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गुरुवार, २६ फरवरी २००९

है ये रंग बिरंगे फूल [बाल-कविता] - रचना सागर

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रचनाकार परिचय:-

रचना सागर रचना सागर का जन्म 25 दिसम्बर 1982 को बिहार के छ्परा नामक छोटे से कस्बे के एक छोटे से व्यवसायिक परिवार मे हुआ। इनकी शिक्षा-दीक्षा भी वहीं हुई। आरंभ से ही इन्हे साहित्य मे रुची थी। आप अंतर्जाल पर विशेष रूप से बाल साहित्य सर्जन में सक्रिय हैं।

फूल फूल प्यारे फूल
कितने न्यारे प्यारे फूल
अपने आँगन में लगाओ
अपने बागों मे लगाओ
नन्हे प्यारे सुन्दर फूल
लाल, गुलाबी, नीले, पीले
है ये रंग बिरंगे फूल

कितने नाजुक कितने कोमल
है ये एक डाल के फूल
काँटों में भी हँसते फूल
फूल फूल प्यारे फूल
कितने न्यारे प्यारे फूल

14 comments:

अभिषेक सागर २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

सुन्दर रचना।

अनन्या २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

बाल कविता लिखना बडा काम है। जारी रखें। अच्छी कविता है, फूलों सी महकती हुई।

बेनामी २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

Nice poem. Thanks.

Alok Kataria

अनिल कुमार २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

नन्हे मुन्नों की मनभावन कविता है।

निधि अग्रवाल २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

बहुत अच्छी बाल कविता है।

कितने नाजुक कितने कोमल
है ये एक डाल के फूल
काँटों में भी हँसते फूल
फूल फूल प्यारे फूल
कितने न्यारे प्यारे फूल

शोभा २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

कितने नाजुक कितने कोमल
है ये एक डाल के फूल
काँटों में भी हँसते फूल
फूल फूल प्यारे फूल
कितने न्यारे प्यारे फूल
बहुत सुन्दर लिखा है। बधाई।

अनिल कान्त : २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

सचमुच बहुत ही खूबसूरत ...

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

पंकज सक्सेना २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

बढियाँ है।

sanju २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

सुन्दर रचना बधाई।

संगीता पुरी २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

अच्‍छी है...

अतुल्य २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

बाल-साहित्य महज़ कहानी या कविता लिखना ही नहीं है अपितु हमारी भावी पीढ़ी में सुरुचि और संस्कार जगाना भी है। बाल-साहित्य सृजन रचनाकार के लिये प्राय: कठिन भी होता है क्योंकि उसे बाल-मन के स्तर पर जाकर रचना करनी होती है। अत: बाल-साहित्य लिखने वाले सभी रचनाकार विशेष सम्मान के हकदार हैं।
एक अच्छे बाल-गीत के लिये रचना जी को बधाई!

राजीव तनेजा २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

आप बाल साहित्य के लिए बहुत बढिया काम कर रही हैँ...

बधाई स्वीकार करें

Udayesh Ravi २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

rachna jee kee bal kavita "Kitne sunder phool" achchhi hai. Sadhi huee aur chhoti bhi. Mahanta iss baat mein hai kee bachchon ke liye likhna tedhee kheer hai. Chhote aur sukomal, sadharan shabdon ki mala banana sadharan baat toh nahee hai.

Chaliye agli rachna se jaldi hee parichay karayein.

मोहिन्दर कुमार २३ नवम्बर २००९ ६:५८ PM  

सार्थक संदेश देती सुन्दर बाल सुलभ रचना के लिये बधाई

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