कुछ समय पूर्व साहित्य शिल्पी के हमारे कुछ साथियों ने सुप्रसिद्ध कवि डॉ० कुँअर बेचैन जी से उनके घर पर मुलाकात की और उनका साक्षात्कार लेने के दौरान उन्हें साहित्य शिल्पी से परिचित कराया। इस का विवरण हम अपनी पूर्वप्रकाशित रिपोर्ट में दे चुके हैं। मुलाकात के दौरान उस समय हमारे हर्ष का पारावार न रहा जब वे हमारे कार्य को देखते हुये हमें अपना रचनात्मक सहयोग देने को भी तैयार हो गये।

इस सिलसिले की शुरुआत करने के लिये हमने उनकी ही आवाज़ में एक गीत रिकार्ड किया जिसे हम आज आपको सुनवाने या यूँ कहें कि दिखाने जा रहे हैं। हमें विश्वास है कि आज नववर्ष पर हमारे नये शिल्पी और सम्माननीय कवि श्री कुँअर बेचैन जी का ये गीत आपको एक सुखद प्रेमानुभूति से सराबोर कर देगा।

गीत के बोल हैं:

नदी बोली समन्दर से, मैं तेरे पास आई हूँ।
मुझे भी गा मेरे शायर, मैं तेरी ही ही रुबाई हूँ।।

मुझे ऊँचाइयों का वो अकेलापन नहीं भाया;
लहर होते हुये भी तो मेरा मन न लहराया;
मुझे बाँधे रही ठंडे बरफ की रेशमी काया।
बड़ी मुश्किल से बन निर्झर, उतर पाई मैं धरती पर;
छुपा कर रख मुझे सागर, पसीने की कमाई हूँ।।

मुझे पत्थर कभी घाटियों के प्यार ने रोका;
कभी कलियों कभी फूलों भरे त्यौहार ने रोका;
मुझे कर्तव्य से ज़्यादा किसी अधिकार ने रोका।
मगर मैं रुक नहीं पाई, मैं तेरे घर चली आई;
मैं धड़कन हूँ मैं अँगड़ाई, तेरे दिल में समाई हूँ।।

पहन कर चाँद की नथनी, सितारों से भरा आँचल;
नये जल की नई बूँदें, नये घुँघरू नई पायल;
नया झूमर नई टिकुली, नई बिंदिया नया काजल।
पहन आई मैं हर गहना, कि तेरे साथ ही रहना;
लहर की चूड़ियाँ पहना, मैं पानी की कलाई हूँ।

तो आइये डॉ० कुँअर  बेचैन जी को गाते हुये देखते हैं और सुनते हैं ये गीत:



यदि धीमे कनेक्शन या किसी अन्य कारणवश आपको वीडियो देखने में दिक्कत हो तो आप इसका आडियो नीचे के प्लेयर से सुन भी सकते हैं:

24 comments:

  1. वीडियो को बफर होने में समय तो लगा लेकिन सुनने के बाद महसूस हुआ कि कविता पढने और सुनने में कितना अंतर है। डॉ. कुँवर बेचैन को नव वर्ष की शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  2. पंकज सक्सेना1 जनवरी 2009 को 1:32 pm

    सुनाने का अंदाज निराला है और पंक्तियाँ भी खूब हैं।

    पहन कर चाँद की नथनी, सितारों से भरा आँचल;
    नये जल की नई बूँदें, नये घुँघरू नई पायल;
    नया झूमर नई टिकुली, नई बिंदिया नया काजल।
    पहन आई मैं हर गहना, कि तेरे साथ ही रहना;
    लहर की चूड़ियाँ पहना, मैं पानी की कलाई हूँ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. Dr. Baichain is ultimate. No words to describe this poem.

    Alok Kataria

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छा गीत है, बहुत बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. झूम गये हम तो, क्या अंदाज है बेचैन साहब का - मुझे भी गा मेरे शायर, मैं तेरी ही ही रुबाई हूँ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. देखने के लिये लम्बी प्रतीक्षा लग रही है, वीडियो धीमे कम्यूटर नेटवर्क पर भी चल सकें, एसा कोई उपाय कीजिये। कुवर साहब का कोई जवाब नहीं है, मेरा पसंदीदा गीत आपने प्रस्तुत किया है।

    कभी कलियों कभी फूलों भरे त्यौहार ने रोका;
    मुझे कर्तव्य से ज़्यादा किसी अधिकार ने रोका।
    मगर मैं रुक नहीं पाई, मैं तेरे घर चली आई;
    मैं धड़कन हूँ मैं अँगड़ाई, तेरे दिल में समाई हूँ।।

