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शनिवार, १५ नवम्बर २००८

प्रेमी बनाम कुत्ते [व्यंग्य] - आलोक पुराणिक

रेडियो से खाकसार को दो काम मिले। एक -कुत्तों के कार्यक्रम पर स्क्रिप्ट लिखनी थी और काम नंबर दो में प्रेमियों पर आधारित एक कार्यक्रम की स्क्रिप्ट भी लिखनी थी। दोनों स्क्रिप्टें अलग-अलग लिखकर दे दी गयीं। किसी बहुत बड़े एक्सपर्ट की कृपा से दोनों मिल गयी। और जो प्रोग्राम प्रसारित हुआ वह इस प्रकार है-
  • कुत्ते कई प्रकार के होते हैं।
  • प्रेमियों को पहले पहचानिये कि उनका प्रकार क्या है।
  • अलग-अलग प्रकार के अलग-अलग बिहैव करते हैं।
  • कुछ पूंछ हिलाते हुई पीछे पड़ जाते हैं।
  • कुछ फोकटी का भाव खाते हैं। 
  • कुछ पहली ही बार में पैर तक चाटने लगते हैं।
  • उन्हे ज्यादा मुंह नहीं लगाना चाहिए, वरना उनमें शालीनता खत्म हो जाती है। मौके-बेमौके बेवजह लिफ्ट लेने लगते हैं।
  • बल्कि मौका देखकर उन्हे किसी वजह या बेवजह डांटना चाहिए।
  • कभी -कभार उनके पिछवाड़े दो चार डंडी जमाने में भी हर्ज नहीं है।
  • अगर आपको उससे कुछ ज्यादा ही प्रेम है, तो थोड़ी उदारता दिखायें और पिछवाड़े दो-चार चप्पलें हल्के से ठोंक कर ही काम चला लें।
  • इससे उनका व्यवहार दुरुस्त बना रहता है।
  • और वे अनावश्यक लिबर्टी नहीं लेते।
  • कुछ महीन तबीयत के होते हैं, बड़े-बड़े बाल होते हैं इनके।
  • इनमें से कुछ को देखकर लगता है कि जैसे क्लासिकल म्यूजिक के शौकीन हैं या आधुनिक कविता के मुरीद हैं।
  • ये महीन थोड़ी सी भी मजबूत एंटी पार्टी को देखते ही मैदान छोड़ भागते हैं, दुम दबाते हुए।
  • ऐसे वाले किसी काम के नहीं होते, बस शो-दारी के होते हैं।
  • कुछ चीखते तक क्लासिकल म्यूजिक में हैं, पर जैसा कि बताया कि ये किसी काम के नहीं ना होते।
  • इन्हे कभी-कभार अपने साथ रख लेने से कोई नुकसान नहीं है। पर इन्हे लांग-टर्म लिफ्ट नहीं दी जा सकती।
  • इनमें कुछ परमानेंट लव मोड में रहते हैं, एकदमै तैयार, तत्पर टाइप।
  • अपोजिट जेंडर को देखते ही पीछे हो लेते हैं। ना मौका देखते ना मुकाम। मौसम, बेमौसम कुछ नहीं सोचना विचारना।
  • अपोजिट जेंडर को ये हमेशा यूं ताकते हैं, मानो भारी बीमार हों, कुछ अटैंशन वसूलना चाहते हों।
  • ऐसे बहुत शर्मसार कराते हैं।
  • उन्हे अपने मित्रों से दूर रखें।
  • और फाइनली, अपने बिस्तर से उन्हे दूर रखना चाहिए, वरना बहुत समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

*****

18 comments:

अनुज २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

वाह वाह :)

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

Nice satire.

Alok Kataria

नंदन २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

बेहतरीन पूरा पढने में हँससे हँसते बुरा हाल हो गया। व्यंग्य और हास्य की बढिया खिचडी।

अभिषेक सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

बहुत अच्छा व्यंग्य है। मजा आ गया।

रितु रंजन २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

प्रेमी और कुत्ते दोनों की गति एक ही है। अच्छा हास्य व्यंग्यपूर्ण आलेख। आलोक पुराणिक वैसे भी इस विधा के वरदहस्त हैं।

शोभा २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

हा हा हा । आलोक जी ने तो कमाल ही कर दिया। हँसते-हँसते बुरा हाल हो गया। बहुत बढ़िया। इस तरह के लख अधिक लिखे जाने चाहिएँ। जीवन में हास्य से सरसता बनी रहती है। बधाई स्वीकारें।

kkyadav २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

Alok Puranik ki ek aur anupam prastuti...Badhai.

गीता पंडित (शमा) २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

व्यंग्य और हास्य ...
वाह .....वाह....

बधाई ..

रचना सागर २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

बेहतरीन प्रस्तुति। हँसे बिना नहीं रहा जा सका।

राजीव तनेजा २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

बढिया कनफ्यूज़न....

जितेन्द्र कुमार २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

व्यंग्य हो तो ऎसा..... आनन्द आ गया। कुत्ते और प्रेमी दोनो को समझ्ने का नया तरीका..

पंकज सक्सेना २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

प्रेमी की गति कुत्ता जाने,
कुत्ते की गति प्रेमी

makrand २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

bahut accha vyang
aap to kamal ka dimag rakhte he
lekhi pr sarwasti virjman he
regards

Vijay Kumar Sappatti २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

bahut badiya ,

subhah subhah achi shuruvat ho gayi .

darasal premi aur kutton ka ye mix up itna acha tha ki bus poocho mat.

regards

vijay

समयचक्र - महेद्र मिश्रा २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

मजा आ गया..बहुत अच्छा व्यंग्य है ।

मोहिन्दर कुमार २३ नवम्बर २००९ ६:४२ PM  

आमलेट बनाने और योगा का मिश्रण करते देखा था एक फ़िल्म में अमिताभ जी को... उसी तरज पर सुन्दर व्यंग्य..

aryan २३ नवम्बर २००९ ७:२५ PM  

teri mgali k itne lagaye chakkar
ikattar bahattar tihattar
tu to humara na hua jalim
par hum kutton ke sardar ho gaye

aryan २३ नवम्बर २००९ ७:२५ PM  

teri gali k itne lagaye chakkar
ikattar bahattar tihattar
k kutte b humare yaar ho gaye
tu to humara na hua jalim
par hum kutton ke sardar ho gaye

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