23 जनवरी 1960 को नगीना, मेवात में जन्मे भगवानदास मोरवाल नें हिन्दी कथा जगत में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। आपनें राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.ए. किया साथ ही आपको पत्रकारिता में डिप्लोमा भी हासिल है। आपके प्रकाशित उपन्यास हैं - रेत, काला पहाड़ एवं बाबल तेरा देस में। आपके चार कहानी संग्रह, एक कविता संग्रह और कई संपादित पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं। आपके लेखन में मेवात क्षेत्र की ग्रामीण समस्याएं उभर कर सामने आती हैं।
भगवानदास मोरवाल को उपन्यास रेत के लिये ही इस वर्ष के दो प्रमुख सम्मान प्राप्त हुए हैं। पहला है अंतरराष्ट्रीय इंदुशर्मा कथा सम्मान जो कि कथा. यू. के द्वारा लंदन में प्रदान किया गया। दूसरा है - जे. सी जोशी स्मृति शब्द साधक ज्यूरी सम्मान। इस सम्मान को घोषित करने के लिये ज्यूरी में डॉ. नामवर सिंह, डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी तथा राजेन्द्र यादव थे।
साहित्य शिल्पी पर इनकी सम्पूर्ण रचनाओं के लिए यहाँ चटखा लगाए।
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