.........प्रात: 6.00 बजे से:- बुकर प्राइज़ की जगह देखना चाहते हैं तेजेन्द्र कथा यूके सम्मान को [तेजेन्द्र शर्मा जी के जन्मदिवस पर विशेष प्रस्तुति] - सूरजप्रकाश......अपरान्ह 1.00 बजे से:- सहेलियों संग नुक्कड़ पर जब दिखती है [ग़ज़ल] - अवनीश तिवारी.......

सोमवार, १२ अक्तूबर २००९

चाँद ! अब घर से निकले [कविता-पेंटिंग] - राजाभाई कौशिक

नहाय धोय पूजा मनौती में

दिन सारा निकले
सुख माँगें सम्पत्ति माँगें
अन्न का दाना भी न निगले
करूँ रोज ही करवा चोथ
फिर भी वो ना पिघले
साँझ हुई कि रोज
चाँद अब घर से निकले

रचनाकार परिचय:-

सालासर में ६ नवम्बर, १९७३ को जन्मे राजाभाई कौशिक अजमेर के डी.ए.वी. कालेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के उपरांत आयुर्वेद की ओर उन्मुख हुये और इस क्षेत्र में सुयश प्राप्त किया।

वर्तमान में राजस्थान के चुरू में निवास कर रहे राजाभाई ने अनेक कविताएं, लेख, व्यंग्य आदि लिखें हैं और कई सम्मान प्राप्त किये हैं। आप एक अच्छे चित्रकार भी हैं।
पी पी कर करे ताण्डव
चले दिन दिन शिव से मिलने
हे ईश्वर! इस घर को संभालो
चलते चलते सूखे मे फिसले
तीज त्यौंहार होली दीवाली क्या
दिन दिन फाके मे निकले
छलनी लिये छत पर खड़ी
अब तो पसलियों से दम ही निकले
मुड़ मुड़ कर चन्दा देखे
आँसू भी ओस बन बिखरे
चिड़िया भी दुखड़ा रोये मेरा
करुणा के सागर से सूरज है निकले
हे चौथ माता तेरी तूँ ही जाने
मेरे तो पड़े रह गये चावल उबले
एक वर माँगू बस
अब तो मेरा चाँद घर से न निकले

9 टिप्पणियाँ:

बेनामी October 12, 2009 1:10 PM  

Good Painting nice poem.

Alok Kataria

सुषमा गर्ग October 12, 2009 3:27 PM  

सुन्दर प्रस्तुति

अनिल कुमार October 12, 2009 3:30 PM  

कविता कमजोर है पर पेंटिंग जोरदार है

अनन्या October 12, 2009 4:50 PM  

पेंटिंग बहुत पसंद आयी।

vishwash October 12, 2009 5:15 PM  

करवा चौथ पर सुन्दर प्रस्तुति राजाभाई कौशिक चित्र बहुत सजीले बनाते हैं। इनका पिछला चित्र जो साहित्य शिल्पी पर आया था मन होह गया था।

अनिल कुमार October 13, 2009 9:05 AM  

बहुत खूब

अभिषेक सागर October 13, 2009 9:48 AM  

बहुत अच्छी प्रस्तुति, बधाई।

rajiv singh renusagar October 13, 2009 12:51 PM  

sundar rachnaa badhaayee ho

राजीव तनेजा October 15, 2009 1:52 PM  

स्त्री दुख को व्यक्त करती सुन्दर रचना ...

अक्टूबर-2009 में अब तक प्रकाशित...

कविता:-डॉ. वेद व्यथित, धीरेन्द्र सिंह, लावण्या शाह, विपुल शुक्ला, श्रीकान्त मिश्र 'कान्त', सुदर्शन ‘प्रियदर्शिनी’, अनामिका, विजय कुमार सपत्ति, चाँद ! अब घर से निकले [कविता-पेंटिंग] - राजाभाई कौशिक, अम्बरीष श्रीवास्तव, दीप और कवि महेंद्रभटनागर , दीपावली पर त्रिपदियाँ - डॉ. वेद व्यथित ,
कहानी:- संगीता पुरी,
गज़ल:-नीरज गोस्वामी, द्विजेन्द्र द्विज, प्राण शर्मा,
जीवन परिचय:-
नज़म:-
काव्यालोचना:-

साहित्य समाचार:-

गीत:-

कवि चर्चा:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन - रिपोर्ट, " हिन्दी दिवस और साहित्य शिल्पी का आज जन्मदिवस" [आज साहित्य शिल्पी का स्थापना दिवस है] - विशेष प्रस्तुति, " साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन की रिपोर्ट, समाचार माध्यमों एवं विभिन्न ब्ळोग मंचों पर।,

अक्टूबर-2009 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': वदाभास पुनरुक्त है, अलंकार ज्यों फूल- काव्य का रचना शास्त्र: ३०, वीप्सा घृणा-विरक्ति है- काव्य का रचना शास्त्र: ३१, अलंकार स्मरण 'सलिल', इससे उसकी याद- काव्य का रचना शास्त्र: ३२,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:- अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार,
आलेख:- [ग़ाँधी जयंति पर विशेष] - कृष्ण कुमार यादव, यह प्रवासी हिन्दी का स्वर्ण युग है [आलेख/ परिचर्चा] - तेजेन्द्र शर्मा, प्रेमचंद का मर्मस्पर्शी कृषक-चिंतन [आज पुण्यतिथि पर विशेष प्रस्तुति] - पुनीता ठाकुर, इरशाद अली जी की पुस्तक "ए टू जैड ब्लोगिंग" [विशेष आलेख] - मोहिन्दर कुमार, कोई जन्मदिवस पर उत्साहित कैसे हो सकता है....[आलेख/विडियो रिपोर्ट] - श्रीकान्त मिश्र 'कान्त', महाप्राण निराला फक्कड़ ही रहे - अभिषेक सागर, विभिन्न रूप हैं दीपावली के - कृष्ण कुमार यादव, तुलसी में दियना जलाए हो माय - प्रो. अश्विनी केशरवानी,

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