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गुरुवार, १ जनवरी २००९

नूतन वर्ष आया है! [गीत; स्वर व संगीत - आदित्य विक्रम] - महेन्द्र भटनागर


सभी पाठकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! इस सुअवसर पर आज प्रस्तुत है महेन्द्र भटनागर जी का एक गीत जिसे स्वर और संगीत दिया है; उनके पुत्र कुमार आदित्य विक्रम ने. नववर्ष का स्वागत करते इस गीत के बोल हैं:

नूतन वर्ष आया है!
अमन का; चैन का उपहार लाया है!

आतंक के माहौल से अब मुक्त होंगे हम,
ऐसा घना अब और छाएगा नहीं भ्रम
-तम,
नूतन वर्ष आया है!
मधुर बंधुत्व का विस्तार लाया है!

सौगन्ध है
— जन-जन सदा जाग्रत रहेगा अब,
संकल्प है
— रक्षित सदा भारत रहेगा अब,
नूतन वर्ष आया है!
सुरक्षा का सुदृढ़ आधार लाया है!

तो आइये सुनते हैं ये गीत!

19 comments:

ANJANI २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

आपकी कविता सुनी, आपकी कविता का जो सपना है वह पूरा हो हमारी यही शुभकामना है।

नूतन वर्ष आया है!
अमन का; चैन का उपहार लाया है!

नये साल की शुभकामना।

राजीव रंजन प्रसाद २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

महेन्द्र भटनागर जी एवं आदित्य जी को इस गीत के प्रस्तुतिकरण का आभार।

साहित्य शिल्पी परिवार तथा साहित्य शिल्पी के सभी पाठकों को नव वर्ष की शुभकामनायें।

***राजीव रंजन प्रसाद

"अर्श" २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

बहोत खूब है साहब नव वर्ष मुबारक हो मंगलकामना के साथ ..............

अर्श

सुनीता शानू २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

नववर्ष की आपको व पूरी साहित्य-शिल्पी की टीम को सपरिवार हार्दिक शुभकामनाऐं.

रितु रंजन २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

गीत का संदेश प्रतिफलित हो। नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।

अविनाश वाचस्पति २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

प्रसन्‍न रहें प्रसन्‍न रखें इस वर्ष भी ऐसे ही बंध कसें http://avinashvachaspati.blogspot.com/

नंदन २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

नयें वर्ष का अभिनंदन। महेन्द्र भटनागर जी नें बहुत अच्छा गीत लिखा है जिसे बहुत कर्णप्रिय आवाज आदित्य जी नें दी है। बधाई स्वीकार करें।

अविनाश वाचस्पति २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

प्रसन्‍न रहें प्रसन्‍न रखें इस वर्ष भी ऐसे ही बंध कसें http://avinashvachaspati.blogspot.com/

रचना सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

नये साल के स्वागत का यह अंदाज बहुत अच्छा लगा। सभी को बधाई नये साल की। यह साल नयी खुशिया ले कर आये।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

पूरी साहित्य-शिल्पी की टीम को नव वर्ष मँगलमय हो ~~
कविता का सपना पूरा हो
हमारी यही शुभकामना है।

अविनाश वाचस्पति २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

प्रसन्‍न रहें प्रसन्‍न रखें इस वर्ष भी ऐसे ही बंध कसें http://avinashvachaspati.blogspot.com/

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

HAPPY NEW YEAR

Alok Kataria

निधि २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

नव वर्ष पर सुन्दर गीत।

नव वर्ष की हार्दिक मंगलकामनायें।

अभिषेक सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

कविता में एक महान सपना है। बहुत अच्छी प्रस्तुति है, बधाई।
नये वर्ष की शुभकामना।

दृष्टिकोण २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

भटनागर जी का यह गीत बहुत बडा स्वप्न लिये है। नये वर्ष की शुभकामना।

अनुज २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

नये साल की हार्दिक शुभकामनायें। बहुत आनंददायक गीत है।

मोहिन्दर कुमार २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

रचना मे परिभाषित नव वर्ष की शुभकामनाओं के फ़लिभूत होने की कामना है

श्रद्धा जैन २३ नवम्बर २००९ ६:४९ PM  

नये वर्ष की शुभकामना।
Mahendra ji ki kavita mein likhe bhaav ne man ko bhaut prabhavit kiya

VPV २३ नवम्बर २००९ ६:५० PM  

Very good song.Congratulations to Dr Mahendra Bhatnagar for writing and to Aditya Vikram for singing and composing this wonderful song.
veena veepee

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