मोहन राणा समकालीन कवियों में उँचा स्थान रखते हैं। आपके काव्य संग्रह "धूप के अंधेरे में" को 10 वें पद्मानंद अंतर्राष्ट्रीय साहित्य सम्मान के लिये घोषित किया गया है। इस अवसर पर साहित्य शिल्पी नें जब श्री मोहन राणा से प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने कहा - "सम्मान कविता का होता है"। साहित्य शिल्पी परिवार आपकी इस विनम्रता को नमन करता है और इस उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनायें देता है। 

मोहन राणा जी नें अपने काव्य संग्रह "धूप के अंधेरे में" से चुन कर कुछ रचनायें साहित्य शिल्पी के पाठकों के लिये प्रेषित की हैं। प्रस्तुत हैं:- 
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पतझर में

पतझर में गिरते हुए पत्ते एक पल रुकते हवा में
एक झलक फीके नीले आकाश की गिरने से पहले
वे किसके हृदय हैं
किसकी आशा
झुककर मैं उठाता
और वे गिरते लगातार

14.10.2003

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रचनाकार परिचय:-


मोहन राणा का जन्म 1964 में दिल्ली में हुआ. वे दिल्ली विश्वविद्यालय से मानविकी में स्नातक हैं, आजकल ब्रिटेन के बाथ शहर के निवासी हैं। उनके 6 कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं.

जगह(1994),जैसे जनम कोई दरवाजा (1997), सुबह की डाक (2002), इस छोर पर (2003), पत्थर हो जाएगी नदी (2007),धूप के अँधेरे में (2008). एक द्विभाषी संग्रह With Eyes Closed का प्रकाशन 2008 में हुआ है.

कवि-आलोचक नंदकिशोर आचार्य के अनुसार - हिंदी कविता की नई पीढ़ी में मोहन राणा की कविता अपने उल्लेखनीय वैशिष्टय के कारण अलग से पहचानी जाती रही है, क्योंकि उसे किसी खाते में खतियाना संभव नहीं लगता. यह कविता यदि किसी विचारात्मक खांचे में नहीं अँटती तो इसका यह अर्थ नहीं लिया जाना चाहिए कि मोहन राणा की कविता विचार से परहेज करती है – बल्कि वह यह जानती है कि कविता में विचार करने और कविता के विचार करने में क्या फर्क है. मोहन राणा के लिए काव्य रचना की प्रक्रिया अपने में एक स्वायत्त विचार प्रक्रिया भी है.

कोई बात

धूपघड़ी में सूरज
उतरा
कि दिखा
धूपघड़ी में अँधेरा

धरती ना घूमती तो होता कैसे
दिन पूरा इस घड़ी का

आना ही था यहाँ
जानने
बेकार गिनना समय को
रोशनी और छायाओं में
बस गिनता हूँ अपने आप को

जब तक याद रहती है
कोई बात भूलने के लिए

17.9.2007

*****

अर्थ शब्दों में नहीं तुम्हारे भीतर है

मैं बारिश में शब्दों को सुखाता हूँ
और एक दिन उनकी सफ़ेदी ही बचती है
जगमगाता है बरामदा शून्यता से
फिर मैं उन्हें भीतर ले आता हूँ

वे गिरे हुए छिटके हुए क़तरे जीवन के
उन्हें चुन जोड़ बनाता कोई अनुभव
जिसका कोई अर्थ नहीं बनता
बिना कोई कारण पतझर उनमें प्रकट होता
बाग़ की सीमाओं से टकराता
कोई बरसता बादल,
दो किनारों को रोकता कोई पुल उसमें
आता जैसे कुछ कहने,
अक्सर इस रास्ते पर कम ही लोग दिखते हैं
यह किसी नक़्शे में नहीं है
कहीं जाने के लिए नहीं यह रास्ता,
बस जैसे चलते-चलते कुछ उठा कर साथ लेते ही
बन पड़ती कोई दिशा,
जैसे गिरे हुए पत्ते को उठा कर
कि उसके गिरने से जनमता कोई बीज कहीं

7.11.2005

*****

डरौआ

समय के बिना भी
मैं जी लूँगा समय निकालकर कहीं से
धूप के अँधेरे में

स्वागत करूँगा समयहीन ऊसर प्रदेशों में विपत्तियों के अंधड़ों का
इस बार भी,
कोई और नहीं आता उसके अलावा इस ओर

25.9.2007

*****

पानी का चेहरा
चिमनी में करती रही बातें
हवा कल सारी रात
जंगलों की कहानियाँ
पहाड़ों की यातना
समुंदरों का सीत्कार
सो रही और कहीं जागती दुनिया के दुस्वप्न
उसके अल्पविरामों के बीच
झरती बरसों पहले बुझ चुके अंगारों की राख,
चुपचाप
नींद में भी
सुनता रहा अपने आप को समेटता
जूझता रहा उसकी उमंग से,
मैं अँधेरे में पानी का चेहरा था
पेड़ों और दीवारों पर बहता

