.........प्रात: 6.00 बजे से:- मैं वीणा हूं [कविता] - विपुल शुक्ला ......अपरान्ह 1.00 बजे से:- सप्ताह का कार्टून - अभिषेक तिवारी......

Saturday, May 9, 2009

मैं कवि हूँ [कविता] - डॉ. कुमार विश्वास

सम्बन्धों को अनुबन्धों को परिभाषाएँ देनी होंगी
होठों के संग नयनों को कुछ भाषाएँ देनी होंगी
हर विवश आँख के आँसू को
यूँ ही हँस हँस पीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा


रचनाकार परिचय:-

डॉ॰ कुमार विश्वास का नाम किसी भी हिन्दी काव्य-रसिक के लिये अपरिचित नहीं है। देश के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में गिने जाने वाले डॉ॰ कुमार विश्वास के अब तक दो काव्य-संग्रह प्रकाशित हुये हैं जिन्हें पाठकों का अपार स्नेह मिला है। ये अपने काव्य-वाचन के अंदाज़ के लिये सभी के चहेते हैं।

मनमोहन के आकर्षण मे भूली भटकी राधाऒं की
हर अभिशापित वैदेही को पथ मे मिलती बाधाऒं की
दे प्राण देह का मोह छुडाने वाली हाडा रानी की
मीराऒं की आँखों से झरते गंगाजल से पानी की
मुझको ही कथा सँजोनी है,
मुझको ही व्यथा पिरोनी है
स्मृतियाँ घाव भले ही दें
मुझको उनको सीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा

जो सूरज को पिघलाती है व्याकुल उन साँसों को देखूँ
या सतरंगी परिधानों पर मिटती इन प्यासों को देखूँ
देखूँ आँसू की कीमत पर मुस्कानों के सौदे होते
या फूलों के हित औरों के पथ मे देखूँ काँटे बोते
इन द्रौपदियों के चीरों से
हर क्रौंच-वधिक के तीरों से
सारा जग बच जाएगा पर
छलनी मेरा सीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा

कलरव ने सूनापन सौंपा मुझको अभाव से भाव मिले
पीडाऒं से मुस्कान मिली हँसते फूलों से घाव मिले
सरिताऒं की मन्थर गति मे मैने आशा का गीत सुना
शैलों पर झरते मेघों में मैने जीवन-संगीत सुना
पीडा की इस मधुशाला में
आँसू की खारी हाला में
तन-मन जो आज डुबो देगा
वह ही युग का मीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा
**********

19 टिप्पणियाँ:

cartoonist ABHISHEK May 9, 2009 8:30 AM  

mane aapko jiapur men suna hai...
ab pad bhi rha hun....
vartmaan dour ke aap ek sashakat hastakshar hain.....
regards

nitesh May 9, 2009 10:10 AM  

कलरव ने सूनापन सौंपा मुझको अभाव से भाव मिले
पीडाऒं से मुस्कान मिली हँसते फूलों से घाव मिले
सरिताऒं की मन्थर गति मे मैने आशा का गीत सुना
शैलों पर झरते मेघों में मैने जीवन-संगीत सुना
पीडा की इस मधुशाला में
आँसू की खारी हाला में
तन-मन जो आज डुबो देगा
वह ही युग का मीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा

अभिषेक जी नें सही लिखा है। आप आज के सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपको सुनना एक अनुभव है और्क़ आपको पधना भी।

अनुज May 9, 2009 10:22 AM  

मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा

भागलपुर में होली के दर्म्यान हुए कवि सम्मेनन में आपको सुना था तब से आपका फैन हूँ। साहित्य शिल्पी पर आपके वीडियो भी देखना या सुनना चाहता हूँ। मेरा अनुरोध आपसे और साहित्य शिल्पी दोनो से है।

अनुज कुमार सिन्हा
भागलपुर

Priya May 9, 2009 10:38 AM  

Vishwas Sir.... ultimate number .. Superb! Jab tak peeda hain tab tak nahi......balki jab tak jeevan ki ek bhi nishani hain is dharti par tab tak aapko jeena hoga.......Aap jaise log ek jeevan kaha jete hain..... peedhiyan yaad rakhti hain aap logo ko

अभिषेक सागर May 9, 2009 10:46 AM  

बहुत अच्छी कविता। बधाई।

बेनामी May 9, 2009 11:19 AM  

सम्बन्धों को अनुबन्धों को परिभाषाएँ देनी होंगी
होठों के संग नयनों को कुछ भाषाएँ देनी होंगी
हर विवश आँख के आँसू को
यूँ ही हँस हँस पीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा

Nice poem. Thanks.

