मनोज रूपड़ा एक सुपरिचित कथाकार हैं। अपनी पंद्रह वर्ष से भी अधिक के साहित्यिक जीवन में हालाँकि संख्या के हिसाब से बहुत कम लिखा है परंतु इतनी रचनायें भी अपनी उत्कृष्टता के चलते उन्हें एक सशक्त रचनाकार साबित करने में सक्षम हैं। अपनी पुस्तक "दफ़न और अन्य कहानियाँ" के लिये इंदु शर्मा कथा सम्मान प्राप्त करने वाले मनोज जी के विषय में अधिक जानने के लिये आप प्रसिद्ध कथाकार सूरजप्रकाश जी का संस्मरण भी पढ़ सकते हैं।
हिंदी साहित्यिक विधाओं यथा कविता, कहानी, ग़ज़ल, आलेख, साक्षात्कार आदि की दैनिक पत्रिका
टेसू के फूल [कविता] - श्रीकांत मिश्र "कांत"
-
[image: Kaifi]
टेसू के फूल
खिल आये है फ़िर
बबूल के जंगल मे
स्नेह की बरसात न सही….
मुक्त …..
सर्द रिश्तों की जकड़न से
बेखबर ...
बौराये आम, पीले पत्...
0 comments:
Post a Comment