2.2.2002

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18 comments:

  1. सभी कवितायें असाधारण हैं। मोहन राणा जी को पद्मानंद साहित्य सम्मान के लिये बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. नींद में भी
    सुनता रहा अपने आप को समेटता
    जूझता रहा उसकी उमंग से,
    मैं अँधेरे में पानी का चेहरा था
    पेड़ों और दीवारों पर बहता

    प्रत्येक प्रस्तुत रचना बताती है कि मोहन राणा कविता का एक बडा नाम क्यों हैं। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  3. मोहन राणा जी को साहित्य शिल्पी पर पडःअना अच्छा लगा। सभी कवितायें प्रभावित करने वाली हैं। म्फन जी को सम्मान की बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  4. Nice Poems. Thanks.

    Alok Kataria

    उत्तर देंहटाएं
  5. आस पास के सहज से दिखने वाले दृश्य मोहन राणा जी की कविताओं में बिम्ब बने हैं। पतझर, धूप पहाड समंदर पानी कविता को पेंटिंग की शक्ल दे रहे हैं। मोहन जी की कविता पढी जाने के साथ साथ देखी और महसूस भी की जा सकती है।


    मोहन राणा जी को 10वे पद्मानंद साहित्य सम्मान की बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  6. सभी कवितायें अच्छी लगीं खास कर - पानी का चेहरा।

    उत्तर देंहटाएं
  7. mohan ji ,aapko meri dil se badhai .. aapki kavitayen subah bhi padi ..aur abhi bhi padhi , dil nahi bhara ..man kahin kahin ud jaata hai .. aapki kavita padhte samay yun lagta hai ki koi chitr ban raha hai man ke aakash me ...

    aapko aur sahitya shilpi ko dil se badhai ..

    vijay

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत अच्छी कवितायें, बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  9. साहित्य शिल्पी का स्तर निरंतर बढता जा रहा है। मोहन राणा जी की कविताओं को पढ कर सुखद अनुभूति हुई। मेरा दुर्भाग्य था कि मैने अब तक उन्हे नहीं पढा था।

    उत्तर देंहटाएं
  10. पंकज सक्सेना28 मई 2009 को 2:11 pm

    राणा जी को बधाई। सभी रचनायें अच्छी लगी।

    उत्तर देंहटाएं
  11. भाई राजीव जी

    मोहन राणा कि कविताएं भारत की मुख्यधारा की कविता या विश्व की आधुनिक कविता का मुक़ाबला करने में सक्षम हैं। वे पुराने बिम्बों का इस्तेमाल न करके अपने लिये नये आधुनिक बिम्बों का निर्माण करते हैं।

    साहित्यशिल्पी ने कथा यू.के. के सम्मानित साहित्यकारों को जो विशेष महत्व देने का बीड़ा उठाया है मैं हृदय से आपका आभारी हूं।

    आपकी कविता भी पढ़ी। बहुत अच्छे विषय को ख़ूबसूरत ढंग से पेश किया है आपने। आपकी युवा पीढ़ी इसी तरह हिन्दी कविता को नये बिम्ब और नया मुहावरा देती रहे - यह मेरी कामना है।

    तेजेन्द्र शर्मा
    महासचिव - कथा यू.के.

    उत्तर देंहटाएं
  12. तेजेन्द्र जी की बात सही है मोहन राणा जी के बिम्बों में ताजगी है। कविताओं का आनंद आया।

    उत्तर देंहटाएं
  13. आम कविताओं से हट कर अनूठे बिम्ब व भाव लिये कवितायें.

    उत्तर देंहटाएं
  14. सम्मान कविता का होता है कह कर मोहन राणा जी नें सचमुच विनम्रता का परिचय दिया है। उनकी कवितायें प्रभावित करने वाली हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  15. kavitaayen nahi jadibootiyaan thi padhte hi oorja ki ek lahar mere jahen me daud gayi.....

    उत्तर देंहटाएं
  16. Mohan Ranaji, aapko PADMANAND SAHITYA SAMMAN ki bahut bahut badhai. aapki kavitaaeiN sach mein samvedansheelta ke dharatal per kharee utaratee hain. saccha kavi wahi hai jo dil ke marm ko sparsh kare aur ye tatva aapki kavitaaoN mein hai.

    shaityashilpi ki team ko bahut bahut aabhar ki wey itnee sakriyata se hindi ke prasaar mein yogdaan de rahe hain.

    उत्तर देंहटाएं
  17. मोहन राणा जी को
    उनकी कविताओं में
    विचारों की विशालता
    और अनूठे नए बिम्‍बों के
    अद्भुत मनभावन प्रस्‍तुतीकरण
    के लिए बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

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