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2:20 pm | प्रस्तुतकर्ता
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डा. सुभाष राय
ए-१५८, एम आई जी, शास्त्रीपुरम, बोदला रोड, आगरा
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स
1:11 pm | प्रस्तुतकर्ता
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वरिष्ट कवयित्री सुदर्शन प्रियदर्शनी ने पंजाब विश्व विद्यालय से पी-एच.दी की उपाधि प्राप्त की.
अमेरिका में भारतीय संस्कृति पर आधारित पत्रिका 'फ्रेगरेंस' की शुरुआत १६ वर्ष पहले की.
आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर भारतीय व अमरीकी श्रोताओं के लिए अमेरिका के राज्य क्लेवलैंड में कार्यक्रम आयोजित करती हैं.
प्रकाशित रचनाएँ--
रेत की दीवार , सूरज नहीं उगेगा , अरी ओ कनिका , जलाक (उपन्यास), काँच के टुकड़े (कहानी संग्रह) , शिखंडी युग , बरहा (कविता संग्रह)
पुरस्कार --
महादेवी पुरस्कार ,हिन्दी परिषद् ,टोरंटो (कनाडा ), महानता पुरस्कार (फेडरेशन आफ इण्डिया ) ओहायो,(यू एस ए), गवर्नर्स मीडिया पुरस्कार , ओहायो (यू एस ए)
भारत की विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में स्वतत्र लेखन.
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स
1:07 pm | प्रस्तुतकर्ता
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सुमित सिंह, मुम्बई
जन्म: 16.12.1980, काठमांडू, (नेपाल)
संप्रति: स्वतंत्र पत्रकारिता, अनुवाद कार्य तथा पेंटिंग रचना
ब्लॉग: http://www.apnaapnaasman.blogspot.com/
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स
1:03 pm | प्रस्तुतकर्ता
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सुलभ जायसवाल 'सतरंगी' का जन्म 31 अगस्त, 1982, को अररिया, बिहार में हुआ. कंप्यूटर साइंस में स्नातक एवं पेशे से सूचना प्रोधोगिकी विशेषज्ञ निजी क्षेत्र दिल्ली में कार्यरत हैं. बचपन से कवितायेँ लेखन का शौक रहा. कॉलेज के दिनों में स्थानीय समाचार पत्रों और विभिन्न पत्रिकाओं में लिखते छपते रहे हैं. ग़ज़ल और हास्य व्यंग्य लेखक के रूप में ज्यादा सराहे गए. सक्रिय ब्लोगर हैं. हिंदी ऊर्दू साहित्य विकास के प्रति समर्पण का भाव है. शैक्षणिक एवं सामजिक गतिविधियों में हाथ बंटाना अच्छा लगता है.
ईमेल: [email protected]
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स
1:02 pm | प्रस्तुतकर्ता
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नामः श्रीमती सुषमा झा
शिक्षाः एम.एस.सी. एम.एड
संप्रतिः प्राचार्य, शा.बहु उ.उ. माध्यमिक विद्यालय जगदलपुर
आत्मकथ्यः विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविता ,लेख एवं कहानियां जैसे कादम्बनी, साक्षतात्कार, नारी का संबल, सूत्र, आहा जिंदगी
संपादनः पर्यटन भारती
पुरूस्कारः छतीसगढ़ राज्य स्तरीय सावित्री देवी फुले सम्मान, छ.ग. साहित्य समिति द्वारा सम्मानित, हिन्दी साहित्य परिषद द्वारा सम्मानित.
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स
9:57 pm | प्रस्तुतकर्ता
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आयु: ४७ वर्ष
पेशा: दैनिक हिंदुस्तान रांची, में १० वर्षों से बतौर कार्टूनिस्ट कार्यरत!
अन्य जानकारियां- कार्य अनुभव २५ वर्षों का! अबतक १५००० हजार से भी अधिक कार्टून प्रकाशित!
कुछ प्रमुख पत्र-पत्रिकाएं जहाँ कार्टून प्रकाशित हुए या हो रहे हैं:
दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, रांची एक्सप्रेस, सन्मार्ग, अपनी रांची, देशप्राण, सरिता, मेरी सहेली, वामा, गृह सहेली, बिंदिया, प्रथम प्रवक्ता, नूतन कहानियाँ, सच्ची कहानियां, सरस सलिल, दी पब्लिकअजेंडा, राज माया, संपादक, नंदन, बाल भारती, बाल हंस, बाल भाष्कर, दीवाना तेज साप्ताहिक, लोटपोट, मधुमुस्कान, आनंद डाइजेस्ट, मेला, माधुरी, आदि.....