Alok Kataria

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' May 9, 2009 11:47 AM  

सारगर्भित, सटीक शब्द चयन, सरस, सहज बोधगम्य, मोहक रचना ...साधुवाद.

"अर्श" May 9, 2009 12:34 PM  

kumaar ji ko is behatarin kavita ke liye dhero badhaayee ..


arsh

निधि अग्रवाल May 9, 2009 5:50 PM  

कुमार जी बेहतरीन कविता की बधाई।

नंदन May 9, 2009 5:58 PM  

कुमार विश्वास समय और पीढी की नब्ज समझ कर लिखने वाले कवियों में हैं। प्रभावित करने वाली कविता है।

अजय कुमार May 9, 2009 9:45 PM  

good poem

देवेश वशिष्ठ ' खबरी ' May 10, 2009 12:38 AM  

विश्वास जी, आपको जितना पढना अच्छा लगता है उससे लाखों गुना ज्यादा सुनना... (और एक अच्छी कविता के बजायाव्ता आपको पढ़ना भी करोड़ गुना ज्यादा अच्छा लगता है ) आपका पॉडकास्ट मिल जाए तो सोने पर सुहागा हो जाए...

गौतम राजरिशी May 10, 2009 1:05 AM  

आहहाहा....कुमार साब की कविता के तो हम ऐसे ही मुरीद रहे हैं।
ये पंक्तियाँ "जो सूरज को पिघलाती है व्याकुल उन साँसों को देखूँ/या सतरंगी परिधानों पर मिटती इन प्यासों को देखूँ".....यूं तो पूरी कविता ही अद्‍भुत है और कुमार विश्वास जी की कलम से उपजी है तो अद्‍भुत तो होनी ही है...

"किस्से को हकीकत में बदल कर हंगामा" मचाने वाले इस अनूठे कवि को नमन !!!

हिमांशु । Himanshu May 10, 2009 5:05 AM  

इस बेहतरीन रचना के लिये कुमार जी का आभार । प्रत्येक पंक्ति संजोने लायक है ।

अनन्या May 10, 2009 8:21 AM  

कुमार विश्वास की रचनायें प्रभावित करती है। वे केवल मंचीय कवि ही नहीं है साहित्य उनकी पंक्तियों में ठोस पैठा है।

मोहिन्दर कुमार May 11, 2009 11:50 AM  

डा. कुमार विश्वास जी को मंच पर सुनना और पढना दोनों ही एक सुखद एहसास हैं...
इस कविता के माध्यक से कवि के कोमल मन के भाव उजागर करते हुये शब्द मन को छू जाते हैं..
शब्द चयन व भाव अनूठे हैं..

Vijay Kumar Sappatti May 13, 2009 2:33 PM  

aadarniya kumar ji

aapko to bahut suna hai maine youtube me aur aksar kahin kahin ga bhi leta hoon ..

sir ji is kavita ke dwara aapne hum saare kaviyon ko ek samman diya hai ...

mera naman hai aapko..

itni acchi rachna ke liye badhai sweekar karen...
vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

प्रकाश पंकज June 30, 2009 9:11 PM  

कलरव ने सूनापन सौंपा मुझको अभाव से भाव मिले
पीडाऒं से मुस्कान मिली हँसते फूलों से घाव मिले
सरिताऒं की मन्थर गति मे मैने आशा का गीत सुना
शैलों पर झरते मेघों में मैने जीवन-संगीत सुना
पीडा की इस मधुशाला में
आँसू की खारी हाला में
तन-मन जो आज डुबो देगा
वह ही युग का मीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा

धन्यबाद
........

