दुष्ट आदमी.. [हितोपदेश की कहानिकों का काव्यरूप - स्थायी स्तंभ] - सीमा सचदेव
एक कौआ और एक थी बुलबुल
घर था उनका प्यारा जंगल
बुलबुल बड़ी नरम दिल वाली
बैठी रहती वृक्ष की डाली

रचनाकार परिचय:-
बड़ा चतुर था पर वह कौआ
इधर-उधर उड़ता था भैया
इक दिन एक शिकारी आया
देखी पेड़ की गहरी छाया
गया था गर्मी में थक-हार
आया मन में एक विचार
क्यों न थोड़ा करे आराम
फिर जाएगा अपने काम
सोच के वह छाया में लेटा
और निद्रा का आ गया झूठा
आ गई उसको निद्रा गहरी
पर छाया न वहाँ पे ठहरी
धूप लगी आने वहाँ पर
पड़ने लगी थी उसके मुख पर
देख रही थी यह सब बुलबुल
पिघल गया बुलबुल का दिल
उसने अपने पँख फैलाए
ताकि वहाँ छाया हो जाए
पर कौआ था बड़ा चालाक
उड़ गया वह वहाँ से तपाक
हो गई जब सब दूर थकावट
ली शिकारी ने तब करवट
जब उसकी आँखें गईं खुल
देखा टहनी पर थी बुलबुल
झट से उठाया तीर-कमान
ले ली उस बुलबुल की जान
गिरी वो अब धरती पर आकर
बैठी थी जो पँख फैलाकर
बच गया था कौआ चलाक
बच्चो, होना नहीं अवाक
दुष्टों पे एतबार न करना
न ही इतने भोले बनना
करनी दुष्ट के संग में भलाई
समझो नई मुसीबत आई
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10 comments:
हितोपदेश का एसा मोहक प्रस्तुतिकरण। आपने बडा काम किया है सीमा जी। इस श्रंखला की सभी कडियाँ मैं सहेज कर रखने वाली हूँ।
करनी दुष्ट के संग में भलाई
समझो नई मुसीबत आई - सही शिक्षा।
बच्चो, होना नहीं अवाक
दुष्टों पे एतबार न करना
न ही इतने भोले बनना
करनी दुष्ट के संग में भलाई
समझो नई मुसीबत आई
बच्चों की भाषा और रोचक कहानी। मजा आ गया।
वाह वाह सही कहा। दुष्टों की मदद करना मुसीबत मोल लेना ही है।
वाह अतिसुन्दर शिक्षाप्रद काव्यात्मक प्रस्तुति....
बच्चो की बढ्या महफिल जमाई है सीमा जी नें। अच्छी रचना।
अति - सुन्दर प्रस्तुति....
वाह....बहुत ही बढिया...क्या कहने....आनंद आ गया...
तालियाँ...तालियाँ....तालियाँ
ऐसे और भी प्रयास किए जाने चाहिए ...
सीमा सचदेव जी को उनके प्रयास के लिए हमारी तरफ से ग्रैंड सैल्यूट ....
सीमा सचदेव जी का यह प्रयास सराहनीय है - बच्चोँ के लिये हिन्दी भाषा मेँ और ज्यादा साहित्य रचा जाना आवश्यक है -
- लावण्या
kya baat hai
करनी दुष्ट के संग में भलाई
समझो नई मुसीबत आई
aap bhaut achha kaam kar rahi hai
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