........साहित्य शिल्पी एक पूर्ण वेबसाईट में परिवर्तित हो चूका है। अब हमारी रचनाये यहाँ पढ़े... - www.sahityashilpi.in तथा कृपया हमें अपनी प्रतिक्रिया एवं सुझावों से अवश्य अवगत करायें जिससे हम आवश्यक सुधार कर सकें.....

साहित्यशिल्पी पर नवीनतम प्रस्तुतियाँ

लोड हो रहा है. . .

रविवार, २१ जून २००९

लो केला खाओ [सप्ताह का कार्टून] - अभिषेक तिवारी



रचनाकार परिचय:-

अभिषेक तिवारी "कार्टूनिष्ट" ने चम्बल के एक स्वाभिमानी इलाके भिंड (मध्य प्रदेश्) में जन्म पाया। पिछले २३ सालों से कार्टूनिंग कर रहे हैं। ग्वालियर, इंदौर, लखनऊ के बाद पिछले एक दशक से जयपुर में राजस्थान पत्रिका से जुड़ कर आम आदमी के दुःख-दर्द को समझने की और उस पीड़ा को कार्टूनों के माध्यम से साँझा करने की कोशिश जारी है.....

9 comments:

राजाभाई कौशिक २३ नवम्बर २००९ ७:१२ PM  

चलो! ठेला हटाओ ....
लो केला खाओ..
अच्छा रिश्वत खिलाते हो..!
केला ही खिलाना हैं तो
घर पहुचाना रोजाना
फिर ही ठेला लगाना
कभि कभि अनार ले आना
ऊभ भी तो जायेंगे रोजाना
यहि बात अपने साथियों समझाना
फिर न पडे पछताना

अविनाश वाचस्पति २३ नवम्बर २००९ ७:१२ PM  

रिश्‍वत का फल
न जाए निष्‍फल

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi २३ नवम्बर २००९ ७:१२ PM  

मुझे चेख़व की कहानी गिरगिट याद आ गई।

राजीव तनेजा २३ नवम्बर २००९ ७:१२ PM  

शुक्र है कि केला अकेला नहीं था वर्ना ठेले को तो हटना ही पड़ता...

दो लाईनें पेश हैँ

रेल पटरियों सी लम्बी अजगर मानिन्द लपलपाती जेबें

डस डस बस यही कहती हैँ...और देवें और देवें

Udan Tashtari २३ नवम्बर २००९ ७:१२ PM  

हा हा!!

nitesh २३ नवम्बर २००९ ७:१२ PM  

हा हा!!

नितिन व्यास २३ नवम्बर २००९ ७:१२ PM  

बढ़िया!

नंदन २३ नवम्बर २००९ ७:१२ PM  

बेहतरीन कार्टून।

मोहिन्दर कुमार २३ नवम्बर २००९ ७:१२ PM  

बहुत खूब

न बिन तेल पानी
आती गाडी में रवानी..

रिश्वत लेते पकडे जाओ
रिश्वत देके छूट जाओ

नवीनतम काव्य प्रस्तुतियाँ

लोड हो रहा है. . .

नवीनतम कथा प्रस्तुतियाँ

लोड हो रहा है. . .

अन्य नवीनतम प्रस्तुतियाँ

लोड हो रहा है. . .

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP