रचनाकार परिचय:-

आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं तथा अंतर्जाल के साथ-साथ पिछले कई वर्षों से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से स्तंभ लिख रहे हैं।
मीडिया के नये छात्रों-छात्राओं को पुरानी बातें समझाना मुश्किल है। पुरानी फिल्म पाकीजा का एक हिट गीत-इन्ही लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा-समझाने की कोशिश कर रहा था।

एक जीन्स टाप धारी बालिका ने पूछा-ये दुपट्टा मीन्स व्हाट।

मैंने समझाने की कोशिश की-दुपट्टा मतलब यह भी पहनने का आइटम होता है। मतलब इसे पहना भी जा सकता है।

इंटरेस्टिंग, जिन्होने यह दुपट्टा गाना गाने वाली से लिया, उन्हे दुपट्टे की क्या जरुरत आ पड़ी। मतलब क्या वो दुपट्टे की दुकान चलाते थे। बाई दि वे अब तो कोई दुकान दुपट्टे की नहीं दीखती। अगर दुकान नहीं चलाते थे, तो उन्होने दुपट्टा क्या करने के लिए लिया-बालिका आगे पूछ रही है।


बात को समझने की कोशिश करो। गायिका गा रही है कि इन्ही लोगों ने ले इसका दुपट्टा ले लिया। गाने में आगे बताया गया है कि दुपट्टा लेने वालों में पुलिस के सिपहिया लोग भी थे-मैंने गाने को क्लेरिफाई करने की कोशिश की।

व्हाट पहले के पुलिस वाले दुपट्टे की दुकान चलाने के लिए दुपट्टे लेते थे क्या। हमसे तो पुलिस वाले सौ का नोट लेते है, अगर ट्रेफिक लाइट जंप हो जाये तो। अच्छा ये बताइए दुपट्टा सौ रुपये से सस्ता पड़ता है या महंगा। अगर दुपट्टा सस्ता हो, तो वही दे देंगे। पुलिस वालों को एकाध हफ्ते में देना ही पड़ता है-बालिका ने बहुत मौलिक प्रश्न रखा है।

बात सौ के नोट की नहीं है। बात दुपट्टे की है, तुम गायिका के दर्द को समझो कि लोगों ने उसका दुपट्टा ले लिया-मैंने गीत के सौंदर्यशास्त्र में घुसने की कोशिश की।

अगर दुपट्टा सस्ता है, तो दर्द काहे का। और अगर महंगा था, तो फिर दिया क्यों, सौ का नोट दे देती। हम भी तो देते हैं। दिन दहाड़े देते हैं-बालिका एकदम तार्किक सवाल पूछ रही है।

ओफ्फो, तुम बात समझने की कोशिश नहीं कर रही हो। गायिका का मतलब यह है कि दुपट्टा उससे जबरदस्ती छीना गया है-मैंने उसे अपनी तरह से समझाने की कोशिश की।

अगर जबरदस्ती छीना गया है, तो फिर यह बात गाकर बताने की जरुरत क्या है। फिर तो ये बात किसी न्यूज चैनल को बतानी चाहिए। दुपट्टामार का कहर, दुपट्टे के दुख, दुपट्टेमार का खौफ-येसा कोई भी कार्यक्रम न्यूज चैनल दिन भर खेंच सकता था। ये तो बहुत हाट स्टोरी बनेगी सर-बालिका बहुत खुश होकर बता रही है।

पर मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि वह दुपट्टे का गीत समझ पायी है या नहीं।

6 comments:

  1. इस गीत में बहुत गहन और मार्मिक अर्थ छिपे हैं बन्धुवर। कभी लिखूँगा।
    लोकगीतों सी शैली लिए यह गीत बहुत कुछ अनकहा कह जाता है।

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  2. हास्य और व्यंग्य का बहुत बढिया मिश्रण...

    बधाई स्वीकार करें

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  3. हेहेहेहेहे
    मजेदार लगा


    अवनीश तिवारी

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  4. अलोक जी वह दुपट्टे का मतलब समझी या नही ..पर आप ने अपना फर्ज तो पूरी तरह निभाने की कोशिश की ही...:))

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  5. संकेतात्मक हास्य व्यंग्य व मर्म का मिश्रण है यह लेख

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