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रविवार, १६ अगस्त २००९

हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है [कविता] - आचार्य संजीव 'सलिल'

जो कुछ भी इस देश में है, सारा का सारा हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....


<span title=साहित्य शिल्पी" width="80" align="left" border="0">रचनाकार परिचय:-

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' नें नागरिक अभियंत्रण में त्रिवर्षीय डिप्लोमा. बी.ई.., एम. आई.ई., अर्थशास्त्र तथा दर्शनशास्त्र में एम. ऐ.., एल-एल. बी., विशारद,, पत्रकारिता में डिप्लोमा, कंप्युटर ऍप्लिकेशन में डिप्लोमा किया है।
आपकी प्रथम प्रकाशित कृति 'कलम के देव' भक्ति गीत संग्रह है। 'लोकतंत्र का मकबरा' तथा 'मीत मेरे' आपकी छंद मुक्त कविताओं के संग्रह हैं। आपकी चौथी प्रकाशित कृति है 'भूकंप के साथ जीना सीखें'। आपनें निर्माण के नूपुर, नींव के पत्थर, राम नम सुखदाई, तिनका-तिनका नीड़, सौरभ:, यदा-कदा, द्वार खड़े इतिहास के, काव्य मन्दाकिनी २००८ आदि पुस्तकों के साथ साथ अनेक पत्रिकाओं व स्मारिकाओं का भी संपादन किया है।
आपको देश-विदेश में १२ राज्यों की ५० सस्थाओं ने ७० सम्मानों से सम्मानित किया जिनमें प्रमुख हैं : आचार्य, २०वीन शताब्दी रत्न, सरस्वती रत्न, संपादक रत्न, विज्ञानं रत्न, शारदा सुत, श्रेष्ठ गीतकार, भाषा भूषण, चित्रांश गौरव, साहित्य गौरव, साहित्य वारिधि, साहित्य शिरोमणि, काव्य श्री, मानसरोवर साहित्य सम्मान, पाथेय सम्मान, वृक्ष मित्र सम्मान, आदि।

वर्तमान में आप अनुविभागीय अधिकारी मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग के रूप में कार्यरत हैं

मणिपुरी, कथकली, भरतनाट्यम, कुचपुडी, गरबा अपना है.
लेजिम, भंगड़ा, राई, डांडिया हर नूपुर का सपना है.
गंगा, यमुना, कावेरी, नर्मदा, चनाब, सोन, चम्बल,
ब्रम्हपुत्र, झेलम, रावी अठखेली करती हैं प्रति पल.
लहर-लहर जयगान गुंजाये, हिंद में है और हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....

मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजा सबमें प्रभु एक समान.
प्यार लुटाओ जितना, उतना पाओ औरों से सम्मान.
स्नेह-सलिल में नित्य नहाकर, निर्माणों के दीप जलाकर.
बाधा, संकट, संघर्षों को गले लगाओ नित मुस्काकर.
पवन, वन्हि, जल, थल, नभ पावन, कण-कण तीरथ, हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....

जै-जैवन्ती, भीमपलासी, मालकौंस, ठुमरी, गांधार.
गजल, गीत, कविता, छंदों से छलक रहा है प्यार अपार.
अरावली, सतपुडा, हिमालय, मैकल, विन्ध्य, उत्तुंग शिखर.
ठहरे-ठहरे गाँव हमारे, आपाधापी लिए शहर.
कुटी, महल, अँगना, चौबारा, हर घर-द्वारा हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....

सरसों, मका, बाजरा, चाँवल, गेहूँ, अरहर, मूँग, चना.
झुका किसी का मस्तक नीचे, 'सलिल' किसी का शीश तना.
कीर्तन, प्रेयर, सबद, प्रार्थना, बाईबिल, गीता, ग्रंथ, कुरान.
गौतम, गाँधी, नानक, अकबर, महावीर, शिव, राम महान.
रास कृष्ण का, तांडव शिव का, लास्य-हास्य सब हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....

ट्राम्बे, भाखरा, भेल, भिलाई, हरिकोटा, पोकरण रतन.
आर्यभट्ट, एपल, रोहिणी के पीछे अगणित छिपे जतन.
शिवा, प्रताप, सुभाष, भगत, रैदास कबीरा, मीरा, सूर.
तुलसी. चिश्ती, नामदेव, रामानुज लाये खुदाई नूर.
रमण, रवींद्र, विनोबा, नेहरु, जयप्रकाश भी हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....
********************

10 टिप्पणियाँ:

PRAN SHARMA August 16, 2009 3:11 PM  

JO KUCHH HAI IS DESH MEIN HAI
SAARAA KAA SARAA HINDI HAI
HAR HINDI BHARAT MAA KE
MAATHE KEE UJJWAL BINDI HAI
KITNA SATYA KAHAA HAI ACHARYA SANJEEV " SALI" JEE NE.
RASHTRIYA BHAVNAAON SE PARIPOORN
UNKEE IS UTKRISHT KAVITA KE LIYE
BADHAAEEYAN HEE BADHAAEEYAN.

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) August 16, 2009 6:43 PM  

आचार्य जी प्रणाम ,,
कमेन्ट क्या करू अभिभूत हूँ ,,
और नतमस्तक हूँ की किस तरह आप ने ,,
भारत की अनेकता में एकता दर्शाती संस्क्रती को
एक कविता में पिरो दिया
मेरा प्रणाम स्वीकार करे
सादर
प्रवीण पथिक

अर्चना तिवारी August 16, 2009 10:10 PM  
यह पोस्टलेखक के द्वारा निकाल दी गई है.
अर्चना तिवारी August 16, 2009 10:11 PM  

आचार्य जी आपकी कविता तो माँ भारती की विशेषता का गुणगान कर रही है...नमन

अनन्या August 17, 2009 10:12 AM  

आचार्य जी की रचना है, उत्कृष्ट होनी ही है।

अनिल कुमार August 17, 2009 11:41 AM  

ट्राम्बे, भाखरा, भेल, भिलाई, हरिकोटा, पोकरण रतन.
आर्यभट्ट, एपल, रोहिणी के पीछे अगणित छिपे जतन.
शिवा, प्रताप, सुभाष, भगत, रैदास कबीरा, मीरा, सूर.
तुलसी. चिश्ती, नामदेव, रामानुज लाये खुदाई नूर.
रमण, रवींद्र, विनोबा, नेहरु, जयप्रकाश भी हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....

आभार सलिल जी।

मोहिन्दर कुमार August 17, 2009 11:56 AM  

राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचना के लिये सलिल जी का आभार

gita pandit August 18, 2009 9:17 AM  

सलिल जी !

राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचना .....

आभार...

नमन....

दिव्य नर्मदा August 21, 2009 9:42 PM  

भारत माँ की बोल जय, जब तक तन में जान.

प्रति पल हैं तैयार हम, हँसकर हों कुर्बान.

जिनने यह रचना पढी, उन सबका आभार.

करें टिप्पणी जो उन्हें, अर्पित नेह-दुलार.

google biz kit September 9, 2009 7:41 AM  

सलिल जी !

राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचना .....

आभार...

नमन....

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

कविता:-ओम प्रकाश शर्मा, मोहिन्दर कुमार, तेजेन्द्र शर्मा, श्यामल सुमन, शिशिर दूत फिर आया [आज राजाभाई कौशिक के जन्म दिवस पर विशेष प्रस्तुति] - राजाभाई कौशिक,
कहानी:-
गज़ल:-
जीवन परिचय:-
नज़म:-
काव्यालोचना:-

साहित्य समाचार:-बाजारवाद पर "हमकलम" की गोष्ठी - एक रिपोर्ट,

गीत:-

कवि चर्चा:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन - रिपोर्ट, " हिन्दी दिवस और साहित्य शिल्पी का आज जन्मदिवस" [आज साहित्य शिल्पी का स्थापना दिवस है] - विशेष प्रस्तुति, " साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन की रिपोर्ट, समाचार माध्यमों एवं विभिन्न ब्ळोग मंचों पर।,

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': अलंकार परिणाम यदि, कार्य सके संधान -काव्य का रचना शास्त्र: ३५,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1, सप्ताह-2 सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 10सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 11
लघु कथा:- एकलव्य - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ,
डायरी:-
पेंटिंग:- मंजीत सिंह के चित्र [ई-प्रदर्शनी]:-
यात्रा वृतांत:-

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