ब्लोग- http://sureshcartoonist.blogspot.com
साहित्य शिल्पी पर इनकी सम्पूर्ण रचनाओं के लिए यहाँ चटखा लगाए।
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स
9:53 pm | प्रस्तुतकर्ता
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अंतर्राष्ट्रीय संबन्धों पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.ए. कर रहे संदीप कुमार को अध्ययन के साथ-साथ सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का भी शौक है।
अपनी भावनाओं को आप प्राय: कहानी और कविताओं के माध्यम से कागज पर उतारते रहते हैं।
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स
7:50 pm | प्रस्तुतकर्ता
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2 अक्टूबर, 1974 को पंजाब के अबोहर मे जन्मी सीमा सचदेव पेशे से हिन्दी-अध्यापिका हैं। इनकी कई रचनाये जैसे- विभिन्न अंतर्जाल पत्रिकाओ मे प्रकाशित हैं। "मेरी आवाज़ भाग-१,२", "मानस की पीड़ा", "सन्जीवनी", "आओ सुनाऊं एक कहानी", "नन्ही कलियाँ", "आओ गाएं" नामक रचना-संकलन ई-पुस्तक के रूप में प्रकाशित हैं।
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स
7:36 pm | प्रस्तुतकर्ता
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' नें नागरिक अभियंत्रण में त्रिवर्षीय डिप्लोमा. बी.ई., एम.आई.ई., अर्थशास्त्र तथा दर्शनशास्त्र में एम.ऐ., एल.एल.बी., विशारद, पत्रकारिता में डिप्लोमा, कंप्युटर ऍप्लिकेशन में डिप्लोमा किया है।
आपकी प्रथम प्रकाशित कृति 'कलम के देव' भक्ति गीत संग्रह है। 'लोकतंत्र का मकबरा' तथा 'मीत मेरे' आपकी छंद मुक्त कविताओं के संग्रह हैं। आपकी चौथी प्रकाशित कृति है 'भूकंप के साथ जीना सीखें'। आपने निर्माण के नूपुर, नींव के पत्थर, राम नाम सुखदाई, तिनका-तिनका नीड़, सौरभ:, यदा-कदा, द्वार खड़े इतिहास के, काव्य मन्दाकिनी २००८ आदि पुस्तकों के साथ साथ अनेक पत्रिकाओं व स्मारिकाओं का भी संपादन किया है।
आपको देश-विदेश में १२ राज्यों की ५० सस्थाओं ने ७० सम्मानों से सम्मानित किया जिनमें प्रमुख हैं : आचार्य, २०वीं शताब्दी रत्न, सरस्वती रत्न, संपादक रत्न, विज्ञान रत्न, शारदा सुत, श्रेष्ठ गीतकार, भाषा भूषण, चित्रांश गौरव, साहित्य गौरव, साहित्य वारिधि, साहित्य शिरोमणि, काव्य श्री, मानसरोवर साहित्य सम्मान, पाथेय सम्मान, वृक्ष मित्र सम्मान, आदि।
वर्तमान में आप अनुविभागीय अधिकारी मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग के रूप में कार्यरत हैं।
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स
5:03 pm | प्रस्तुतकर्ता
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संगीता पुरी का जन्म 19 दिसम्बर 1963 को झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत ग्राम पेटरवार में हुआ। रांची विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में 1984 में स्नातकोत्तर की डिग्री ली।
उसके बाद झुकाव अपने पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा विकसित की गयी ज्योतिष की एक नई शाखा गत्यात्मक ज्योतिष की ओर हुआ और सब कुछ छोडकर इसी के अध्ययन मनन में अपना जीवन समर्पित कर दिया। गत्यात्मक ज्योतिष पर आधारित अपना साफ्टवेयर भी वे बना चुकी हैं।
सितम्बर 2007 से ही ज्योतिष पर आधारित अपने अनुभवों के साथ ब्लागिंग की दुनिया में हैं। अनेक पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन करती आ रही हैं। ज्योतिष पर आधारित एक पुस्तक 'गत्यात्मक दशा पद्धति: ग्रहों का प्रभाव' 1996 में प्रकाशित हो चुकी है।
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स
4:55 pm | प्रस्तुतकर्ता
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साहित्य शिल्पी" रचनाकार परिचय:-सुमन बाजपेयी का जन्म दिल्ली में हुआ। यहीं एम.ए. हिन्दी आनर्स व पत्रकारिता का अध्ययन किया।
१२ साल की उम्र से ही कवितायें लिखना आरंभ कर दिया था। कालेज में पढ़ते हुये ही इनकी कहानी "अपना घर" युववाणी से प्रसारित हुई। कैरियर का आरंभ ’चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट’ से किया तथा यहीं से बाल-लेखन की भी शुरुआत हुई। तत्पश्चात ’जागरण सखी’, ’मेरी संगिनी’ और ’फोर्थ डी वुमन’ नामक पत्रिकाओं में काम किया।