प्रकाश पंकज June 30, 2009 9:14 PM  

मधुशाला की वो पंक्ति याद आयी
"पीडा में आनंद जिसे हो आये मेरी मधुशाला "
.....
या कहिए तो एक कवी की मधुशाला

सितम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

कविता:-अजय यादव, सुशील कुमार, दीपक शर्मा, राजीव रंजन प्रसाद, तेज राम शर्मा, रचना श्रीवास्तव, हिन्दी दिवस पर तीन कवितायें - डॉ. वेद व्यथित/ डी. के. सिंह/ शोभा महेन्द्रू., अवनीश तिवारी, प्रथम नागरिक हैं पेड़ पृथ्वी पर [पेंटिंग -कविता श्रंखला - 3] - सुशील कुमार,
कहानी:- शक्ति प्रकाश,
गज़ल:-देवमणि पांडेय, नीरज गोस्वामी, दीपक बेदिल, दिगम्बर नासवा, दीपक गुप्ता, श्रद्धा जैन,
जीवन परिचय:-
नज़म:-
काव्यालोचना:-

साहित्य समाचार:-"स्पंदन" संस्था का प्रथम कथा पुरस्कार श्रीमती मृदुला गर्ग को - वीरेन्द्र जैन, दिविक रमेश का हिंदी कविता में एक पृथक चेहरा है - केदारनाथ सिंह - डॉ. प्रेम जन्मेजय,

गीत:-

कवि चर्चा:- रचनाकार से मिलिए -गीति-शिल्पी महेंद्रभटनागर - साहित्य शिल्पी,
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन - रिपोर्ट, " हिन्दी दिवस और साहित्य शिल्पी का आज जन्मदिवस" [आज साहित्य शिल्पी का स्थापना दिवस है] - विशेष प्रस्तुति, " साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन की रिपोर्ट, समाचार माध्यमों एवं विभिन्न ब्ळोग मंचों पर।,

सितम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': काव्य का रचना शास्त्र:२6, काव्य का रचना शास्त्र:२7, वर्ण्य एक वर्णन कई, अलंकार उल्लेख -काव्य का रचना शास्त्र: २८, जोर सहित दोहराव ही, है पुनरुक्तिप्रकाश- काव्य का रचना शास्त्र: २९ ,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:- ब्राह्मण और तीन दुष्ट [हितोपदेश का काव्यानुवाद - 5] - सीमा सचदेव,
आलेख:- छत्तीसगढ़ में गणेश उत्सव की प्राचीन परंपरा - प्रो. अश्विनी केशरवानी, आशा भोसले एक परिचय - अजय कुमार, भूमण्डलीकरण के दौर में हिन्दी के बढ़ते कदम - के के यादव, वैश्विक परिदृश्य में राष्ट्रभाषा हिन्दी की विकास प्रक्रिया - डॉ. वीरेन्द्र सिंह यादव, दुर्गा सप्तशती अर्थात 700 प्रयोग [नवरात्रि पूजा विधि पर विशेष आलेख] - अजय कुमार, दिनकर का काव्य : दहकते अंगारों पर इंद्रधनुषों की क्रीड़ा [रामधारी सिंह दिनकर जयंती पर विशेष] - सुशील कुमार,

सितम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

पुस्तक-अंश:-
व्यंग्य:- जिन्नागिरी के पेंच - आलोक पुराणिक,
श्रद्धांजलि:- "हिन्दी चेतना" की ओर से फ़ादर कामिल बुल्के को श्रद्धाँजलि - शशि पाधा, डॉ चित्रा चतुर्वेदी 'कार्तिका' नहीं रहीं [श्रद्धांजलि] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल",
साक्षात्कार:-कमिटमेंट की कमी है आज के लेखन में - पुष्पा भारती। [प्रसिद्ध साहित्यकार तथा प्रखर पत्रकार पुष्पा भारती जी से बातचीत] - मधु अरोरा,
विमर्श:-
हिन्दी साहित्य का इतिहास:-

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