहेंगे योगेन्‍द्र ही का मुंह काला करना चाहते हैं क्‍या

और सुनीता जी आप को ये ही मिले...100 ग्राम के
अविनाश जी को क्‍या पता था कि नुक्‍कड पर कटोरा लेकर बैठना पड़ेगा। क्‍या किस्‍मत है।

पता नहीं प्राण जी को प्राण बचे या नहीं


चलिए भारतीय रेल सेवा का समय हो रहा है, बाकी फिर कभी

दर्पण साह 'दर्शन' २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

he he :)

sab ek se ek cartoon.....
....superb!!!

kitna accha blog hai ye...

sahity shilpi ko to apne blog main lagana hi padega....

सतपाल २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

bura na mano ...
holi hai !!

मल्लिका शेरावत २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

चंदन भाई
आपकी प्रतिक्रिया मुझे बहुत भाई
जल्‍दी से ही
कल मकड़ी क्‍यों
आज ही मकड़ा क्‍यों नहीं भिजवा रहे हो
समदर्शी जी को तो वो भी तितली नजर आएगी
और उनके चश्‍मे पर वाइपर चलाएगी।

निधि अग्रवाल २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

एक से बढ कर एक।

रचना सागर २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

अच्छी होली खेली गयी है। सभी कार्टून अच्छे हैं।

मोहिन्दर कुमार २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

भईये.. होली हर साल आती है.. अबकी आपकी थी अगली हमारी होगी :)

सीमा सचदेव २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

साहित्यकारों पर होली के नए रंग देखकर मजा आ गया |

विनय २३ नवम्बर २००९ ७:०० PM  

धमाकेदार है

sanju २३ नवम्बर २००९ ७:०१ PM  

मज़ेदार

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