१२ साल की उम्र से ही कवितायें लिखना आरंभ कर दिया था। कालेज में पढ़ते हुये ही इनकी कहानी "अपना घर" युववाणी से प्रसारित हुई। कैरियर का आरंभ ’चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट’ से किया तथा यहीं से बाल-लेखन की भी शुरुआत हुई। तत्पश्चात ’जागरण सखी’, ’मेरी संगिनी’ और ’फोर्थ डी वुमन’ नामक पत्रिकाओं में काम किया।
पिछले २७ वर्षों से कहानी, कविता व महिला विषयों तथा बाल-लेखन में संलग्न। ’खाली कलश’, ’ठोस धरती का विश्वास’ और ’अगिनदान’ नामक कहानी-संग्रहों समेत ३०० से अधिक कहानियाँ व २०० से अधिक लेख प्रकाशित। २५ अंग्रेजी पुस्तकों का हिन्दी में अनुवाद भी कर चुकीं हैं। पैरेंटिंग पर दो किताबें शीघ्र प्रकाश्य हैं।
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स
4:46 pm | प्रस्तुतकर्ता
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रचनाकार परिचय:-
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श्री एस.आर. हरनोट का जन्म जनवरी, 1955 में हिमाचल प्रदेश के शिमला जिल की पिछड़ी पंचायत व गाँव चनावग में हुआ। बी.ए. ऑनर्ज़ एम.ए.(हिन्दी), पत्रकारिता, लोक-सम्पर्क एवं प्रचार-प्रसार में उपाधि पत्र प्राप्त करने वाले श्री हरनोट प्रदेश तथा देश से प्रकाशित होने वाले हिन्दी के समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में इतिहास, संस्कृति, लोक जीवन और विविध विषयों पर नियमित लेखन करते रहे हैं। इनकी कहानियाँ कई संपादित संग्रहों में शामिल हो चुकी हैं तथा अंग्रेजी, मराठी, कन्नड़, पंजाबी और गुजराती, तेलगू सहित कई अन्य भाषाओं में इनकी कहानियों के अनुवाद भी प्रकाशित हुये हैं। अब तक इनके कई कहानी संग्रह, "हिडिम्ब" नामक उपन्यास, हिमाचल प्रदेश के मंदिरों व लोक-कथाओं पर एक शोध तथा एक यात्रा-संस्मरण प्रकाशित हो चुके हैं।
"दारोश तथा अन्य कहानियाँ" कहानी-संग्रह के लिये इन्हें २००३ का अंतर्राष्ट्रीय इंदु-शर्मा कथा सम्मान तथा २००७ में हिमाचल राज्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। इसके अतिरिक्त इन्हें अखिल भारतीय भारतेन्दु हरिश्चन्द्र एवार्ड, हिमाचल गौरव सम्मान व हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा साहित्य सम्मान सहित कई अन्य सम्मान और पुरुस्कार भी मिल चुके हैं।
वर्तमान में आप हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
"दारोश तथा अन्य कहानियाँ" कहानी-संग्रह के लिये इन्हें २००३ का अंतर्राष्ट्रीय इंदु-शर्मा कथा सम्मान तथा २००७ में हिमाचल राज्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। इसके अतिरिक्त इन्हें अखिल भारतीय भारतेन्दु हरिश्चन्द्र एवार्ड, हिमाचल गौरव सम्मान व हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा साहित्य सम्मान सहित कई अन्य सम्मान और पुरुस्कार भी मिल चुके हैं।
वर्तमान में आप हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
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4:35 pm | प्रस्तुतकर्ता
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रचनाकार परिचय:-
इनके अब तक दस कहानी संग्रह तथा आठ उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। एक उपन्यास "सावधान नीचे आग है" के एक अंश पर "काला हीरा"नाम से एक टेलीफिल्म भी बन चुकी है।
इन्हें प्राप्त पुरुस्कारों व सम्मानों में प्रमुख हैं: सारिका सर्व भाषा कहानी प्रतियोगिता (१९८०), आनंद सागर कथा क्रम सम्मान (१९९७) तथा इंदु शर्मा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान (२००१)
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संजीव हिन्दी कथा जगत में एक सुपरिचित नाम हैं। 1947 में सुल्तानपुर (उत्तरप्रदेश) में जन्मे संजीव की शिक्षा दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई।संप्रति आप इंडियन आयरन एंड स्टील कं., कुल्टी के केमिस्ट इंचार्ज के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृति के पश्चात "अक्षर पर्व" (रायपुर) का संपादन कर रहे हैं।
इनके अब तक दस कहानी संग्रह तथा आठ उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। एक उपन्यास "सावधान नीचे आग है" के एक अंश पर "काला हीरा"नाम से एक टेलीफिल्म भी बन चुकी है।
इन्हें प्राप्त पुरुस्कारों व सम्मानों में प्रमुख हैं: सारिका सर्व भाषा कहानी प्रतियोगिता (१९८०), आनंद सागर कथा क्रम सम्मान (१९९७) तथा इंदु शर्मा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान (२००१)
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