जो कुछ भी इस देश में है, सारा का सारा हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....
<span title=साहित्य शिल्पी" width="80" align="left" border="0">रचनाकार परिचय:-

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' नें नागरिक अभियंत्रण में त्रिवर्षीय डिप्लोमा. बी.ई.., एम. आई.ई., अर्थशास्त्र तथा दर्शनशास्त्र में एम. ऐ.., एल-एल. बी., विशारद,, पत्रकारिता में डिप्लोमा, कंप्युटर ऍप्लिकेशन में डिप्लोमा किया है।
आपकी प्रथम प्रकाशित कृति 'कलम के देव' भक्ति गीत संग्रह है। 'लोकतंत्र का मकबरा' तथा 'मीत मेरे' आपकी छंद मुक्त कविताओं के संग्रह हैं। आपकी चौथी प्रकाशित कृति है 'भूकंप के साथ जीना सीखें'। आपनें निर्माण के नूपुर, नींव के पत्थर, राम नम सुखदाई, तिनका-तिनका नीड़, सौरभ:, यदा-कदा, द्वार खड़े इतिहास के, काव्य मन्दाकिनी २००८ आदि पुस्तकों के साथ साथ अनेक पत्रिकाओं व स्मारिकाओं का भी संपादन किया है।
आपको देश-विदेश में १२ राज्यों की ५० सस्थाओं ने ७० सम्मानों से सम्मानित किया जिनमें प्रमुख हैं : आचार्य, २०वीन शताब्दी रत्न, सरस्वती रत्न, संपादक रत्न, विज्ञानं रत्न, शारदा सुत, श्रेष्ठ गीतकार, भाषा भूषण, चित्रांश गौरव, साहित्य गौरव, साहित्य वारिधि, साहित्य शिरोमणि, काव्य श्री, मानसरोवर साहित्य सम्मान, पाथेय सम्मान, वृक्ष मित्र सम्मान, आदि।

वर्तमान में आप अनुविभागीय अधिकारी मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग के रूप में कार्यरत हैं

मणिपुरी, कथकली, भरतनाट्यम, कुचपुडी, गरबा अपना है.
लेजिम, भंगड़ा, राई, डांडिया हर नूपुर का सपना है.
गंगा, यमुना, कावेरी, नर्मदा, चनाब, सोन, चम्बल,
ब्रम्हपुत्र, झेलम, रावी अठखेली करती हैं प्रति पल.
लहर-लहर जयगान गुंजाये, हिंद में है और हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....

मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजा सबमें प्रभु एक समान.
प्यार लुटाओ जितना, उतना पाओ औरों से सम्मान.
स्नेह-सलिल में नित्य नहाकर, निर्माणों के दीप जलाकर.
बाधा, संकट, संघर्षों को गले लगाओ नित मुस्काकर.
पवन, वन्हि, जल, थल, नभ पावन, कण-कण तीरथ, हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....

जै-जैवन्ती, भीमपलासी, मालकौंस, ठुमरी, गांधार.
गजल, गीत, कविता, छंदों से छलक रहा है प्यार अपार.
अरावली, सतपुडा, हिमालय, मैकल, विन्ध्य, उत्तुंग शिखर.
ठहरे-ठहरे गाँव हमारे, आपाधापी लिए शहर.
कुटी, महल, अँगना, चौबारा, हर घर-द्वारा हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....

सरसों, मका, बाजरा, चाँवल, गेहूँ, अरहर, मूँग, चना.
झुका किसी का मस्तक नीचे, 'सलिल' किसी का शीश तना.
कीर्तन, प्रेयर, सबद, प्रार्थना, बाईबिल, गीता, ग्रंथ, कुरान.
गौतम, गाँधी, नानक, अकबर, महावीर, शिव, राम महान.
रास कृष्ण का, तांडव शिव का, लास्य-हास्य सब हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....

ट्राम्बे, भाखरा, भेल, भिलाई, हरिकोटा, पोकरण रतन.
आर्यभट्ट, एपल, रोहिणी के पीछे अगणित छिपे जतन.
शिवा, प्रताप, सुभाष, भगत, रैदास कबीरा, मीरा, सूर.
तुलसी. चिश्ती, नामदेव, रामानुज लाये खुदाई नूर.
रमण, रवींद्र, विनोबा, नेहरु, जयप्रकाश भी हिंदी है.
हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....
********************

10 comments:

  1. JO KUCHH HAI IS DESH MEIN HAI
    SAARAA KAA SARAA HINDI HAI
    HAR HINDI BHARAT MAA KE
    MAATHE KEE UJJWAL BINDI HAI
    KITNA SATYA KAHAA HAI ACHARYA SANJEEV " SALI" JEE NE.
    RASHTRIYA BHAVNAAON SE PARIPOORN
    UNKEE IS UTKRISHT KAVITA KE LIYE
    BADHAAEEYAN HEE BADHAAEEYAN.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आचार्य जी प्रणाम ,,
    कमेन्ट क्या करू अभिभूत हूँ ,,
    और नतमस्तक हूँ की किस तरह आप ने ,,
    भारत की अनेकता में एकता दर्शाती संस्क्रती को
    एक कविता में पिरो दिया
    मेरा प्रणाम स्वीकार करे
    सादर
    प्रवीण पथिक

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. आचार्य जी आपकी कविता तो माँ भारती की विशेषता का गुणगान कर रही है...नमन

    उत्तर देंहटाएं
  5. आचार्य जी की रचना है, उत्कृष्ट होनी ही है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. ट्राम्बे, भाखरा, भेल, भिलाई, हरिकोटा, पोकरण रतन.
    आर्यभट्ट, एपल, रोहिणी के पीछे अगणित छिपे जतन.
    शिवा, प्रताप, सुभाष, भगत, रैदास कबीरा, मीरा, सूर.
    तुलसी. चिश्ती, नामदेव, रामानुज लाये खुदाई नूर.
    रमण, रवींद्र, विनोबा, नेहरु, जयप्रकाश भी हिंदी है.
    हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है....

    आभार सलिल जी।

    उत्तर देंहटाएं
  7. राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचना के लिये सलिल जी का आभार

    उत्तर देंहटाएं
  8. सलिल जी !

    राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचना .....

    आभार...

    नमन....

    उत्तर देंहटाएं
  9. भारत माँ की बोल जय, जब तक तन में जान.

    प्रति पल हैं तैयार हम, हँसकर हों कुर्बान.

    जिनने यह रचना पढी, उन सबका आभार.

    करें टिप्पणी जो उन्हें, अर्पित नेह-दुलार.

    उत्तर देंहटाएं
  10. सलिल जी !

    राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचना .....

    आभार...

    नमन....

    उत्तर देंहटाएं

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