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शनिवार, २ मई २००९

मैं और मेरा घर.. [कविता] - डॉ. नंदन


मेरे घर में बहुत जरूरी चीजें हैं
जो बहुत कीमती हैं
ये बाज़ार में नही मिलती हैं
पुरखों से मिले संस्कार
और माता-पिता के आशीष से भरा है


रचनाकार परिचय:-

डॉ.एस.एस. धुर्वे (डॉ. नंदन) का न्म 5 अक्टूबर 1969 को बिलासपुर (छतीसगढ) में हुआ। आप एम.ए (हिन्दी), बी.एड, एल.एल.बी, पी.एच.डी (कवि नागार्जुन की कविताओं का वैचारिक परिप्रेक्ष्य: एक अनुशीलन) हैं। आप कथादेश, सर्वनाम, आकंठ, सूत्र, असुविधा जैसी पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। आपकी रचनाओं का समाचार पत्रों में भी नियमित प्रकाशन होता रहा है। वर्तमान में आप अरुणाचल प्रदेश में पोस्टेड हैं तथा केन्द्रीय विद्यालय में प्राचार्य के पद पर हैं।

यह मेरा छोटा सा घर
जहाँ बहुत सारी खुशियाँ हैं
बच्चों के लिए ढेर सारा प्यार
आपसी समझ और विश्वास के साथ
पत्नी के लिए थोडा सा वक्त
थोडी-थोडी भूख और नींद है
जो हम सबके लिए जरूरी है

इन सबके साथ अपने घर में
मैं बचाकर रखता हूँ
थोडी-सी चेतना,थोडी जिज्ञासा
थोडी-सी चिंता, थोडी आशा
थोडी-थोडी भावुकता, नैतिकता
प्रेम, घृणा, सादगी, सम्मान
संवाद और ज़रूरी गुस्सा
आगत भविष्य के लिए
*********

7 comments:

महामंत्री - तस्लीम २३ नवम्बर २००९ ७:०६ PM  

जीवन के नजदीक से गुजरती एक अच्‍छी कविता।

-----------
TSALIIM
SBAI

Vijay Kumar Sappatti २३ नवम्बर २००९ ७:०६ PM  

nandan ji

इन सबके साथ अपने घर में
मैं बचाकर रखता हूँ
थोडी-सी चेतना,थोडी जिज्ञासा
थोडी-सी चिंता, थोडी आशा
थोडी-थोडी भावुकता, नैतिकता
प्रेम, घृणा, सादगी, सम्मान
संवाद और ज़रूरी गुस्सा
आगत भविष्य के लिए

in panktiyon me aapne jeevan ki gahraiyon ko aur maanav man ki kamjoriyon ko chua hai ...

kavita bahut prabhavshalli ban padhi hai ..

dhanyawad.

vijay

रितु रंजन २३ नवम्बर २००९ ७:०६ PM  

इन सबके साथ अपने घर में
मैं बचाकर रखता हूँ
थोडी-सी चेतना,थोडी जिज्ञासा
थोडी-सी चिंता, थोडी आशा
थोडी-थोडी भावुकता, नैतिकता
प्रेम, घृणा, सादगी, सम्मान
संवाद और ज़रूरी गुस्सा
आगत भविष्य के लिए

उत्कृष्ट कविता।

nitesh २३ नवम्बर २००९ ७:०६ PM  

प्रभावित करने वाली कविता।

देवेश वशिष्ठ ' खबरी ' २३ नवम्बर २००९ ७:०६ PM  

अरे इतने अमीर हैं आप... अपने घर का पता बताईये... मैं आता हूं डाका डालने...

rachana २३ नवम्बर २००९ ७:०६ PM  

इन सबके साथ अपने घर में
मैं बचाकर रखता हूँ
थोडी-सी चेतना,थोडी जिज्ञासा
थोडी-सी चिंता, थोडी आशा
थोडी-थोडी भावुकता, नैतिकता
प्रेम, घृणा, सादगी, सम्मान
संवाद और ज़रूरी गुस्सा
आगत भविष्य के लिए

bahut sunder likha hai
badhai
rachana

अवनीश एस तिवारी २३ नवम्बर २००९ ७:०६ PM  

जहां ना होता सम्मान और प्यार,
वो घर नहीं , वो तो है इक मकान

सुन्दर रचना

अवनीश तिवारी

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': परिकरान्कुर में रखे, साभिप्राय कवि नाम.-काव्य का रचना शास्त्र: ४७,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1,
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फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

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