    पहन आई मैं हर गहना, कि तेरे साथ ही रहना;
    लहर की चूड़ियाँ पहना, मैं पानी की कलाई हूँ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. राजीव जी इस साईट पर आ कर आँख खुल गयी। आपका अनुरोध स्वीकार है। इस पत्रिका का पाठक होना भी बडी बात होगी। जितनी मेहनत और जितनी उन्नत सामग्री आप लोग प्रस्तुत कर रहे हैं वह कमाल की बात है। आपको कहने की जरूरत नहीं होगी मैं नीयमित पाठक हूँ अब इस पत्रिका का। कुअर बेचैन को कई मंकों पर सुना है और वे बेहतरीन कवि और शायर हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  8. साक्षात्कार के लिये जाते समय मन में बहुत से भाव थे परन्तु कुंवर जी से मिल कर मन प्रसन्नता से भर गया. जितना समय उन्होंने साहित्य शिल्पी को दिया और जिस स्नेह और आत्मियता से वह हमसे मिले व अविस्मर्णिय है. उनसे वार्तालाप करना और उनका गीत सुनना हमेशा याद रहेगा.

    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  9. कई बार सुनने की कोशिश कर चुकी थी लेकिन वीडियो में दिक्कत हो रही थी। ऑडियो लगा कर आपने अच्छा काम किया है। अच्छा लगा कुवर बैचैन को सुनना।

    उत्तर देंहटाएं
  10. डॉ. कुँअर बेचैन जी को सुनना अपने आप में एक स्वर्गिक अनुभव है. उनकी आवाज के तरन्नुम ने कविता की खूबसूरती को और भी बढ़ा दिया है. सुंदर कविता सुनाने का आभार!

    साहित्य शिल्पी पर आपकी अन्य रचनाओं की भी प्रतीक्षा रहेगी!

    उत्तर देंहटाएं
  11. डॉ. कुँअर बेचैन निस्संदेह वर्तमान दौर के सर्वश्रेष्ठ कवि और शायरों में से एक हैं. प्रेम और संवेदना के बारीक धागों से बुनी गई उनकी रचनायें किसी का भी मन मोह सकतीं हैं. काव्य-पाठ की उनकी शैली भी उन्हें लोकप्रिय बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है.
    प्रस्तुत वीडियो में ये दोनों ही बातें हैं जो इसे संग्रहणीय बना देतीं हैं. साहित्य शिल्पी परिवार में डॉ. कुँअर बेचैन जी का हार्दिक स्वागत और इस सुंदर रचना के लिये बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  12. कई कोशिशों के बावजूद विडियो नहीं देख पाया। लेकिन ओडियो सुनकर दिल को सुकून मिला। लीजेंड्स पर कोई टिप्पणी नहीं करते इसलिए "बेचैन" साहब की लेखनी के बारे में कुछ कह नहीं सकता।

    साहित्य-शिल्पी की पूरी टीम को बधाई।

    -तन्हा
    वैसे हाँ, सभी मित्रों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  13. कुँअर बेचैन जी को सुनना बहुत अच्छा लगा. साहित्य शिल्पी को इस प्रस्तुति के लिये आभार और बेचैन जी को बधाई एक सुंदर रचना के लिये!

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुंदर मानवीकरण! बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  15. Dr. kunavar bachin ji ko padna aur sunna bhaut achha laga inhe padna aur in jaise mahan kavi se milna sobhgya ki baat hai aap inse mil sake aur aapke dawara inse chhoti si mulakaat bahut sukhad rahi

    उत्तर देंहटाएं
  16. कुँअर बेचैन जी की यह कविता अनेको बार सुनी और मैं तनहा जी की इस बात से सहमत हूँ कि लीजेंड्स पर क्या टिप्पणी की जाये, जिन्हे सुन पाना ही सौभाग्य है।

    उत्तर देंहटाएं
  17. प्रस्तुत ' नदी और सागर का प्रेम गीत बहुत ही सुंदर रचना है.
    गीत में --
    'अपनी उलझनों के हल मिले..
    'उसके खारेपन में भी कोई कशिश होगी'.....बहुत ही खुबसूरत है.
    कविवर के स्वर में उनकी यह रचना सुनना एक सुखद अनुभव रहा.
    डॉ. कुँवर बेचैन जी और साहित्य शिल्पी के परिवार के सभी सदस्यों को नव वर्ष की शुभकामनायें।
    आभार सहित.

    उत्तर देंहटाएं
  18. sahitya shilpi team ko is prayaas ke liye bahut bahut badhai ..

    dr. kunwar baichen ji ko sunna apne aap mein ek naya experiment hai ..

    aapka
    vijay
    http://poemsofvijay.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत अच्छा गीत है। कवि से सुन कर तो और भी सुंदर लगा।

    उत्तर देंहटाएं
  20. कवि डॉ० कुँअर बेचैन जी का जबाव नहीं उनका लिखा हर गीत हिंदी साहित्य की अमूल्य निधी हैं

    उत्तर देंहटाएं
  21. कवि डॉ० कुँअर बेचैन जी का जबाव नहीं उनका लिखा हर गीत हिंदी साहित्य की अमूल्य निधी हैं

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget